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GST Arrest Power: GST काउंसिल की 8 अक्टूबर को होने वाली बैठक में बड़ा फैसला लिया जा सकता है. केंद्र सरकार, GST 2.0 एजेंडा को आगे बढ़ रही है. सरकार का मकसद नियमों को आसान, कानूनी विवाद कम करना और टैक्स लागू करने के तरीकों को ज्यादा संतुलित बनाना है.
GST काउंसिल की बैठक में सेक्शन 69 में मिलने वाले 'गिरफ्तारी के अधिकारों' को खत्म करने और केस फाइल करने की लिमिट को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव चल रहा है. सरकार कम्प्लायंस और विवादों को कम करने के साथ-साथ टेक्नोलॉजी और डेटा बेस्ड एनफोर्समेंट पर ज्यादा निर्भर रहने की कोशिश कर रही है.
GST गिरफ्तारी की पावर कम हो सकती हैं. सरकार मुकदमा चलाने की सीमा 5 करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है. इस प्रस्तावित बदलाव में टैक्स अधिकारियों से ये पावर छीने जा सकते हैं. ऐसा भी हो सकता है कि किसी भी गिरफ्तारी के लिए न्यायिक मंजूरी की आवश्यकता पड़े. सरकार का ये कदम यह सुनिश्चित करेगा कि आपराधिक कार्यवाही मुख्य रूप से गंभीर मामलों के लिए आरक्षित हो जिनमें बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी या धोखाधड़ी शामिल हो.
इन प्रस्तावों का मकसद कानूनी कार्रवाई (प्रॉसिक्यूशन) के दायरे को कम करना भी है, जिससे क्लासिफिकेशन, वैल्यूएशन या इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े आम विवादों को सिर्फ इसलिए आपराधिक अपराध न माना जाए क्योंकि टैक्सपेयर और टैक्स अधिकारियों की राय अलग-अलग है.
हालांकि, सरकार टैक्स वसूलने, ब्याज लगाने और आर्थिक जुर्माना लगाने के पावर को बनाए रखेगी. इसमें जानबूझकर टैक्स चोरी या धोखाधड़ी से जुड़े गंभीर मामलों में अदालतों के जरिए कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है.
जब GST लागू किया गया था, तो 'गिरफ्तारी के अधिकारों' को फर्जी इनवॉइसिंग, धोखाधड़ी वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट और टैक्स चोरी को रोकने के लिए एक अहम उपाय के तौर पर बताया गया था. GST के शुरुआती सालों में टैक्स की इनवॉइस का मिलान करने और धोखाधड़ी वाले लेन-देन की पहचान करने की क्षमता काफी सीमित थी. तब से अब तक GST सिस्टम में काफी सुधार हुआ है. इनवॉइस-लेवल की जानकारी, इनपुट टैक्स क्रेडिट रिकॉर्ड और रिटर्न डेटा से टैक्स अधिकारियों को लेन-देन के बारे में बेहतर जानकारी मिल रही है.
ऐसे में सरकार का मानना है कि टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिटिक्स के जरिए धोखाधड़ी वाले क्रेडिट और टैक्स चोरी का पता ज्यादा आसानी से लगाया जा सकता है और इसके लिए गिरफ्तारी को मुख्य उपाय के तौर पर इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है. कारोबारियों या व्यापारियों के लिए इन प्रस्तावित बदलावों से टैक्स विवाद के आपराधिक मामले में बदलने का जोखिम कम हो सकता है.
ये नए नियम सरकार के 'नेक्स्ट-जेनरेशन GST रिफॉर्म एजेंडा' का हिस्सा हैं. GST सिस्टम में टैक्स अधिकारियों को मिली 'गिरफ्तारी की शक्ति' को लेकर लंबे समय से कारोबारियों के बीच बहस चल रही है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र और राज्यों सरकारों के बीच पिछले 8-9 महीनों में कई बैठकें हुई हैं. इन मीटिंग में केंद्र सरकार के टॉप लेवल के अधिकारी भी शामिल थे. इस मीटिंग का मकसद GST के तहत गिरफ्तारी के प्रावधानों को हटाने पर आम सहमति बनाना था.
GST को जुलाई 2017 में लागू किया गया था. इसके बाद धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं. सभी मामलों में धोखाधड़ी का तरीका मोटे तौर पर एक जैसा ही था. इन मामलों में इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने के लिए नकली पहचान या 'म्यूल अकाउंट्स' (दूसरे के नाम पर खोले गए खाते) का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी वाले GST ट्रांजैक्शन किए जाते हैं.
सप्लायर, कच्चे माल की खरीद कम दरों पर दिखाते हैं या फिर वे केंद्र और राज्य सरकारों को GST का सही भुगतान किए बिना ही टैक्स लगने वाले सामान और सर्विस सप्लाई करते हैं. इसके साथ ही वे अपने तैयार माल की कीमत कम दिखाते हैं. ऐसा करके वे फर्जी बिलिंग बनाते हैं.
GST कानून में गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल मुख्य रूप से गंभीर अपराधों में किया जाता है. कई मामलों में जांच एजेंसियां ऐसे नेटवर्क तक पहुंचती हैं जहां कई फर्जी कंपनियों या फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये के फर्जी इनवॉइस बनाए गए होते हैं. गिरफ्तारी का उद्देश्य सिर्फ टैक्स की वसूली नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की जांच करना और सबूत जुटाना भी होता है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021-22 से 2024-25 के बीच GST से जुड़े अपराधों के 72,393 मामलों में सेंट्रल GST विभागों ने 887 गिरफ्तारियां कीं. राज्य के अधिकारियों द्वारा की गई गिरफ्तारियां इस संख्या के अलावा होंगी.

कस्टम्स एंड GST के पूर्व प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर नवनीत गोयल ने इस मुद्दे पर विस्तार से बात की. गिरफ्तारी के मामले में उन्होंने कहा कि इन मामलों में बहुत ज्यादा गिरफ्तारियां नहीं होती हैं. कोई आंकड़ा देना सही नहीं होगा. साल भर में 25 से ज्यादा गिरफ्तारियां नहीं होती हैं. लेकिन, फर्जी बिलिंग और गलत ITC क्लेम के मामले आए हैं. नवनीत गोयल के मुताबिक, फर्जी बिलिंग और गलत ITC क्लेम के हजारों करोड़ के मामले आते हैं. ये बहुत बड़ी समस्या है.
कस्टम्स एंड GST के पूर्व प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर नवनीत गोयल ने ये भी कहा कि गिरफ्तारी बहुत ही कम केस में होती है. इसके लिए प्रॉपर इंस्ट्रक्शन रहते हैं. 5 करोड़ से ऊपर का केस होना चाहिए. अगर कोई रिपीट ऑफेंडर है तो ही लिमिट कम होती है. तब गिरफ्तारी होती है. फर्जी बिलिंग और गलत ITC क्लेम करने वालों और सिस्टम की बात नहीं मानता हो या उसके भागने का डर हो और वो अधिकारियों के साथ बातचीत में सहयोग नहीं करता है तो ही गिरफ्तारी होती है, अन्यथा ज्यादातर मामलों में नहीं होती है. इसमें फ्रॉड करने वालों पर ही कोई एक्शन लिया जाता है.
उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के पावर कम होने से टैक्स घोटालों के केस में बहुत फर्क पड़ेगा. आज के दौर में लोग पुलिस से डरते हैं. लेकिन, GST अधिकारियों के सामने वो अपना जुर्म कबूलने में कतराएंगे. इससे घोटालों वाले केस में बहुत असर पड़ेगा.
नवनीत गोयल ने कहा कि मेरे ख्याल से जो मेरा पर्सनल व्यू है, वो ये है कि अरेस्ट की पावर बिल्कुल खत्म ना कि जाए, लेकिन लिमिट बढ़ा दी जाए. जो लिमिट अभी पांच करोड़ है. उसे पांच करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ कर देना चाहिए. इससे आम कारोबारी इस गिरफ्तारी के सिस्टम से बाहर आ जायेगा और जो बड़े केस हैं उनको अच्छे चेक किया जाएगा. इससे ये भी होगा कि अरेस्ट भी होगा, अरेस्ट की पावर रह भी जाएगी. जिसका इस्तेमाल मिनिमल केस में होगा.