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पेट्रोल-डीजल पर भारी घाटा, हर LPG सिलेंडर पर ₹245 का नुकसान...तेल कंपनियां कब तक उठाएगी बोझ, दिवाली से पहले बढ़ेंगे दाम?

Petrol-Diesel Price Hike: रिटेल प्राइस जस से तस है, लेकिन कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही है, शिपिंग कॉस्ट बढ़ रही है. तेल कंपनियों पर बोझ बढ़ रहा है. पेट्रोल-़डीलज से लेकर LPG सिलेंडर पर भारी घाटा हो रहा है.

Written By Bavita Jha
Published: Oct 25, 2026, 02:07 PM IST | