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GST Council Meeting: GST रिफंड में नहीं होगी देरी! 10 दिन में होगा काम, छोटे कारोबारियों को मिलने वाली है बड़ी राहत

GST Rules: जीएसटी काउंसिल की 57वीं मीटिंग के दौरान टैक्स दरों में बदलाव की संभावना कम है. हालांकि, रिफंड प्रोसेस को तेज करने, गिरफ्तारी के नियमों को आसान बनाने और छोटे कारोबारियों को राहत देने जैसे कुछ सुधारों को लेकर फैसला लिया जा सकता है.

Written By Kriyanshu Saraswat
Published: Oct 08, 2026, 01:36 PM IST | Updated: Oct 08, 2026, 01:38 PM IST
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GST Council Meeting: नई दिल्ली के भारत मंडपम में आज 57वीं GST काउंसिल की मीटिंग शुरू हो गई है. इसके दौरान आम जनता से लेकर कारोबारियों तक की नजरें टैक्स दर में बदलाव पर टिकी हुई हैं. हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि इस बार जीएसटी की दर में किसी तरह का बड़ा बदलाव होने की उम्मीद कम ही है. जीएसटी काउंसिल का पूरा फोकस नियमों को आसान बनाने, रिफंड प्रोसेस को तेज करने, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सिक्योरिटी और गिरफ्तारी के कड़े प्रावधान में राहत देने पर फोकस्ड रहेगा. आइए जानते हैं जीएसटी काउंसिल की मीटिंग से जुड़ी बड़ी उम्मीदों के बारे में-

टैक्स दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं

57वीं GST काउंसिल की मीटिंग के दौरान वस्तुओं या सर्विस की दर में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है. केवल कुछ मामलों में स्पष्टीकरण और दरों को के रेशनलाइजेशन (Rationalisation) पर चर्चा होने की उम्मीद है. इसके अलावा साल में एक बार 1 अप्रैल से जीएसटी दर में बदलाव को करने का प्रस्ताव है. इससे कारोबारियों को टैक्स सिस्टम में ज्यादा स्थिरता मिल सकेगी.

फोस्ट रिफंड और ऑटोमेटिक प्रोसेस

अभी जीएसटी रिफंड क्लेम प्रोसेस होने में कम से कम 25 दिन का समय लगता है. नए प्रपोजल के तहत आवेदनों को 10 दिन के अंदर स्वीकार किया जाएगा और रिस्क चेक (Risk Check) के बाद 90% रिफंड तुरंत जारी किया जाएगा. कस्टम और बैंकिंग सिस्टम से रिफंड डेटा ऑटोमेटिक ट्रांसफर होगा. इससे कारोबारियों को अलग से डॉक्यूमेंट जमा नहीं करने पड़ेंगे. इसका दायरा सर्विस, प्लांट और मशीनरी तक बढ़ाया जा सकता है.

इनपुट टैक्स क्रेडिट प्रोटेक्शन

जीएसटी काउंसिल की मीटिंग के दौरान ईमानदार खरीदारों को बड़ी राहत देने का भी प्रपोजल है. यदि किसी खरीदार के पास वैलिड बिल है और उसने सामान प्राप्त कर लिया है और टैक्स समेत पूरा भुगतान भी कर दिया है. ऐसे सप्लायर की तरफ से टैक्स डिफॉल्ट करने पर भी खरीदार का इनपुट टैक्स क्रेडिट रद्द नहीं किया जाएगा. इसके अलावा बिजनेस में होने वाले कुछ एक्स्ट्रा खर्चों को भी ITC के दायरे में लाने की तैयारी है.

गिरफ्तारी के नियमों में मिलेगी राहत?

जीएसटी नियमों के तहत दंडात्मक नियमों को आसान बनाने का प्रपोजल रखा गया है. इसके तहत गिरफ्तारी के प्रावधानों को हटाकर सिविल पेनाल्टी, ब्याज और टैक्स वसूली पर जोर दिया जाएगा. बेहद गंभीर और सुनियोजित तरीके से किये गए फ्रॉड के मामलों में ही आपराधिक कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा प्रोसीक्यूशन (Prosecution) की लिमिट को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर सीधे 5 करोड़ रुपये किया जा सकता है.

छोटे कारोबारियों को मिल सकती है बड़ी राहत

देर से रिटर्न फाइल करने पर लगने वाली लेट फीस (Late Fee) को माफ करने और नॉर्मल पेनल्टी को घटाने का भी प्लान है. पात्र आवेदकों के लिए नया जीएसटी रजिस्ट्रेशन हासिल करना पहले के मुकाबले ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा. जीएसटी के मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर के टैक्स बेस में 25.8% की बढ़ोतरी देखी गई.

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About the Author

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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