GDP Forecast: भारत की विकास दर 7% की दर से बढ़ने का अनुमान, चीन और अमेरिका से भी ज्यादा कैसे?
आईएमएफ ने FY 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है. यह दूसरे विकसित देशों अमेरिका और चीन के मुकाबले काफी ज्यादा है. लेकिन क्या आपको पता है भारत जीडीपी ग्रोथ के मामले में इन देशों से आगे क्यों है?
आईएमएफ (IMF) ने फाइनेंशियल ईयर 2027 और 2028 के लिए भारत के जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है. इससे पहले आईएमएफ ने ही 2027 के लिए 6.4 प्रतिशत और 2028 के लिए 6.7 प्रतिशत का अनुमान जताया था. दुनियाभर में चल रही जियो-पॉलिटकल टेंशन और ऊंची तेल कीमत के बीच देश की इकोनॉमी की रफ्तार मजबूत बनी हुई है. आईएमएफ की तरफ से जारी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में ग्लोबल इकोनॉमी को लेकर कई और खुलासे किये गए हैं.
AI से मिला इकोनॉमी को सपोर्ट
आईएमएफ ने 2026 के लिए ग्लोबल ग्रोथ के अनुमान को भी बढ़ाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया है. यह आंकड़ा पिछले साल के 3.5 प्रतिशत से काफी कम है. रिपोर्ट में बताया गया कि एआई (AI) से जुड़ा निवेश ग्लोबल इकोनॉमी को संभालने में काफी मददगार है. एआई में बढ़ रहे निवेश का ही असर है कि बढ़ती एनर्जी कॉस्ट के नुकसान में कुछ कमी आई है. पहली छमाही में भी आर्थिक गतिविधियां उम्मीद से अच्छी रही थीं. हालांकि, आईएमएफ की तरफ से यह चेतावनी भी दी गई कि एआई (AI) के निवेश में आ रही तेजी भविष्य में बड़ी समस्या भी बन सकती है. एआई से उम्मीद के अनुसार नतीजे नहीं मिले तो कंपनियों की तरफ से निवेश घटाया जा सकता है.
आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की तरफ से जारी अनुमान के अनुसार भारत 7% की ग्रोथ रेट के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी बना हुआ है. अमेरिका और चीन जैसे विकसित देश जीडीपी ग्रोथ के मामले में भारत से काफी पीछे हैं. भारत की तेज रफ्तार के मजबूत घरेलू डिमांड, कैपिटल इन्वेस्टमेंट, डिजिटल इकोनॉमी और यंग वर्कफोर्स है. आईएमएफ ने दूसरे देशों की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान कितना जताया?
- अमेरिका 2.3%
- चीन 4.5%
- ब्रिटेन 1.3%
- ब्राजील 2.2%
भारत की विकास दर बढ़ाने का कारण
आईएमएफ (IMF) ने देश की जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है. ग्लोबल अनिश्चितता के बावजूद इंडियन इकोनॉमी के मजबूत प्रदर्शन के कई कारण हैं-
मजबूत डोमेस्टिक डिमांड: विकास दर बढ़ने का सबसे अहम कारण देश के अंदर सामान और सर्विस की मजबूत खपत है. विशाल आबादी और लगातार बढ़ रहा मीडियर क्लास घरेलू डिमांड को मजबूत बनाकर रखता है.
सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी: सर्विस सेक्टर आईटी, फाइनेंशियल सर्विस, टेलीकॉम और टूरिज्म सेक्टर में लगातार मजबूत प्रदर्शन जारी है. मेक इन इंडिया और पीएलआई स्कीम के कारण मैन्युफैक्चरिंग बढ़ी है.
कैपिटल एक्सपेंडीचर: केंद्र सरकार की तरफ से हाइवे, रेलवे, पोर्ट्स और डिजिटल नेटवर्क पर किया जा रहा भारी निवेश इकोनॉमी के चक्र को तेजी से घुमा रहा है. इससे रोजगार के नए मौके बनने के साथ ही प्राइवेट सेक्टर में निवेश भी बढ़ रहा है.
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: यूपीआई, आधार और जीएसटी (GST) जैसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण भी भारत की इकोनॉमी का दायरा बढ़ा है. सरकार की तरफ से उठाए गए इन कदम की वजह से टैक्स कलेक्शन रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया.
चीन और अमेरिका से ज्यादा क्यों है ग्रोथ रेट?
भारत की विकास दर करीब 6.5% से 7% के आसपास बनी हुई है. यह चीन (4.5%-5%) और अमेरिका (2%-2.5%) के मुकाबले काफी ज्यादा है. इसे समझने के लिए इकोनॉमी के बेस साइज (Base Effect) और ग्रोथ के कारण को समझना जरूरी है.
बेस साइज बनाम प्रतिशत का गणित
ग्रोथ रेट का प्रतिशत (%) यह दर्शाता है कि इकोनॉमी पिछली स्थिति के मुकाबले कितनी तेजी से बढ़ रही है. अमेरिका आज के समय में करीब 28 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी है. इतनी बड़ी इकोनॉमी का 2% की रफ्तार से बढ़ना काफी बड़ा नंबर होता है. इसी तरह चीन की बात करें तो चीन करीब 18-19 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी है और यह 4.5% से 5% की रफ्तार से बढ़ रही है. जब बात भारत की करें तो यह करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी है. विकासशील देश होने के कारण लोअर बेस के कारण प्रतिशत में तेज ग्रोथ (6-7%) दर्ज करना ज्यादा आसान होता है. दूसरा भारत में युवाओं की वर्क फोर्स बढ़ने, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल एक्सपेंडीचर के कारण भी भारत की जीडीपी तेजी से आगे बढ़ रही है.
जंग और क्रूड ऑयल में तेजी का क्या होता है असर?
दुनिया में जारी जियो-पॉलिटिकल टेंशन और कच्चे तेल की कीमत में उतार-चढ़ाव का असर अलग-अलग इकोनॉमी पर उनकी एनर्जी निर्भरता, आर्थिक क्षमता और घरेलू पॉलिसी के आधार पर पड़ता है. भारत अपनी जरूरी का 80% से ज्यादा क्रूड ऑयल आयात करता है. दाम में उछाल आने से भारत का आयात बिल बढ़ता है और ट्रेड डेफिसिएट (Trade Deficit) बढ़ता है. इसका असर यह होता है कि माल ढुलाई महंगी हो जाती है और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें महंगी हो जाती हैं.
- अमेरिका की बात करें तो दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश बनने के कारण तेल की ऊंची कीमतों से अमेरिकी कंपनियों और निर्यातकों को अच्छा प्रॉफिट होता है. ग्लोबल ऑयल क्राइसिस से अमेरिका में भी पेट्रोल और तेल के दाम बढ़ते हैं. इस कारण फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दर घटाना मुश्किल हो जाता है.
- चीन क्रूड ऑयल का सबसे बड़ा आयातक देश है. तेल की कीमत बढ़ने से चीन के मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल सेक्टर की प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ जाती है. ड्रैगन की इकोनॉमी पहले ही रियल एस्टेट क्राइसिस और सुस्त घरेलू मांग से जूझ रही है. महंगे तेल से चीनी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव देखा जा रहा है और उसकी ग्रोथ रेट भी धीमी पड़ रही है.
- ब्रिटेन दूसरे देशों से आयात की जाने वाली एनर्जी और नेचुरल गैस पर ज्यादा निर्भर है. जंग के कारण एनर्जी सप्लाई में रुकावट आने से बिजली और हीटिंग बिल रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच जाते हैं. ब्रिटेन की इकोनॉमी की जीडीपी ग्रोथ बेहद सुस्त (1%) के करीब बनी हुई है. महंगाई और ऊंची ब्याज दर के कारण ब्रिटेन के लोगों की परचेजिंग पावर घट रही है.
विकास दर का रोजगार, महंगाई और आमदनी पर कितना असर?
देश का 7% का जीडीपी ग्रोथ रेट (GDP Growth Rate) और आम आदमी के जीवन के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है. मैक्रो-इकोनॉमिक आंकड़े देश की इकोनॉमी के मजबूत होने की गवाही दे रहे हैं. लेकिन इसका सीधा असर असर रोजगार, महंगाई और आम आदमी की जेब पर अलग-अलग तरीके से दिखाई देता है. देश की जीडीपी कंस्ट्रक्शन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग आदि के दम पर बढ़ रही है. इसका मतलब यह हुआ कि निवेश और प्रोडक्शन तो तेजी से बढ़ा है. लेकिन उस रेश्यो में नौकरियों के मौके नहीं बन पा रहे. युवाओं के बीच रोजगार की तलाश बड़ी चुनौती बनी हुई है.
महंगाई की बात करें तो डिमांड बढ़ने से इकोनॉमी की जीडीपी ग्रोथ बढ़ रही है. लेकिन रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम ऊंचे ही बने हुए हैं. जब फूड इंफ्लेशन बढ़ती है तो मिडिल क्लास की सेविंग पर सबसे ज्यादा प्रभावित होती है. देश की जीडीपी भले ही 7% की रफतार से बढ़ रही है लेकिन आम आदमी के लिए रोजमर्रा का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है.
