रिकॉर्ड लेवल पर देश का क्रूड और LNG इम्पोर्ट, सर्दियों से पहले डिमांड बढ़ने का क्या है कारण?
अक्टूबर महीने में देश का एलएनजी और क्रूड ऑयल आयात बढ़कर रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया. इस दौरान एलएनजी का आयात 17.4 फीसदी बढ़कर 2.7 मिलियन टन और क्रूड ऑयल 5.6 एमबीडी के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया. आइए जानते हैं पावर और खाद सेक्टर की डिमांड का पूरा सच.
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग, लाल सागर में जहाजों पर हमले और खतरनाक समुद्री रास्तों के बावजूद एलएनजी (LNG) और क्रूड ऑयल इम्पोर्ट बढ़कर ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया है. जंग और तनाव के बीच कतर से लेकर अमेरिका और रूस तक भारत ने हर तरफ से रिकॉर्ड ऑयल मंगाकर अपने ऑयल रिजर्व को फुल कर लिया है. आखिर अक्टूबर में ऐसा क्या हुआ कि भारत को अचानक गैस और तेल का रिकॉर्ड आयात करना पड़ा?
अक्टूबर का महीना भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बेहद ऐतिहासिक साबित हुआ है. केप्लर की तरफ से जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार देश का LNG आयात इस महीने 17.4 प्रतिशत बढ़कर 2.7 मिलियन टन के अब तक के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया है. इतना ही नहीं कच्चे तेल (Crude Oil) का आयात भी बढ़कर नए लेवल पर पहुंच गया है. अक्टूबर महीने में देश का क्रूड ऑयल इम्पोर्ट 5.6 मिलियन बैरल प्रति दिन (mbd) पर पहुंच गया. यह पिछले साल के मुकाबले 14 प्रतिशत से भी ज्यादा है.
इतनी क्यों बढ़ गई डिमांड
भारी-भरकम डिमांड देखकर आपके मन में यह सवाल तो जरूरी आया होगा कि आखिर अचानक देश को इतने ज्यादा फ्यूल की जरूरत क्यों पड़ गई? दरअसल, इसके पीछे दो सबसे कारण पावर सेक्टर और फर्टिलाइजर सेक्टर है. ठंड शुरू होते ही सूरज की किरणें धीमी पड़ने लगती हैं, इससे सोलर एनर्जी का प्रोडक्शन कम हो जाता है. ऐसे में देश में बिजली को लेकर किसी तरह की किल्लत न हो, इसलिए पावर प्लांट्स के लिए पहले से ही गैस का बैकअप तैयार किया जा रहा है. इसके अलावा रबी सीजन की बुआई के लिए किसानों को भारी मात्रा में खाद की जरूरत होती है. इसके लिए फर्टिलाइजर कारखानों को क्रूड ऑयल के रूप में LNG की जरूरत होती है.
घरेलू प्रोडक्शन गिरा तो विदेशी गैस पर भरोसा बढ़ा
देश में गैस की लगातार बढ़ती डिमांड का एक और बड़ा कारण यह है कि देश में नेचुरल गैस का प्रोडक्शन कम हो गया है. इसी कारण गैस के मामले में देश की विदेश पर निर्भरता 50 प्रतिशत से बढ़कर 52 प्रतिशत पर पहुंच गई है. घरेलू सामान कम पड़ने पर बाजार से ज्यादा खरीदारी करनी पड़ती है. ठीक इसी तरह भारतीय रिफाइनरीज और एनर्जी कंपनियों की तरफ से किया गया. दुनियाभर के देशों से रिकॉर्ड गैस मंगा ली.
कतर ने निभाया भारत से याराना
वेस्ट एशिया में चल रही जंग और तनाव के कारण कतर से आने वाली गैस की सप्लाई कुछ समय के लिए बाधित हो गई थी. होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते में बने डर की वजह से शिपमेंट अटक गए. लेकिन अक्टूबर में ही कतर ने भारत को 0.4 मिलियन टन से ज्यादा LNG भेजी. एनएनजी का यह आंकड़ा सितंबर के मुकाबले 370 प्रतिशत ज्यादा है. कतर हमेशा से देश का सबसे भरोसेमंद गैस पार्टनर रहा है. देश की कुल जरूरत का 40 से 50 प्रतिशत कतर से आता रहा है. तमाम मुश्किलों के बावजूद कतर ने यह साबित कर दिया है कि वह अपने वायदों से पीछे हटने वाला नहीं है.
नंबर-1 सप्लायर बन गया अमेरिका
कतर ने फिर से धमाकेदार तरीके से सप्लाई शुरू कर दी है. लेकिनल 29 अक्टूबर तक के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LNG सप्लायर बना हुआ है. अमेरिका की तरफ से भारत को 0.6 मिलियन टन गैस की आपूर्ति की गई है. इसके अलावा यूएई (UAE), ओमान, अंगोला, नाइजीरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भी भारत के पोर्ट पर गैस से भरे जहाज लगातार पहुंचते रहे.
रूसी तेल का दबदबा बरकरार
यदि क्रूड ऑयल की बात करें तो रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है. भारत आने वाले कुल देश में अभी भी रूस की हिस्सेदारी करीब 36 प्रतिशत की है. जुलाई में जहां रूस से 2.8 मिलियन बैरल रोज तेल आ रहा था, वहीं अक्टूबर में यह घटकर महज 2 मिलियन बैरल रह गया. केप्लर के सीनियर एनालिस्ट निखिल का कहना है कि रूस से तेल लाने का भाड़ा काफी महंगा हो गया है. भाड़ा महंगा होने के कारण रूसी तेल का जो फायदा भारत को मिल रहा था, वो कम हो गया है. इसी का फायदा उठाकर मिडिल ईस्ट के सप्लायर्स ने भारत को किफायती रेट ऑफर करना शुरू कर दिया है. यही कारण है कि अक्टूबर में भारत का तेल इम्पोर्ट रोजाना 2.3 मिलियन बैरल का रहा. इसमें सऊदी अरब सबसे आगे रहा और उसके बाद इराक का नंबर आया.