Gold price: सोने की कीमत लंबे वक्त से वापसी नहीं कर पा रही है. एक तरफ कच्चे तेल के दाम चढ़ रहे हैं, तो दूसरी ओर सोना गिरता ही जा रही है. 29 जनवरी 2026 के बाद से सोने में लगातार गिरावट की हालत बनी हुई है. 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच चुका सोना आज 1.47 लाख रुपये पर पहुंच चुका है. यानी सोना जनवरी के लेकर अब तक 33000 रुपये तक सस्ता हो चुका है.
सोने की आज की कीमत
इंटरनेशनल मार्केट से लेकर घरेलू सर्राफा बाजार में सोना अपने ऑल टाइम हाई से सस्ता हुआ है. एक तरफ कच्चे तेल की कीमत में तेजी और दूसरी ओर सोना गिर रहा है, 6 अक्टूबर को इंटरनेशनल मार्केट में स्पॉट गोल्ड की कीमत गिरकर 4,122.61 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई. MCX पर गोल्ड के दाम आज 396 रुपये गिरकर 148920 रुपये प्रचि 10 ग्राम पर पहुंच गया. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन पर जारी रेटलिस्ट के मुताबिक 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 148200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है.
24 कैरेट शुद्धता वाले सोने की कीमत 148200 रुपये प्रति 10 ग्राम
22 कैरेट शुद्धता वाले सोने की कीमत 135750 रुपये प्रति 10 ग्राम
18 कैरेट शुद्धता वाले सोने की कीमत 111150 रुपये प्रति 10 ग्राम
14 कैरेट शुद्धता वाले सोने की कीमत 86700 रुपये प्रति 10 ग्राम
तेल में महंगाई, फिर क्यों गिर रहा है सोना ?
आम तौर पर देखा जाता है कि जब जियो पॉलिटिक टेंशन बढ़ते हैं, अस्थिरता आती है, तो सेफ हेवन की पहचान रखने वाले सुरक्षित निवेश सोने की डिमांड बढ़ जाती है. सोने की कीमत में बढ़ने लगती है, लेकिन इस बार सीन पूरा बदल गया. खाड़ी युद्ध और होर्मुज पर नाकेबंदी की वजह से कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है. तेल की महंगाई इन्फ्लेशन बढ़ा रही है. महंगाई बढ़ने से सेंट्रल बैंक ब्याज दर बढ़ाने लगे हैं. ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड हाई लेवल पर पहुंच रहा है. डॉलर मजबूत हो रहा है. ये सारे फैक्टर्स सोने को कमजोर कर रहे हैं.
सोने की कमजोरी का तेल कनेक्शन
कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं. ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है. तेल और भू-राजनीतिक तनाव ने महंगाई की उम्मीदों और ब्याज दरों के अनुमान को प्रभावित किया है. बढ़ती महंगाई लोगों की खरीदारी की क्षमता को कमजोर करती है. लोग सोने-चांदी की खरीदारी कम कर देते हैं, मांग गिरती है और दाम भी कमजोर होने लगता है.
सोने की गिरावट का अमेरिका कनेक्शन
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऑल टाइम हाई पर है. बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज बढ़ता है, तो सोने और चांदी को रखने का आकर्षण कम हो जाता है. चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए निवेशक गोल्ड से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगाने लगते हैं. मजबूत अमेरिकी डॉलर सोने की खरीदारी को कमजोर करता है. डॉलर के मजबूत होने पर दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा होने लगता है.
कहां तक जा सकता है सोना?
सोने को लेकर बैंक ऑफ अमेरिका ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही में सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस से भी नीचे फिसल सकती है. बैंक ने इसकी कीमत करीब 3,750 डॉलर प्रति औंस तक गिरने की आशंका जताई है. अगर इस रेट को भारतीय करेंसी में देखें, तो ये कीमत करीब 1.15 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आ सकती है. जबकि Mirae Asset Sharekhan के कमोडिटी एक्सपोर्ट प्रवीण सिंह का कहना है कि सोने को पहले $3,930–4,000 पर सपोर्ट मिल सकता है. अगर सोना इससे नीचे फिसलता है, तो अगला सपोर्ट जोन $3,600–3,750 का हो सकता है.इसके बाद भी अगर अमेरिकी यील्ड और महंगाई उम्मीद से काफी ज्यादा बढ़े, तो सोना 1.25 लाख रुपये पर पहुंच सकता है.