आमदनी को लेकर जानकारों की यही राय है कि देश की रिकवरी 'के-शेप्ड' रही है. यानी समाज का जो वर्ग पहले से समृद्ध या स्किल्ड है जैसे IT, कॉर्पोरेट और हाई-एंड प्रोफेशनल्स, उनकी आमदनी तेजी से बढ़ी है. लेकिन असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, छोटे दुकानदारों और लोअर मिडिल क्लास की आमदनी या तो स्थिर हो गई या फिर वो महंगाई के मुकाबले पीछे छूट गए. कुल जीडीपी के मामले में भारत दुनिया में भले ही आगे है लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में पीछे हैं.
क्या भारत 7% की विकास दर बनाए रख सकता है?
आने वाले सालों में भारत के लिए करीब 7% की ग्रोथ रेट को मेंटेन करना मुश्किल वाला काम नहीं होगा. दरअसल, देश की घरेलू डिमांड, युवा आबादी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर काफी मजबूत है. आईएमएफ ने भी फाइनेंशियल ईयर 2027 और 2028 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को बढ़ाकर 7 फीसदी के करीब कर दिया है. हालांकि, इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए कई तरह की चुनौतियों से भी निपटना होगा. जो कि इस प्रकार हैं-
- भारत जरूरत का 80% से भी ज्यादा क्रूड ऑयल आयात करता है. मिडिल ईस्ट या दूसरे क्षेत्रों में जियो-पॉलिटिक टेंशन के कारण यदि तेल के दाम लंबे समय तक ज्यादा रहे तो इससे आयात बिल और करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ेगा. इसका असर देश में महंगाई के रूप में देखा जाएगा.
- देश की खपत में रूरल इकोनॉमी की अहम भूमिका है. मानसून की अनिश्चितता, खेती से जुड़ी चुनौतियों के कारण गांवों में क्रय शक्ति कमजोर हुई तो इसका असर डिमांड पर पड़ सकता है.
- देश की जीडीपी भले ही तेजी से बढ़ रही है लेकिन देश की युवा आबादी के लिए नौकरियों के मौके बनाना बड़ी चुनौती होगा.
- विकसित देशों जैसे अमेरिका और यूरोप में सुस्ती या पश्चिमी देशों में बढ़ते टैरिफ का चलन भारत के निर्यात (Exports) और आईटी-सर्विस सेक्टर पर पड़ सकता है.
- अभी भारत में बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रहा है. आने वाले समय में यह जरूरी है कि प्राइवेट सेक्टर भी बड़े पैमाने पर निवेश और कारखानों के एक्सपेंशन के लिए आगे आए.
AI की ग्रोथ से भारत और चीन की GDP को फायदा कैसे?
आईएमएफ (IMF) की तरफ से हाल ही में जारी रिपोर्ट (अक्टूबर 2026) के अनुसार एआई (AI) से जुड़े ग्लोबल ट्रेड (AI-related trade) में 29% की जबरदस्त उछाल दर्ज की गई है. IMF की चीफ इकोनॉमिस्ट सिल्वाना तेनरेरो के अनुसार कुल ग्लोबल ट्रेड में महज 8.3% की बढ़ोतरी हुई है, वहीं AI सेक्टर ने 29% की दर से बढ़कर दुनियाभर की अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है. एआई बूम (AI Boom) का सबसे बड़ा फायदा भारत और चीन को ही मिला है.
भारत और चीन को फायदा
भारत की आईटी कंपनियां दुनियाभर की फॉर्च्यून-500 कंपनियों को एआई ट्रांसफॉर्मेशन, डेटा मैनेजमेंट और क्लाउड माइग्रेशन में मदद कर रही हैं. इसके अलावा एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए जरूरी डेटा सेंटर और बैकएंड आईटी सर्विस में जमकर एफडीआई (FDI) आ रहा है. एआई में आई तेजी और मजबूत घरेलू डिमांड के दम पर IMF ने देश की ग्रोथ रेट का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया है. दूसरी तरफ चीन की बात करें तो एआई डेटा सेंटर और सर्वर के लिए जरूरी हार्डवेयर, प्रोसेसिंग चिप्स और इलेक्ट्रॉनिक्स की असेंबलिंग व मैन्युफैक्चरिंग में चीन का दबदबा है एआई बूम के कारण चिप्स, कूलिंग सिस्टम और सर्वर पार्ट्स की इंटरनेशनल लेवल पर डिमांड बढ़ी है. इससे चीन का टेक एक्सपोर्ट शानदार तरीके से आगे बढ़ा है.