SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

रेलवे से पार्सल भेजना होगा आसान, घर से उठेगा सामान और दरवाजे तक होगी डिलीवरी, आपको कैसे मिलेगा इसका फायदा?

भारतीय रेलवे दिल्ली, मुंबई समेत आठ शहरों में ‘घर से घर तक’ डोर-टू-डोर पार्सल सेवा शुरू करने जा रहा है. इसके तहत ग्राहक रेल पार्सल ऐप से घर बैठे बुकिंग कर सकेंगे.

Written By Gaurav Singh
Published: Oct 28, 2026, 09:53 PM IST | Updated: Oct 28, 2026, 10:21 PM IST
Image Credit: ट्रेन से दूसरे शहर सामान भेजने के लिए अब रेलवे स्टेशन के चक्कर लगाने की परेशानी कम हो सकती है.| AI
Join

Indian Railways: भारतीय रेलवे आठ शहरों में 'डोर-टू-डोर' पार्सल सर्विस शुरू करने जा रहा है. एक पायलट परीक्षण के बाद ग्राहक 'रेल पार्सल ऐप' (जिसे 'घर से घर तक' नाम दिया गया है) के जरिए अपने घर से ही पार्सल पिकअप और डिलीवरी बुक कर सकेंगे. इस सर्विस को शुरू करने वाले शहरों में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलुरु और पुणे शामिल हैं.

रेलवे के कमर्शियल मॉडल में किया एक बड़ा बदलाव

ये सिस्टम रेलवे के कमर्शियल मॉडल में एक बड़ा बदलाव है. अब ग्राहकों को अपना सामान पार्सल ऑफिस तक लाने की जरूरत नहीं होगी. रेलवे स्टेशनों के बीच मुख्य परिवहन (ट्रंक हॉल) का काम खुद संभालेगा, जबकि शुरुआती और आखिरी चरण (फर्स्ट और लास्ट माइल) की जिम्मेदारी निजी लॉजिस्टिक्स पार्टनर्स को सौंप दी जाएगी. 

लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए ये एक नया डिस्ट्रीब्यूशन चैनल है. वहीं, सामान भेजने वालों के लिए कम मात्रा वाले और टाईम-सेंसिटिव कार्गो के मामले में सड़क और हवाई मार्ग के अलावा ये एक तीसरा ऑप्शन होगा.

ये मॉडल कैसे काम करता है?

ये ऐप एक डिजिटल मार्केटप्लेस की तरह काम करता है. ग्राहक अपना सामान बुक करते हैं, लॉजिस्टिक्स पार्टनर चुनते हैं और ऑनलाइन पेमेंट करते हैं. इससे उन्हें रेलवे स्टेशन जाने या पार्सल ऑफिस में कागजी कार्रवाई करने की झंझट से छुटकारा मिल जाता है.

ये भी पढ़ें : DA Hike News: सरकारी कर्मचारियों की हुई बल्ले-बल्ले! DA के लिए ₹10016 करोड़ की मंजूरी, दिवाली से पहले मिला तोहफा

सामान की आवाजाही कैसे होती है?

पहला चरण (फर्स्ट माइल): चुना गया लॉजिस्टिक्स पार्टनर ग्राहक के पते से सामान उठाता है.
दूसरा चरण (मिडल माइल): भारतीय रेलवे निर्धारित ट्रेनों के जरिए स्टेशनों के बीच सामान पहुंचाता है.
तीसरा चरण (लास्ट माइल): पार्टनर सामान को उसके गंतव्य (मंजिल) तक पहुंचाता है. 

चूंकि इस प्लेटफॉर्म पर कई लॉजिस्टिक्स पार्टनर्स जुड़े हुए हैं. इससे रेलवे को अपनी ट्रेनों की खाली क्षमता का उपयोग करने का मौका मिलता है और उसे खुद का कोई पिकअप या डिलीवरी बेड़ा (फ्लीट) बनाने की जरूरत भी नहीं पड़ती.


त्योहारी सीजन के लिए कीमतों में बदलाव शुरू?

इस लॉन्च के साथ एक और व्यावसायिक बदलाव भी हुआ है. इस महीने की शुरुआत में रेलवे बोर्ड ने दिवाली-क्रिसमस सीजन को देखते हुए पार्सल कोचों के लिए 'राउंड-ट्रिप' (आने-जाने की यात्रा) बुकिंग पर छूट की घोषणा की है. इस दौरान कारोबारी छुट्टियों के लिए अपना स्टॉक जमा करते हैं. पार्सल एग्रीगेटर वन-वे (एक तरफ के) किराए के 1.5 गुना पेमेंट पर राउंड-ट्रिप बुक कर सकते हैं. इससे कुल माल ढुलाई शुल्क में 25% की कमी आती है.

'डोर-टू-डोर' पार्सल सर्विस से जुड़े सभी सवाल का जवाब;

1. भारतीय रेलवे की 'डोर-टू-डोर' पार्सल सेवा किन शहरों में मिलेगी?


आठ शहरों में: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलुरु और पुणे. एक सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद शुरू की गई इस सेवा को 'घर से घर तक' नाम दिया गया है और इसकी बुकिंग 'रेल पार्सल ऐप' के जरिए की जा सकती है.

2. पिकअप और डिलीवरी कौन संभालता है?

ऐप के माध्यम से चुने गए निजी लॉजिस्टिक्स पार्टनर. वे पिकअप (शुरुआत) और डिलीवरी (अंतिम गंतव्य तक) का काम संभालते हैं. वे पैकेजिंग और अन्य अतिरिक्त सर्विस भी दे सकते हैं. भारतीय रेलवे स्टेशनों के बीच सामान (कंसाइनमेंट) पहुंचाने का काम करता है.

3. पार्सल कितने दिन पहले बुक किया जा सकता है?

बुकिंग की सुविधा ट्रेन के रवाना होने से 15 दिन पहले खुलती है और ट्रेन छूटने से एक दिन पहले बंद हो जाती है. लॉजिस्टिक्स पार्टनर्स को ट्रेन छूटने से कम से कम एक घंटे पहले रेलवे स्टाफ को सामान सौंपना होता है.

4. अगर मैं बुकिंग कैंसिल कर दूं तो क्या होगा?

अगर सामान (कंसाइनमेंट) पिकअप होने से पहले बुकिंग कैंसिल की जाती है, तो ₹10 का क्लर्केज शुल्क काटकर बाकी पूरा रेल फ्रेट (भाड़ा) वापस कर दिया जाता है. पिकअप और डिलीवरी शुल्क की वापसी संबंधित लॉजिस्टिक्स प्रोवाइडर की पॉलिसी के अनुसार होती है.

5. क्या बल्क (बड़ी मात्रा) या राउंड-ट्रिप (आने-जाने) की पार्सल बुकिंग पर कोई छूट मिलती है?

हां. रेलवे बोर्ड ने पार्सल एग्रीगेटर्स को राउंड-ट्रिप बुकिंग करने की अनुमति दी है, जिसमें किराया एक तरफ के किराए का 1.5 गुना लगता है. इससे कुल भाड़े में 25% की कमी आती है. यह छूट दिवाली-क्रिसमस के सीजन से पहले शुरू की गई थी और यह केवल 'पार्सल कोच' की बुकिंग पर लागू होती है, न कि सभी तरह के पार्सल ट्रैफिक पर.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES