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Expert View: क्या AI बदल देगा शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग का पूरा खेल?

Analyst Era से Agentic Era तक फाइनेंशियल मार्केट कैसे बदल रहा है और 2030 तक निवेशकों के लिए क्या बदल सकता है. इसे मार्केट एक्सपर्ट मनोज कुमार जैन ने अच्छे से समझाया है.

Written By Gaurav Singh
Published: Oct 22, 2026, 04:54 PM IST | Updated: Oct 22, 2026, 06:45 PM IST
Image Credit: रिटेल निवेशकों के लिए AI का सबसे बड़ा फायदा रिसर्च को आसान और व्यवस्थित बनाना हो सकता है. (प्रतीकात्मक/AI)
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मार्केट एक्सपर्ट मनोज कुमार जैन

बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, डेटा प्रोसेसिंग और खेती जैसे कई क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ तकनीक की दुनिया तक सीमित नहीं है. फाइनेंशियल मार्केट में भी AI की भूमिका लगातार बदल रही है. पहले इसका इस्तेमाल रिपोर्ट पढ़ने, आंकड़ों का विश्लेषण करने और रिसर्च में मदद लेने तक सीमित था, लेकिन अब AI ऐसे सिस्टम की ओर बढ़ रहा है जो इंसानों की निगरानी में कई काम खुद कर सकते हैं.

मार्केट एक्सपर्ट मनोज कुमार जैन के मुताबिक, फाइनेंशियल मार्केट में AI की अहमियत तेजी से बढ़ रही है. इसकी वजह है बड़ी मात्रा में डेटा को तेजी से सर्च करने, ट्रेंड पहचानने, रिपोर्ट का विश्लेषण करने और निवेश से जुड़े संकेत समझने की क्षमता. Kwala Intel जैसे AI आधारित प्लेटफॉर्म भी इसी बदलाव का हिस्सा हैं, जो आम निवेशकों को बातचीत के जरिए, अपनी पसंद की भाषा में शेयरों की रिसर्च, कंपनियों के फंडामेंटल और ग्रोथ को समझने, टेक्निकल एनालिसिस करने और शेयरों की तुलना करने में मदद करते हैं. इससे निवेशकों के लिए मार्केट रिसर्च को समझना आसान हो सकता है.

AI ने कैसे बदली फाइनेंशियल मार्केट की दुनिया?

एक समय था, जब बड़े डेटा को प्रोसेस करने और उससे जरूरी नतीजे निकालने के लिए Excel जैसे टूल का इस्तेमाल किया जाता था. पहले से तय फॉर्मूले की मदद से कुछ ही सेकंड में बड़े डेटा सेट का विश्लेषण करना संभव हुआ. इससे फाइनेंशियल मार्केट में काम करने का तरीका बदला.


लेकिन जैसे-जैसे बाजार में डेटा की मात्रा बढ़ी और फैसले लेने की रफ्तार तेज हुई, वैसे-वैसे ज्यादा सक्षम टूल की जरूरत महसूस होने लगी. AI इसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अलग-अलग एल्गोरिदम की मदद से AI कम समय में बड़ी मात्रा में डेटा प्रोसेस कर सकता है, पैटर्न पहचान सकता है और रिसर्च को आसान बना सकता है.

मनोज कुमार जैन AI के विकास को फाइनेंशियल मार्केट के तीन चरणों में देखते हैं- एनालिस्ट एरा, एजेंटिक एरा और ऑटोनॉमस फ्यूचर.

1. Analyst Era (2020-2024): जब AI बना रिसर्च असिस्टेंट

AI के शुरुआती दौर में इसका मुख्य काम रिपोर्ट पढ़ना, फाइनेंशियल रेशियो की गणना करना, कंपनियों की अर्निंग कॉल का सार तैयार करना और धोखाधड़ी के संभावित संकेतों को पहचानना था. यानी AI का इस्तेमाल एक ऐसे असिस्टेंट के तौर पर किया जा रहा था, जो इंसानों को बेहतर वित्तीय फैसले लेने के लिए जरूरी जानकारी जुटाने में मदद करे.


IBM की Global Banking Outlook रिपोर्ट के हवाले से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में 8% बैंकिंग संस्थान Generative AI का इस्तेमाल रणनीतिक स्तर पर कर रहे थे. 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 78% हो गया.

इस दौर में AI ने तीन प्रमुख क्षेत्रों में अपनी भूमिका मजबूत की:

रिस्क और कंप्लायंस: बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज में नियमों और नियामकीय जरूरतों से जुड़े काम बढ़ने के साथ AI ने रिपोर्ट तैयार करने, रिस्क डेटाबेस की जानकारी का मिलान करने और संभावित कंप्लायंस समस्याओं को पहचानने में मदद की.

पर्सनलाइज्ड फाइनेंशियल सर्विसेज: AI की मदद से ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से बजट बनाने, छोटे स्तर पर निवेश की योजना तैयार करने और क्रेडिट से जुड़ी जरूरतों को समझने में मदद मिल सकती है. इससे रिटेल निवेशकों के लिए वित्तीय सेवाओं को अधिक व्यक्तिगत बनाना संभव होता है.

