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गाड़ी-बंगला और करोड़ों का बिजनेस छोड़ने की तैयारी, अब जंगल में ध्यान लगाएगा यह कारोबारी

सिरिपोंग ने अपनी आइसक्रीम कंपनी को बेचने का ऐलान 21 अगस्त को एक फेसबुक पोस्ट के जरिये किया था. उन्होंने आइसक्रीम प्लांट, ऑफिस, जमीन और आउटलेट के लिए 47 करोड़ रुपये की डिमांड की है. बिक्री की घोषणा करने के साथ ही उन्होंने एक शानदार ऑफर लोगों के सामने रखा है.

Written By Kriyanshu Saraswat
Published: Sep 04, 2026, 01:35 PM IST | Updated: Sep 04, 2026, 01:38 PM IST
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ICE Cream Brand Hawell: गुजरात के साबरकांठा निवासी रियल एस्टेट कारोबारी भावेश भाई भंडारी और उनके परिवार के बारे में तो आपने सुना ही होगा. भंडारी फैमिली ने साल 2024 में अपनी 200 करोड़ रुपये की संपत्ति दान कर संन्यास का रास्ता चुन लिया था. दूसरी तरफ इसी दुनिया में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो पैसे और शोहरत के पीछे भागते हैं. लेकिन थाईलैंड से एक ऐसा मामला सामने आया है जो आपको फिर से सोचने पर मजबूर कर देगा. थाईलैंड के मशहूर और पसंदीदा आइसक्रीम ब्रांड Hawell's के फाउंडर सिरिपोंग अक्काराश्रीयुक (Siripong Akkarasriyuk) ने अपनी पूरी कंपनी बेचने का ऐलान कर दिया है. इस कंपनी को बेचकर वह आध्यात्म का रास्ता चुनने जा रहे हैं.

सिरिपोंग अपने इस कारोबार को करीब 165 मिलियन थाई बाथ (करीब 47 करोड़ रुपये) में बेच रहे हैं. दिलचस्प यह है कि इतनी बड़ी कंपनी को बेचने के पीछे उनका मकसद बिजनेस से रिटायर होना नहीं, बल्कि वह सांसारिक जीवन को पूरी तरह छोड़कर बौद्ध भिक्षु यानी साधु बनने जा रहे हैं. सिरिपोंग ने अपनी आइसक्रीम कंपनी की बिक्री करने का औपचारिक ऐलान 21 अगस्त को एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से किया था. इस घोषणा में उन्होंने एक शानदार ऑफर लोगों के सामने रखा है.

47 करोड़ रुपये में क्या-क्या मिलेगा?

सिरिपोंग ने कहा कि वह शख्स जो उनके लिए ऐसा खरीदार ढूंढ़कर लाएगा, जो तय कीमत पर कंपनी खरीदने के लिए तैयार हो...ऐसे व्यक्ति को 5 मिलियन थाई बाथ (करीब 1.25 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम कमीशन दिया जाएगा. बैंकाक पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार इस 47 करोड़ रुपये की डील में 2.77 एकड़ जमीन, एक पूरी तरह से तैयार ऑफिस और मॉर्डन मशीनों वाली फैक्ट्री शामिल है. खरीदार को Hawell's का चालू आउटलेट, ब्रांड ट्रेडमार्क, सीक्रेट रेसिपीज और पूरा बिजनेस मॉडल भी सौंपा जाएगा.

1999 में शुरू हुआ था आइसक्रीम का सफर

Hawell's आइसक्रीम ब्रांड की शुरुआत 1999 में हुई थी. शुरुआत के कुछ दिन बाद ही यह अपनी क्वालिटी के दम पर थाईलैंड के बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल में जाना-पहचाना नाम बन गया. ब्रांड का पहला आउटलेट दिसंबर 1999 में सेंट्रल पिंकलाओ मॉल में खोला गया था और धीरे-धीरे यह यूथ के बीच काफी लोकप्रिय हो गया. महज तीन साल के अंदर इस कंपनी ने थाईलैंड में 22 से ज्यादा ब्रांच ओपन कर लीं.

कहां से हुई थी कारोबार की शुरुआत?

