Gold-Silver Price Crash: दिसंबर 2025 से लेकर जनवरी 2026 के बीच जब सोना रॉकेट बना हुआ था, किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि आने वाले महीनों में उसकी हालत ऐसी हो जाएगी. जो सोना संकट के वक्त सबसे बड़ा सहारा बनता है, जिसे निवेशक सेफ हेवन का खिताब देते हैं, उस सोने ने इस साल अलग ही रंग दिखाया है. सोने से भी बुरा हाल चांदी का है.
दिवाली-धनतेरस में सबसे ज्यादा चर्चा सोने-चांदी की होती है, लेकिन इस बार सोने-चांदी की कीमत हॉट टॉपिक हना हुआ है. 4 लाख रुपये के करीब चमकने वाली चांदी 9 महीनों में आधी हो गई. 1.80 लाख रुपये के पास पहुंचा था, आज वो सोना 1.40 लाख रुपये के पास पहुंच गया है.
अगर 29 जनवरी से लेकर अब तक सोने-चांदी की कीमत की तुलना करें, तो चांदी करीब 48% और सोना 19% से अधिक सस्ता हो चुका है. सोने-चांदी की गिरावट का चार्ट देखें, तो...
यानी चांदी की कीमत में अक्टूबर 2025 से लेकर जनवरी 2026 के बीच 166.49% का उछाल आया.
28 फरवरी को खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद से चांदी का पूरा गेम चेंज हो गया. यहां से चांदी की कीमतों में गिरावट शुरू हो गई.

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट पर जारी रेटलिस्ट के मुताबिक...
मतलब अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच सोने ने 50.77% का ग्रोथ हासिल कर लिया. लेकिन इसके बाद से सोना लगातार गिरना शुरू हो गया.

सोने की कीमत में गिरावट आई है. जनवरी से लेकर अब तक सोने के भाव में करीब 34000 रुपये की गिरावट आ चुकी है, लेकिन चांदी की हालात सबसे ज्यादा खराब है. चांदी की कीमत आधी रह गई है. 3.86 लाख से लेकर चांदी 1.94 लाख के करीब पहुंच गई है. जिन्हें खरीदारी करना है, वो खुश है, लेकिन जिन्होंने सोने-चांदी में निवेश किया था , उनका बुरा हाल है.
सोने-चांदी की कीमत में आई इस गिरावट के लिए कई फैक्टर्स जिम्मेदार हैं. ऑल इंडिया बुलियन एंड जूलरी एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल की माने, तो
बदले वैश्विक हालात, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और महंगाई के आंकड़े सोने-चांदी की चमक को धूमिल कर रहे हैं. वहीं इस गिरावट की बड़ी वजह बिकवाली है. जिन लोगों ने ऊंचे दाम पर सोने-चांदी में पैसा लगाया , अब वो अपना पैसा निकाल रहे हैं. उन्हें जर है कि कीमतों में और गिरावट आ सकती है.
ईरान युद्ध और होर्मुज का रास्ता बंद होने की वजह से क्रूड ऑयल की कीमत 75-80 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 117 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच चुकी है. महंगा तेल , देश में महंगाई को बढ़ा रहा है. महंगाई बढ़ने से उसे नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों को बढ़ाना पड़ सकता है. ब्याज दर बढ़ने से निवेशक सोने के बजाए सरकारी बॉन्ड में निवेश करने लगते हैं, क्योंकि सोने पर उन्हें कोई ब्याज नहीं मिलता.
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से भी ब्याज दर नें बढ़ोतरी की आशंका बढ़ी हुई है. जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो जाहिर सी बात है कि निवेशक बेहतर रिटर्न की आस में सोने-चांदी से रकम निकालकर बॉन्ड में लगाने लगते हैं, जिससे सोने की मांग घटती है और कीमतें नीचे आने लगती है.
सरकार ने मई 2026 में चांदी के इंपोर्ट पर पाबंदियां लगाई थी. जून में इसे और सख्त कर दिया गया. आयात बिल पर दबाव को कम करने के लिए सरकार ने ऐसा किया. अब सरकार ने चांदी इंपोर्ट करने के परमिट जारी कर दी है. सरकार ने दिवाली-धनतेरस जैसे फेस्टिव सीजन में भारी डिमांड को देखते हुए अगले छह महीने में 6500 मीट्रिक टन चांदी आयात करने की अनुमति दे दी है. भारत अपनी जरूरत की 80 पर्सेंट चांदी आयात करता है. आयात में मिली छूट से सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों में गिरावट आई है.
चांदी सिर्फ गहनों और बर्तन बनाने में इस्तेमाल नहीं होता है, बल्कि चांदी का इस्तेमाल डेटा सेंटर , AI सर्वर बनाने में होता है. चांदी में अच्छी थमल और इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी होती है, जिसकी वजह से डेटा सेंटर, सर्वर और इलेक्ट्रॉनिक अप्लायंस में इसका इस्तेमाल होता है, लेकिन AI और डेटा सेंटर्स में इसकी कमी ने चांदी की चमक को फीका कर दिया है. युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूटी हुई है, जिसकी वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में काम धीमा हो रहा है, जिसने भी चांदी की मांग और कीमत पर असर डाला है.

बाजार जानकारों की माने, तो सोने-चांदी में थोड़ा और करेक्शन दिख सकता है. साल 2022 में भी ऐसी ही स्थिति बनी थी.सोने-चांदी में फिलहाल करेक्शन का दौर चल रहा है. हालांकि ये कह पाना आसान नहीं है कि सोना-चांदी कितना गिरेगा या कितना सस्ता होगा या कब से वापसी करेगा? बाजार ने अधिकांश जानकारों के मुताबिक सोने के दाम 1.30 लाख से लेकर 1.35 लाख तक पहुंच सकते हैं और चांदी की कीमत 1.65 लाख से लेकर 1.75 लाख के करीब रह सकते हैं.
मार्केट एक्सपर्ट डॉ. शरद कोहली कहते हैं कि सोना-चांदी की खरीदारी अपनी जरूरत के हिसाब से की जाती है. घर में शादी-ब्याह है, तो उसे देखते हुए खरीदारी करें. अगर आप निवेश के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, तो थोड़ा-थोड़ा कर खरीदना बेहतर विकल्प हैं. सोने-चांदी में खरीदारी से पहले आप अपने वित्तीय सलाहकार से निवेश की सलाह जरूर लें.