फ्रॉड और सिक्योरिटी: AI आधारित सिस्टम संभावित धोखाधड़ी के पैटर्न पहचानने, नए खतरों से जुड़े डेटा का विश्लेषण करने और समय पर अलर्ट देने में मदद कर सकते हैं. इससे वित्तीय संस्थानों को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में सहायता मिलती है.

2. Agentic Era (2026): अब सिर्फ AI टूल नहीं, डिजिटल को-वर्कर

मनोज कुमार जैन के मुताबिक, 2026 में AI के इस्तेमाल में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब बात सिर्फ AI टूल तक सीमित नहीं है. बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियां Agentic AI की ओर बढ़ रही हैं. ऐसे सिस्टम को डिजिटल को-वर्कर की तरह देखा जा रहा है, जो तय निर्देशों और अधिकारों के दायरे में कई चरणों वाले काम खुद पूरा कर सकते हैं.

इस बदलाव को समझने के लिए कुछ वैश्विक उदाहरण अहम हैं:

Goldman Sachs: कंपनी Anthropic के Claude के साथ ऑटोनॉमस एजेंट विकसित करने पर काम कर रही है, जिनका इस्तेमाल ट्रेड अकाउंटिंग और क्लाइंट ऑनबोर्डिंग जैसे कामों में किया जा सकता है.

Lloyds Banking Group: बैंकिंग ग्रुप अपने कारोबार में Agentic AI को लागू करने की दिशा में काम कर रहा है. इसका लक्ष्य 2026 में फ्रॉड जांच जैसे कामों को ऑटोमेट करके £100 मिलियन का मूल्य हासिल करना है.

HSBC: बैंक के इन्वेस्टमेंट बैंक के CEO के मुताबिक, क्वांटम कंप्यूटिंग और डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी के साथ AI एजेंट अगले 2-4 साल में फाइनेंशियल मार्केट में इंसानों की ट्रेडिंग भूमिका की जगह ले सकते हैं.

Deloitte: इसकी 2026 FSI Predictions रिपोर्ट AI को मुनाफा बढ़ाने वाले इंजन के रूप में देखती है. रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, AI आधारित बैंकिंग प्रोडक्ट्स 2030 तक बड़े बैंकों के लिए 75 अरब डॉलर का अतिरिक्त रेवेन्यू पैदा कर सकते हैं.

फाइनेंशियल मार्केट और वेल्थ मैनेजमेंट में इसका मतलब है कि AI हजारों रिपोर्ट पढ़ने, बाजार के सेंटिमेंट का विश्लेषण करने और निवेश से जुड़े संभावित संकेत सामने लाने में मदद कर सकता है. इसके बाद मानव सलाहकार इन जानकारियों को समझकर निवेशकों के लिए उपयुक्त रणनीति तैयार कर सकते हैं.

हालांकि, AI से तैयार विश्लेषण को अपने आप में सही निवेश फैसले की गारंटी नहीं माना जा सकता. बाजार में जोखिम, डेटा की गुणवत्ता और बदलती आर्थिक परिस्थितियां अब भी अहम रहेंगी.

ये भी पढ़ें : AI करेगा शेयर बाजार का काम आसान? मिनटों में डेटा एनालिसिस से निवेशकों को कितना होगा फायदा?

 

3. Autonomous Future (2027-2030): आगे क्या बदलेगा?


आने वाले वर्षों में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि वित्तीय संस्थान AI अपनाते हैं या नहीं. असली चुनौती यह होगी कि वे AI को कितनी जिम्मेदारी, पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी के साथ इस्तेमाल करते हैं.

मनोज कुमार जैन के अनुसार, फाइनेंशियल मार्केट में AI के अगले चरण को चार बड़े बदलावों से समझा जा सकता है.

1. Composable Finance: बैंकिंग सेवाएं होंगी ज्यादा तेज

भविष्य में AI, APIs और इंस्टेंट सेटलमेंट का मेल बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज को बदल सकता है. क्रेडिट से जुड़े फैसले, फ्रॉड की पहचान और ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक सेवाएं देने जैसे काम सीधे डिजिटल सिस्टम में शामिल किए जा सकेंगे. इससे लेनदेन की प्रक्रिया तेज करने, जोखिम घटाने और संभावित धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिल सकती है.

2. Democratised Intelligence: आम निवेशकों तक पहुंचेगी एडवांस रिसर्च

आज एडवांस पोर्टफोलियो एनालिसिस और कई तरह के निवेश सिमुलेशन के लिए संसाधनों और विशेषज्ञता की जरूरत होती है. भविष्य में क्वांटम-इंस्पायर्ड एल्गोरिदम की मदद से लाखों संभावित पोर्टफोलियो परिस्थितियों का आकलन करना आसान हो सकता है.

इस तरह के टूल धीरे-धीरे रिटेल निवेशकों तक भी पहुंच सकते हैं. भारत में फाइनेंशियल सर्विस प्रोवाइडर AI आधारित रिसर्च और एनालिसिस को ज्यादा लोगों के लिए उपलब्ध करा सकते हैं.

