India Oil Import: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है. 88 फीसदी तक कच्चे तेल का आयात करता है. 41 से अधिक सप्लायर देशों के साथ भारत तेल का इम्पोर्ट करता है.हालांकि अमेरिका के समय-समय पर टैरिफ का दबाव भारत के तेल खरीद को प्रभावित करता रहा है.
अमेरिका ने हाल ही में Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 बिल पास किया है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस और ईरान से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है. भारत उन देशों में शामिल है,जो रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है. भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 47 फीसदी तक पहुंच चुकी है, लेकिन सितंबर 2026 में हालात बदल गए.
100 फीसदी टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है, जिसके बाद भारत से रूस से तेल की खरीद कम कर दी है. सितंबर में भारत का रूस से तेल आयात घटकर करीब 17.5 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया. अप्रैल के बाद ये सबसे कम स्तर है.
ग्लोबल कमोडिटीज डेटा Kpler के मुताबिक सितंबर में भारत के कुल कच्चे तेल का आयात करीब 53 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो अगस्त के मुकाबले करीब 6 लाख बैरल अधिक है. कच्चे तेल का आयात बढ़ा है, लेकिन उसमें रूसी तेल का आयात घटा है. टैरिफ के डर में रिफाइनरियों ने रूसी तेल से दूरी बनाई है, जो गिरकर 17.4 लाख बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया, जो अगस्त में 20.2 लाख बैरल , जुलाई में 26.5 लाख बैरल था. भले ही रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद में कमी की है, लेकिन उससे पूरी तरह से किनारा नहीं किया है. अभी भी भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है.

अब सवाल ये है कि अगर भारत रूस से नहीं, तो फिर कहां से कच्चे तेल का आयात कर रहा है. भारत ने गल्फ देशों से तेल की खरीद बढ़ा दी है. होर्मुज खतरे को देखते हुए भारतीय रिफाइनरियां भारत को अब ‘शिप-टू-शिप’ (STS) ट्रांसफर के जरिए खाड़ी देशों से खूब कच्चा तेल खरीद रही है.खाड़ी देशों के से कच्चे तेल का आयात अगस्त के मुकाबले 26% से उछलकर सितंबर में 36.7% पर पहुंच गया है.

क्या होता है शिप-टू-शिप ट्रांसफर
होर्मुज तनाव के चलते यहां से तेल के जहाजों का गुजरना खतरनाक है. मिसाइल हमलों का डर सताता रहता है. ऐसे में भारत ने खाड़ी देशों से तेल की खरीद के लिए नया जुगाड़ निकाला है. होर्मुज के संवेदनशील रास्ते के जोखिम से बचने के लिए शिप-टू-शिप ट्रांसफर पैटर्न को फॉलो कर रहा है, जिसमें गल्फ देश बड़े टैंकर से तेल भेजवने के बजाए छोटे शटल टैंकर में तेल भेज रहे हैं. छोटे शटल टैंकर होर्मुज के रास्ते को पार करने के बाद सप्लायर देश के जहाजों में बीच समंदर में ही ट्रासफर कर देते हैं. मतलब होर्मुज के खतरे का पूरा जोखिम आपूर्तिकर्ता देश खुद उठाते हैं. होर्मुज को पार करने के बाद छोटे जहाजों से पाइप के जरिए खरीदारी करने वाले देशों के जहाजों में इस तेल को ट्रांसफर किया जाता है, जहां से ये जहाज सीधे भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचते हैं. इन तरीकों से भारत अपने तेल की आपूर्ति को बनाए हुए हैं .