4 घंटे में दिल्ली से बनारस, 2027 में आ रही देश की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन; 280 KM की रफ्तार...और क्या सुविधा होगी?
Bullet Train Corridors: रेलवे की तरफ से 866.87 करोड़ की लागत से देश की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन (B-28) तैयार की जा रही है. BEML और ICF चेन्नई की तरफ से डेवलप यह 280 kmph की रफ्तार वाली हाई-स्पीड ट्रेन 2027 तक पटरियों पर उतरने के लिए तैयार है.
High Speed Trains in 2027: भारतीय रेलवे की तरफ से यात्री सुविधाओं पर लगातार काम किया जा रहा है. यही कारण है कि रेलवे आज एक नए इतिहास की दहलीज पर खड़ी है. जी हां, इसके बाद दिल्ली से बनारस तक का सफर आप 4 घंटे से भी कम समय में कर सकेंगे. अभी इस सफर को तय करने में सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत को 8 घंटे का समय लगता है. साल 2017 में जब देश के अंदर बुलेट ट्रेन के पहले प्रोजेक्ट की नींव रखी गई तो उस समय जापानी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता थी. लेकिन आज इसके 10 साल बीतने जा रहे है और अब 2027 तक भारत 'मेड इन इंडिया' बुलेट ट्रेन पटरियों पर उतारने की तैयारी कर रहा है.
866.87 करोड़ के बजटीय आवंटन और स्वदेशी तकनीक से तैयार हो रही यह बुलेट ट्रेन 280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ेगी, बल्कि भारत को दुनिया के चुनिंदा हाई-स्पीड रेल मैन्युफैक्चरिंग देशों की कतार में खड़ा कर देगी. आइए जानते हैं भारत का यह ड्रीम प्रोजेक्ट कैसे साकार हो रहा है और यह जापानी व यूरोपीय ट्रेनों से कितनी अलग होगी? 2017 में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के साथ हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की शुरुआत हुई थी. एक दशक बाद भारतीय रेलवे केवल पटरियां ही नहीं बिछा रही, बल्कि आज ट्रेन का निर्माण भी खुद देश के अंदर होने जा रहा है. 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत तैयार हो रही यह ट्रेन देश की इंजीनियरिंग हिस्ट्री की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है.
हाई स्पीड ट्रेन का निर्माण शुरू
चेन्नई में स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी (ICF) ने बीईएमएल लिमिटेड (BEML) को दो प्रोटोटाइप हाई-स्पीड ट्रेनसेट के डिजाइन, निर्माण और कमीशनिंग के लिए 866.87 करोड़ का ठेका दिया है. इन स्वदेशी बुलेट ट्रेनों की मैन्युफैक्चरिंग के लिए बीईएमएल (BEML) ने बेंगलुरु के अंदर डेडिकेटेड 'आदित्य' हाई-स्पीड रेल कॉम्प्लेक्स की नींव रखी है. प्रोजेक्ट का कोडनेम 'B-28 ट्रेन सेट' रखा गया है, जिनका निर्माण शुरू हो चुका है.
250 किमी की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन
B-28 ट्रेन सेट को 280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है. हालांकि, इसकी ऑपरेशनल रफ्तार 250 किमी प्रति घंटा के करीब होगी. योजना के अनुसार मार्च 2027 तक इसका पहला प्रोटोटाइप बनकर तैयार होने की उम्मीद है. इसके रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) की तरफ से कड़े ट्रायल से गुजारा जाएगा. इसके बाद अगस्त 2027 तक सूरत से बिलीमोरा के बीच देश की पहली बुलेट ट्रेन सर्विस कमर्शियली शुरू होने की उम्मीद है.
मौसम को ध्यान में रखकर तैयार होगी ट्रेन
जापान और यूरोपीय देशों में चलने वाली बुलेट ट्रेन को सर्दियों के मौसम को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है. लेकिन देश की स्वदेशी बुलेट ट्रेन को भारतीय मौसम के अनुरूप ज्यादा गर्मी और धूल को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है. शुरुआत में तैयार होने वाले ट्रेन सेट को स्टेनलेस स्टील से बनाया जाएगा. उसके बाद आने वाले समय में 300 से 350 किमी प्रति घंटा की रफ्तार को ध्यान में रखकर एल्युमीनियम ट्रेन सेट बनाने की भी तैयारी है.
ज्यादा तेज दौड़ सकेगी एल्युमिनियम से बनी ट्रेन
दरअसल, एल्युमिनियम स्टील के मुकाबले हल्का होता है तो इससे बनी ट्रेन ज्यादा रफ्तार से दौड़ सकती है. ऐसा देश में पहली बार होगा. बुलेट ट्रेन के हर ट्रेनसेट में 8 कोच होंगे, जो पूरी तरह से एयर कंडीशंड (AC Chair Car) होंगे. यात्रियों को ग्लोबल लेवल का एक्सपीरियंस देने के लिए रिक्लाइनिंग और 360 डिग्री रोटेटिंग (घूमने वाली) सीटें, ऑनबोर्ड इंफोटेनमेंट सिस्टम और मॉर्डन डिस्प्ले दिये जाएंगे. इसके अलावा दिव्यांगों के लिये ट्रेन के कोच में खास सुविधा रहेगी.
हाई-स्पीड ट्रेन बनाना बड़ी चुनौती
ट्रेडिशनल एलएचबी (LHB) कोच बनाने के मुकाबले हाई-स्पीड ट्रेन बनाना बड़ी चुनौती है. इतनी तेज रफ्तार पर ट्रेन को स्थिर रखना, हवा के प्रेशर को संभालना और हादसे की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित रखना काफी मुश्किल काम है. इसके लिए भारतीय रेलवे को हाई-पावर मोटर, एडवांस ब्रेकिंग सिस्टम, कंट्रोल सॉफ्टवेयर और सस्पेंशन टेक्निक को खुद डेवलप और कस्टमाइज करना पड़ रहा है.
7 नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर
- मुंबई से पुणे का सफर - 48 मिनट
- पुणे से हैदराबाद का सफर : 1 घंटा 55 मिनट
- हैदराबाद से बेंगलुरु का सफर : 2 घंटे
- हैदराबाद से चेन्नई का सफर : 2 घंटे 55 मिनट
- चेन्नई से बेंगलुरु का सफर : 1 घंटा 13 मिनट
- दिल्ली से वाराणसी का सफर : 3 घंटे 50 मिनट
- वाराणसी से सिलीगुड़ी वाया पटना : 2 घंटे 55 मिनट