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रेलवे ने वेरिएबल DA बढ़ोतरी करने का दिया आदेश, इन लाखों कर्मचारियों को होगा साीधा फायदा

रेलवे बोर्ड की तरफ से कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के लिए वेरिएबल डीयरनेस अलाउंस में इजाफा किया गया है. रेलवे बोर्ड की तरफ से हर जोन को नए नियम को लागू करने का सख्त आदेश दिया गया है. आइए जानते हैं कर्मचारियों और ठेकेदारों पर इसका क्या असर होगा?

रेलवे ने वेरिएबल DA बढ़ोतरी करने का दिया आदेश, इन लाखों कर्मचारियों को होगा साीधा फायदा
Image Credit: (X) रेलवे का नया नियम 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गया है.

यदि आप खुद या आपका कोई मिलने वाला भारतीय रेलवे में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करता है तो यह खबर आपके काम की है. बढ़ती महंगाई के बीच रेलवे बोर्ड की तरफ से लाखों कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को खुशियों की सौगात दी गई है. रेलवे ने इन कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के लिए वेरिएबल डियरनेस अलाउंस (VDA) को रिवाइज कर दिया है. लेबर मिनिस्ट्री की तरफ से जारी आदेश के बाद रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे और यूनिट्स को इस आदेश का पालन करने के सख्त आदेश दिये हैं. रेलवे की तरफ से किये जा रहे इस बदलाव का आखिर कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?

क्या है रेलवे बोर्ड का आदेश?

रेलवे बोर्ड की तरफ से 28 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार लेबर ब्यूरो और मिनिस्ट्री ऑफ लेबर एंड एम्पलॉयमेंट की तरफ से 30 सितंबर 2026 को जारी आदेश के आधार पर वीडीए (VDA) की दर में बदलाव किया गया है. नया नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू माना जाएगा. रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे (Zonal Railways), प्रोडक्शन यूनिट और दूसरे रेलवे संस्थानों से साफ कहा है कि बदली हुई दर को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए, ताकि फील्ड में काम करने वाले मजदूरों को उनका पूरा हक मिले.

किन-किन वर्कर्स को मिलेगा फायदा?

  • रेलवे बोर्ड की तरफ से जारी आदेश का दायरा व्यापक है और इसमें कई तरह की एम्पलॉयमेंट कैटेगरीज शामिल हैं-
  • माइनिंग एक्टिविटी: आयरन ओर (लोह अयस्क), कोयले से जुड़े मिनरल्स, ग्रेनाइट, संगमरमर, अभ्रक और कई दूसरे खनिज खदानों में काम करने वाले वर्कर शामिल हैं.
  • कंस्ट्रक्शन और मेंटीनेंस: सड़कों और रनवे का निर्माण या मेंटीनेंस, बिल्डिंग ऑपरेशन, अंडरग्राउंड केबल बिछाना, बिजली की लाइन डालना, वाटर सप्लाई और सीवेज पाइपलाइन आदि से जुड़े काम.
  • सफाई और सुरक्षा कर्मी: सफाई और झाड़-पोंछा लगाने वाले कर्मचारी. इसके अलावा हथियारों के साथ या हथियारों के बिना पहरा देने वाले सुरक्षा कर्मी.

इस बार रेलवे बोर्ड ने महज आदेश जारी करने का ही काम नहीं किया, बल्कि रेलवे की तरफ से आदेश का पालन किये जाने के लिए भी कदम उठाए हैं. रेलवे बोर्ड की तरफ से साफ कहा गया है कि सभी रेलवे अधिकारी यह चेक करें कि ठेकेदार अपने मजदूरों को तय मिनिमम वेज (Minimum Wages) का भुगतान समय पर करें. इस आदेश को रेलवे मिनिस्ट्री के फाइनेंस डायरेक्टरेट की सहमति के बाद ही जारी किया गया है. इसका मतलब साफ है कि बजट और पैसों के आवंटन को लेकर कागजी कार्रवाई पक्की कर ली गई है.

ठेकेदारों पर कसेगा शिकंजा

आमतौर पर होता यह है कि कागजों पर बड़े-बड़े नियम तो बन जाते हैं, लेकिन जमीनी तौर पर ठेकेदार मजदूरों का हक मार लेते हैं और उन्हें तय मानक से कम पैसा देते हैं. लेकिन इस बार लेबर कोड्स से जुड़े नियमों का हवाला देकर रेलवे ने सख्ती दिखाई है. यदि कोई ठेकेदार रेलवे की तरफ से जय वीडीए और मिनिमम मजदूरी के नियमों को फॉलो नहीं करता तो रेलवे प्रशासन उस पर कठोर कार्रवाई कर सकता है. इस रिवीजन से महंगाई की मार झेल रहे कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है.

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About the Author

Kriyanshu Saraswat

Kriyanshu Saraswat

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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