सिरिपोंग को बचपन से आइसक्रीम खाना बहुत पसंद था. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भी एक छोटे आइसक्रीम विक्रेता के रूप में की थी. धीरे-धीरे वह अपनी मेहनत और ईमानदारी के दम पर थाईलैंड के टीवी शो में सफल कारोबारी के रूप में पहचाने जाने लगे. Hawell's ने किफायती दाम पर बेहतरीन स्वाद वाली आइसक्रीम देने के लिए Y2K के दौर में अपनी एक अलग साख बनाई.

बाजार में बढ़ता कॉम्पटीशन और मॉल्स की चुनौती

समय बदलने के साथ-साथ थाईलैंड के आइसक्रीम मार्केट में मुकाबला मुश्किल होता गया. बाजार की बड़ी कंपनियों ने शॉपिंग मॉल्स के साथ एक्सक्लूसिव डील करना शुरू कर दिया. इन समझौतों के तहत मॉल्स में किसी दूसरे आइसक्रीम ब्रांड को आउटलेट खोलने की मंजूरी नहीं दी जाती थी. इस मुकाबले में Hawell's के आउटलेट्स धीरे-धीरे बंद होने लगे. 2014 में कंपनी का वो आउटलेट भी बंद हो गया जहां से इसकी शुरुआत की गई थी. इसके बाद सिरिपोंग ने कई साल तक ब्रांड को दोबारा खड़ा करने की कोशिश की. लेकिन मॉल कल्चर से उन्हें हर बार निराशा ही हाथ लगी.

रुकावटों के बाद नए सिरे से शुरुआत

सिरिपोंग ने बताया कि उन्होंने पिछले दो साल में शॉपिंग मॉल्स में नई दुकान खोलने को लेकर कई बार बातचीत की. मॉल्स में जगह होने के बावजूद भी उनसे हमेशा यही कहा गया कि Hawell's के लिए जगह खाली नहीं है. इसके बाद उन्होंने फ्रेंचाइजी मॉडल पर विचार किया. लेकिन उन्हें यह डर बना रहा कि तेजी से विस्तार करने से आइसक्रीम की क्वालिटी गिर सकती है और ब्रांड का नाम खराब हो सकता है. बाद में 2023 में Hawell's ने नोंथाबुरी के बांग हुआ थोंग में अपना अलग standalone आउटलेट खोला. फिलहाल यही आउटलेट है चल रहा है.

15 साल पुराना सपना और संन्यास लेने का इरादा

बिजनेस में आई चुनौतियों और मुश्किलों के बावजूद सिरिपोंग ने कहा कि कंपनी बेचने का कारण कारोबार से जुड़ी दिक्कतें नहीं हैं. इस सबके पीछे उनका मकसद अपने जीवन के आध्यात्मिक पहलू को पूरा करना है. सिरिपोंग पिछले 15 साल की सांसारिक मोह-माया छोड़कर बौद्ध भिक्षु बनने की राह पर जा रहे हैं. उन्होंने कहा, उनके और परिवार के पास सांसारिक जीवन में महज दो साल का समय बचा है. वह सालों से बौद्ध धर्म के प्रति समर्पित रहे हैं. वह 2016 में 'सक्सेस डिराइव्ड फ्रॉम द बुद्ध' नामक किताब लिख चुके हैं और धार्मिक सम्मेलनों के दौरान भाषण भी देते रहे हैं.

जंगल में आश्रम और मोक्ष की तरफ कदम

सिरिपोंग का प्लान अगले दो साल के दौरान जमीन खरीदकर जंगल में शांत आश्रम या रिट्रीट स्थापित करने का है. वहां रहकर वह गहन ध्यान साधना करेंगे और खुद को पूरी तरह से संन्यास के लिए तैयार करेंगे. उनका आखिरी लक्ष्य इस सांसारिक जीवन से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करना है. सिरिपोंग खुद भले ही अपने आइसक्रीम बिजनेस को अलविदा कह रहे हैं, लेकिन उनकी इच्छा यही है कि जो भी नया खरीदार हो, वह Hawell's ब्रांड को आगे ले जाएं और एक दिन पूरी दुनिया में इसका नाम रोशन करें.

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About the Author

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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