)
भारतीय रेलवे ने एक नया कीर्तिमान बनाया है. 7 सितंबर 2026 को रेलवे के रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) के जरिए एक ही दिन में 22.26 लाख से ज्यादा आरक्षित टिकट बुक हुए. इतिहास में पहली बार 24 घंटे के भीतर बुकिंग 22 लाख के पार गई है. यह ऐतिहासिक आंकड़ा सिर्फ एक रिकॉर्ड भर नहीं है, बल्कि यह साबित करता है कि भारतीय रेलवे का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अब भारी ट्रैफिक के बीच भी बिना लड़खड़ाए काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है और करोड़ों मुसाफिरों की मांग को एक साथ आसानी से संभाल रहा है.
दरअसल, ट्रेन टिकट बुकिंग पर सबसे ज्यादा दबाव सुबह 10 और 11 बजे होता है. 10 बजे AC और 11 बजे स्लीपर के तत्काल टिकट खुलते हैं, इस दौरान लाखों लोग एक साथ वेबसाइट और ऐप पर आते हैं. पीआरएस (PRS) की असली ताकत यही है कि भारी ट्रैफिक के बाद भी इसका सर्वर क्रैश नहीं हुआ, सिस्टम ने बिना रुके हर मिनट लाखों टिकट आसानी से बुक किए. इसी मजबूत तकनीक के दम पर 22 लाख टिकटों का नया रिकॉर्ड बन पाया.
इतने सारे टिकट क्यों बुक हुए?
दरअसल, सितंबर की शुरुआत में बुकिंग का यह नया रिकॉर्ड बनने की सबसे बड़ी वजह आगामी त्योहार हैं. रेलवे में 60 से 120 दिन पहले एडवांस रिजर्वेशन शुरू हो जाता है. दिवाली, छठ पूजा और सर्दियों की छुट्टियों में घर जाने वाले लोग महीनों पहले से टिकट बुक कराने में जुट जाते हैं, जिसके चलते बुकिंग संख्या अचानक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई.
पिछला रिकॉर्ड कितना था?
एक दिन में सबसे ज्यादा टिकट बुक होने का पिछला रिकॉर्ड 19 अगस्त 2025 को बना था. उस दिन कुल 20,45,272 टिकट बुक हुए थे. अब करीब 9 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ नया रिकॉर्ड बन गया है. 7 सितंबर 2026 को कुल 22,26,786 टिकट बुक किए गए.
पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) क्या है?
रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) द्वारा विकसित पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) भारतीय रेलवे का 'डिजिटल दिमाग' है. यह वही सिस्टम है, जो तय करता है कि किस यात्री को कौन-सी सीट मिलेगी. चाहे आप रेलवे स्टेशन की खिड़की से टिकट खरीदें या घर बैठे IRCTC ऐप से, दोनों जगह इसी एक सिस्टम से टिकट कटता है.
यह सिस्टम आपके लिए क्या-क्या काम करता है?
सीट देना: टिकट बुक करते ही यह तय करता है कि सीट कंफर्म मिलेगी, आरएसी (RAC) होगी या वेटिंग लिस्ट में जाएगी.
टिकट बदलना या कैंसिल करना: अगर आपको टिकट कैंसिल कराना हो या चढ़ने का स्टेशन (Boarding Point) बदलना हो, तो यह काम इसी सिस्टम से तुरंत हो जाता है.
फाइनल लिस्ट (चार्ट) बनाना: ट्रेन छूटने से कुछ घंटे पहले जो फाइनल चार्ट बनता है, वह इसी सिस्टम से तैयार होकर निकलता है.
पहले कैसे बुक होते थे ट्रेन टिकट?
आज मोबाइल से चंद सेकंड में टिकट बुक हो जाता है, लेकिन 40 साल पहले यह काम किसी जंग जीतने जैसा था.
1986 से पहले मैनुअल दौर
कंप्यूटर नहीं थे, इसलिए सारा काम बड़े-बड़े कागजी रजिस्टरों में हाथ से लिखकर होता था. मुसाफिरों को घंटों लंबी लाइनों में खड़े रहना पड़ता था. सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि आप जिस स्टेशन पर खड़े हैं, वहीं से शुरू होने वाली ट्रेन का टिकट मिलता था, दूसरे शहर की ट्रेन का टिकट बुक कराना लगभग नामुमकिन था.
1986 में कंप्यूटर की पहली एंट्री
रेलवे की तकनीकी शाखा 'CRIS' ने पहली बार इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम शुरू किया. इसके बाद 'CONCERT' नाम का एक देशव्यापी नेटवर्क बना, जिसने देश के अलग-अलग रेलवे काउंटरों को आपस में जोड़ दिया. अब मुसाफिर किसी भी काउंटर से देश की किसी भी ट्रेन का टिकट ले सकते थे.
2000 के बाद इंटरनेट और मोबाइल क्रांति
IRCTC की वेबसाइट और ऐप आने से टिकट खिड़की की कतारें सीधे मुसाफिरों की जेब में आ गईं. अब रेलवन (RailOne) और मोबाइल ऐप्स के जरिए लोग घर बैठे मिनटों में सीट बुक कर लेते हैं.