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भारत पर रूस से तेल नहीं लेने का दबाव बना रहा अमेरिका? सप्लाई में गिरावट पर सरकार का जवाब जानिए

रूस से तेल आयात में गिरावट आने पर जब पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी से पूछा गया कि क्या किसी तरह का अमेरिकी दबाव है? तब उन्होंने बेहद साफ शब्दों में बताया कि भारतीय रिफाइनरियां अपने फायदे को देखकर और मार्केट प्राइस को ध्यान में रखकर फैसला करती हैं.

भारत पर रूस से तेल नहीं लेने का दबाव बना रहा अमेरिका? सप्लाई में गिरावट पर सरकार का जवाब जानिए
Image Credit: (X) चीन की तरफ से रूसी तेल की भारी डिमांड बनी हुई है और मार्केट में कॉम्पटीशन बढ़ गया है.

दुनियाभर में पिछले छह महीने से भी ज्यादा समय से चल रही जियो-पॉलिटिकल टेंशन और यूएस बैन हटने के बाद केंद्रीय पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Puri) ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ किया कि अमेरिका की तरफ से भारत पर रूस से तेल खरीद को कम किये जाने का किसी तरह का दबाव नहीं है. भारतीय रिफाइनरियां केवल मार्केट डिस्काउंट को ध्यान में रखकर फैसला लेती हैं. उन्होंने यह जवाब उस सवाल के जवाब में कहा, जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ने भारत पर रूस से दूरी बनाने का दबाव डाला है? इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ. भारत अपने फैसले अपनी जरूरत के हिसाब से लेता है.

हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि जंग से पहले भारत के टोटल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी महज 0.2 फीसदी थी. यूक्रेन से जंग शुरू होने के बाद रूस ने भारतीय रिफाइनरियों को भारी डिस्काउंट पर तेल ऑफर किया. रूस के इस कदम से भारत की लागत काफी कम हो गई. अब हालात यह है कि मिडिल ईस्ट के दूसरे सप्लायर भी बंपर डिस्काउंट ऑफर कर रहे हैं. भारत को जहां से भ्ज्ञी सस्ता और बेहतर तेल मिलेगा, वहीं से खरीदारी की जाएगी.

मिडिल ईस्ट से क्रूड का आयात फिर से बढ़ा

सितंबर के डेटा से सामने आया कि भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने रूस की जगह मिडिल ईस्ट से क्रूड ऑयल का आयात फिर से बढ़ा दिया है. चीन की तरफ से रूसी तेल की भारी डिमांड बनी हुई है और मार्केट में कॉम्पटीशन बढ़ गया है. ऐसे में भारत फिर से खाड़ी देशों का रुख कर रहा है. खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई आसानी से और सही दाम में मिल रही है.

दुनिया के बड़े क्रूड ऑयल आयातकों में भारत

पेट्रोलियम मिनिस्टर ने साफ शब्दों में कहा कि कोई कुछ भी कहे या करे, आखिर में हर देशा और उसकी कंपनियों का फैसला अपने फायदे पर आधारित ही होता है. भारत दुनिया के सबसे बड़े क्रूड ऑयल आयातकों में से एक है. इसलिए अपनी एनर्जी से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत अलग-अलग देशों से क्रूड ऑयल के ऑप्शन तलाश रहा है. इसमें किसी विदेशी सरकार का कोई दबाव नहीं है.

पेट्रोलियम प्रोडक्ट का बड़ा निर्यातक

कच्चे तेल की खरीदारी के साथ-साथ भारत अपनी रिफाइनिंग कैपेसिटी को भी तेजी से बढ़ा रहा है. हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि घरेलू डिमांड को पूरा करने के साथ-साथ भारत अपने एक्सपोर्ट कमिटमेंट्स को पूरा करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत कर रहा है. भारत केवल तेल का आयात ही नहीं करता, बल्कि रिफाइन पेट्रोलियम प्रोडक्ट का बड़ा निर्यातक भी है.

रूसी तेल से दूरी बना रही कंपनियां

आपको बता दें देश की सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने रूस से क्रूड ऑयल की खरीद को घटा दिया है. नवंबर 2026 में रूसी तेल की खरीद कम होने की उम्मीद है. दरअसल, रूसी तेल पर मिलने वाला डिस्काउंट खत्म होने के साथ ही शिपिंग कॉस्ट भी बढ़ रही है. इस कारण देश की तेल कंपनियां रूसी तेल से दूरी बना रही हैं. सितंबर में भारत ने मिडिल ईस्ट से हर दिन 28 लाख बैरल तेल का रोजाना आयात किया. रूस से यही आयात घटकर 18 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया.

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About the Author

Kriyanshu Saraswat

Kriyanshu Saraswat

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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