हालांकि, बेहतर तकनीक या एडवांस एनालिसिस से बेहतर रिटर्न की गारंटी नहीं मिलती. निवेश का प्रदर्शन बाजार की परिस्थितियों और जोखिम पर भी निर्भर करेगा.

3. Human + AI Hybrid: इंसान और मशीन मिलकर करेंगे काम

AI के बढ़ते इस्तेमाल का मतलब यह जरूरी नहीं कि फाइनेंशियल प्रोफेशनल्स की भूमिका पूरी तरह खत्म हो जाएगी. इसके बजाय, बार-बार किए जाने वाले काम AI संभाल सकता है, जबकि इंसान रणनीति बनाने, जटिल परिस्थितियों को समझने और निवेश से जुड़े फैसलों पर ध्यान दे सकते हैं.

इस मॉडल में AI डेटा और रिसर्च उपलब्ध कराएगा, जबकि मानव विशेषज्ञ संदर्भ, अनुभव और जोखिम को ध्यान में रखकर निर्णय लेने में मदद करेंगे. इससे कम समय में ज्यादा ग्राहकों तक सेवाएं पहुंचाने की संभावना बढ़ सकती है.

4. New Risks, New Governance: AI पर निगरानी जरूरी

AI के इस्तेमाल के साथ कुछ नई चुनौतियां भी सामने आएंगी. कई AI मॉडल के काम करने का तरीका पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता, जिसे 'ब्लैक बॉक्स' समस्या कहा जाता है. ऐसे में यह समझना जरूरी होगा कि किसी सिस्टम ने कोई निष्कर्ष क्यों निकाला और उसके फैसले की जांच कैसे की जा सकती है.

जब AI को ट्रेडिंग या दूसरे महत्वपूर्ण वित्तीय कामों में ज्यादा अधिकार मिलेंगे, तब पारदर्शिता, ऑडिट और बाजार की स्थिरता से जुड़े सवाल भी अहम होंगे. नियामकों और सरकारों के सामने चुनौती होगी कि तकनीक के फायदे मिलें, लेकिन उसके जोखिमों को भी प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके.

ये भी पढ़ें : क्या AI के दम पर कमोडिटी मार्केट से होगी मोटी कमाई? जानिए कैसे बदल रहा है निवेश का ट्रेंड

निवेशकों के लिए AI का क्या मतलब है?


रिटेल निवेशकों के लिए AI का सबसे बड़ा फायदा रिसर्च को आसान और व्यवस्थित बनाना हो सकता है. कंपनियों की रिपोर्ट समझने, अलग-अलग शेयरों की तुलना करने, बाजार के ट्रेंड को देखने और निवेश से जुड़े सवालों के जवाब खोजने में AI मदद कर सकता है.

Kwala Intel जैसे प्लेटफॉर्म भी बातचीत के अंदाज में और कई भाषाओं में मार्केट रिसर्च को आम निवेशकों के करीब लाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे प्लेटफॉर्म का उद्देश्य निवेशकों को जानकारी समझने और रिसर्च करने में मदद देना है.

मनोज कुमार जैन की व्यू: भविष्य इंसान बनाम मशीन का नहीं

मनोज कुमार जैन का मानना है कि फाइनेंशियल मार्केट में सफल होने वाले निवेशक AI को सिर्फ एक टेक्नोलॉजी टूल के तौर पर नहीं, बल्कि एक रणनीतिक सहयोगी के रूप में देखेंगे.

आने वाले समय में मुकाबला इंसान और मशीन के बीच नहीं होगा, बल्कि उन लोगों के बीच होगा जो AI की मदद से तेजी से जानकारी जुटा सकेंगे, बेहतर सवाल पूछ सकेंगे और तथ्यों के आधार पर फैसले ले सकेंगे.

AI रिसर्च को तेज, वित्तीय सेवाओं को अधिक सुलभ और निवेश की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है. लेकिन अंतिम लक्ष्य तकनीक पर आंख बंद करके भरोसा करना नहीं, बल्कि इंसानी समझ और AI की क्षमता का सही इस्तेमाल करना होना चाहिए.

अगर आप भी स्टॉक मार्केट में निवेश करते हैं और AI की मदद से अपनी रिसर्च को आसान बनाना चाहते हैं, तो Kwala Intel को आजमा सकते हैं. इसके जरिए स्टॉक मार्केट से जुड़े सवाल पूछें, जवाबों को समझें और जरूरत के मुताबिक आगे की रिसर्च करें.

(मनोज कुमार जैन, पृथ्वी फिनमार्ट (Prithvi Finmart) के डायरेक्टर हैं.)

डिस्क्लेमर: यह लेख पृथ्वी फिनमार्ट के डायरेक्टर और मार्केट एक्सपर्ट मनोज कुमार जैन के विचारों पर आधारित है. AI आधारित टूल्स से मिली जानकारी निवेश में मुनाफे की गारंटी या व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं है. निवेश से पहले अपनी रिसर्च करें और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें.

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About the Author

जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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