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रूसी तेल हुआ दूर तो मुस्लिम देशों से मिल रहा भरपूर: बीच समंदर में भारत का खेल, होर्मुज भी फेल

India Oil Import: सितंबर में रूसी तेल का आयात घटा है. भारत का कुल तेल आयात बढ़ने के बावजूद रूसी तेल की सप्लाई गिरी है. फिर सवाल ये कि तेल आ कहां से रहा है?

Written ByBavita Jha
Published: Oct 03, 2026, 12:01 PM IST|Updated: Oct 03, 2026, 03:08 PM IST
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रूसी तेल हुआ दूर तो मुस्लिम देशों से मिल रहा भरपूर: बीच समंदर में भारत का खेल, होर्मुज भी फेल

About the Author

Bavita Jha

Bavita Jha

बवीता झा बिजनेस पत्रकार हैं, उन्हें डिजिटल और टीवी न्यूज़ मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News Hindi (Digital) में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. व्यापार जगत की जटिलताओं और आर्थिक आंकड़ों को आम पाठकों के लिए सरल भाषा में डिकोड करना उनका मजबूत पक्ष है.  • शेयर बाजार • बिजनेस एक्सप्लेनर • पर्सनल फाइनेंस और टैक्सेशन  • कमोडिटी, गोल्ड-सिल्वर ट्रेड• ग्लोबल ट्रेड • जियो इकोनॉमिकस डेवलपमेंट • कारोबार से जुड़ी सरकारी योजना और पॉलिटी • बिजनेस और मार्केट ट्रेंडZee News से पहले बवीता ने नवभारत टाइम्स (NBT) के बिजनेस सेक्शन और Oneindia जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल संस्थानों में इवनिंग शिफ्ट, होम पेज मैनेजमेंट और ट्रेडिंग न्यूज़ की अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं. इसके अलावा महुआ न्यूज़, जनसंदेश और सहारा जैसे टीवी चैनलों में प्रोग्राम प्रोड्यूसर और रनडाउन मैनेजमेंट का उनके पास 4 वर्षों का ठोस अनुभव है.  दिल्ली से पत्रकारिता में स्नातक और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाली बवीता, खबरों की सत्यता और वित्तीय मामलों की सटीक रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देती हैं.  बवीता झा से आप bavita.jha@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स  पर https://x.com/youthreporter2 के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. सोशल मीडिया पर कनेक्ट होने के लिए फेसबुक पेज https://www.facebook.com/bavita.jha , इंस्टाग्राम instagram.com/bavita.jha पर जुड़ सकते हैं. बवीता झा की खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं.
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India Oil Import:  भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है. 88 फीसदी तक कच्चे तेल का आयात करता है. 41 से अधिक सप्लायर देशों के साथ भारत तेल का इम्पोर्ट करता है.हालांकि अमेरिका के समय-समय पर टैरिफ का दबाव भारत के तेल खरीद को प्रभावित करता रहा है.  

रूस से तेल आयात में गिरावट

अमेरिका ने हाल ही में Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 बिल पास किया है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस और ईरान से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है. भारत उन देशों में शामिल है,जो रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है. भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 47 फीसदी तक पहुंच चुकी है, लेकिन सितंबर 2026 में हालात बदल गए.  

पांच महीने में सबसे कम तेल का आयात  

100 फीसदी टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है, जिसके बाद भारत से रूस से तेल की खरीद कम कर दी है.  सितंबर में भारत का रूस से तेल आयात घटकर करीब 17.5 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया. अप्रैल के बाद ये सबसे कम स्तर है. 

पढ़ें- ड्रैगन, डॉलर, क्रूड और ट्रंप... इकोनॉमी की रफ्तार धुआंधार, शेयर बाजार की हालत इसलिए खराब

रूसी तेल की सप्लाई कम, क्यों दूरी बना रही हैं रिफाइनरियां

ग्लोबल कमोडिटीज डेटा Kpler के मुताबिक सितंबर में भारत के कुल कच्चे तेल का आयात करीब 53 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो अगस्त के मुकाबले करीब 6 लाख बैरल अधिक है.  कच्चे तेल का आयात बढ़ा है, लेकिन उसमें रूसी तेल का आयात घटा है. टैरिफ के डर में रिफाइनरियों ने रूसी तेल से दूरी बनाई है, जो गिरकर 17.4 लाख बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया, जो अगस्त में 20.2 लाख बैरल , जुलाई में 26.5 लाख बैरल था. भले ही रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद में कमी की है, लेकिन उससे पूरी तरह से किनारा नहीं किया है. अभी भी भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है.

रूस नहीं, तो फिर कहां से आ रहा है तेल  

अब सवाल ये है कि अगर भारत रूस से नहीं, तो फिर कहां से कच्चे तेल का आयात कर रहा है. भारत ने गल्फ देशों से तेल की खरीद बढ़ा दी है. होर्मुज खतरे को देखते हुए भारतीय रिफाइनरियां भारत को अब ‘शिप-टू-शिप’ (STS) ट्रांसफर के जरिए खाड़ी देशों से खूब कच्‍चा तेल खरीद रही है.खाड़ी देशों के से कच्चे तेल का आयात अगस्त के मुकाबले 26% से उछलकर सितंबर में 36.7% पर पहुंच गया है.

  • सितंबर में इराक से तेल आयात 238.2 फीसदी उछलकर 5,10,000 बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया है. 
  • सऊदी अरब से खरीद 56.2% बढ़कर लगभग 5,43,000 बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया.
  • कुवैत से आयात 104.4% उछलकर 3,17,000 बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया.
  • कतर से आयात 1,10,000 बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया. 
  • UAE से आयात 15.8% गिरकर 4,60,000 बारल प्रतिदिन पर पहुंच गया

 

क्या होता है शिप-टू-शिप ट्रांसफर

होर्मुज तनाव के चलते यहां से तेल के जहाजों का गुजरना खतरनाक है. मिसाइल हमलों का डर सताता रहता है. ऐसे में भारत ने खाड़ी देशों से तेल की खरीद के लिए नया जुगाड़ निकाला है. होर्मुज के संवेदनशील रास्ते के जोखिम से बचने के लिए  शिप-टू-शिप ट्रांसफर पैटर्न को फॉलो कर रहा है, जिसमें गल्फ देश बड़े टैंकर से तेल भेजवने के बजाए छोटे शटल टैंकर में तेल भेज रहे हैं. छोटे शटल टैंकर होर्मुज के रास्ते को पार करने के बाद सप्लायर देश के जहाजों में बीच समंदर में ही ट्रासफर कर देते हैं. मतलब होर्मुज के खतरे का पूरा जोखिम आपूर्तिकर्ता देश खुद उठाते हैं. होर्मुज को पार करने के बाद छोटे जहाजों से पाइप के जरिए खरीदारी करने वाले देशों के जहाजों में इस तेल को ट्रांसफर किया जाता है, जहां से ये जहाज सीधे भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचते हैं. इन तरीकों से भारत अपने तेल की आपूर्ति को बनाए हुए हैं . 

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