दिल्ली में विरोध प्रदर्शन, कारोबारियों को 4000 करोड़ का नुकसान; कौन होगा जिम्मेदार?
दिल्ली में चलने वाले विरोध-प्रदर्शन के चलते सबसे ज्यादा नुकसान कारोबारियों को उठाना पड़ रहा है. पिछले 10 दिन के दौरान ही व्यापारियों को 4000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है.
फेस्टिव सीजन शुरू हो गया है लेकिन दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन के कारण व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. पिछले 10 दिन के दौरान ही कारोबारियों को भारी नुकसान हुआ है. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के सेक्रेटरी और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि दिल्ली में हो रहे विरोध-प्रदर्शन के कारण 10 दिन के दौरान 4 हजार रुपये का नुकसान झेड़ना पड़ा है. लंबे समय तक चलने वाले विरोध-प्रदर्शनों के आर्थिक असर पर चिंता जाहिर करते हुए खंडेलवाल ने बताया कि ट्रैफिक, ट्रांसपोर्टेशन, ग्राहकों की आवाजाही और बाजार तक पहुंच में रुकावटें राजधानी की कारोबारी गतिविधियों पर असर डाल सकती हैं.
ऐसी स्थिति खास तौर पर त्योहारों और शादियों के सीजन के दौरान देखी जाती है. प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि व्यापारियों के लिए हर साल अक्टूबर से जनवरी तक का समय सबसे खास त्योहारी सीजन होता है. इस दौरान बड़े पैमाने पर कारोबार होता है और व्यापारियों को इस सीजन से काफी उम्मीद होती है. इस बार देशभर में करीब 7 लाख करोड़ रुपये का व्यापार होने का अनुमान है. अगर इसी तरह से विरोध-प्रदर्शन होते रहे और बिना किसी पूर्व सूचना के प्रदर्शन किये जाते रहे तो ऐसी स्थिति बन जाती है, जिससे दिल्ली के कारोबार को नुकसान उठाना पड़ता है.
कारोबारियों का दर्द कोई समझने के लिए तैयार नहीं
यदि पिछले 10 दिन का आकलन करें तो दिल्ली के व्यापारियों को करीब 4,000 करोड़ रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ा है. कोई भी कारोबारियों के दर्द को समझने को तैयार नहीं है. सिर्फ व्यापारी ही नहीं, बल्कि रेहड़ी-पटरी और ठेले वाले की आजीविका पर बड़ा असर पड़ रहा है. खंडेलवाल की तरफ से इस बात पर जोर दिया गया कि भले ही संविधान नागरिकों को बोलने की आजादी और शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने का अधिकार देता है, लेकिन व्यापारियों को भी बिना किसी गैर जरूरी रुकावट के अपना कारोबार करने और आजीविका कमाने का हक होना चाहिए.
जनहित के लिए जिम्मेदार रवैया अपनाना जरूरी
खंडेलवाल ने यह भी कहा कि विरोध करने का अधिकार और व्यापार करने का अधिकार, दोनों ही एक स्वस्थ लोकतंत्र का हिस्सा हैं. एक की रक्षा करने का मतलब दूसरे की अनदेखी करना नहीं होना चाहिए. व्यापक जनहित के लिए जिम्मेदार रवैया अपनाना जरूरी है, जिसमें लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति, कानून के शासन, आर्थिक गतिविधियों और लाखों लोगों की आजीविका का पूरा सम्मान किया जाए.'
दिल्ली में रोजाना 2,200 करोड़ का कारोबार
खंडेलवाल ने बताया कि दिल्ली में किया जाने वाला रोजाना औसत कारोबार करीब 2,200 करोड़ रुपये का है. यदि कमर्शियल गतिविधियों में 10 प्रतिशत की भी गिरावट आती है तो इससे रोजाना 220 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है. 15 प्रतिशत की गिरावट आने पर भी 330 करोड़ रुपये का कारोबार खतरे में पड़ सकता है. अगर इन रुकावटों के कारण कारोबार में 20 प्रतिशत की कमी आती है तो यह आंकड़ा रोजाना 440 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.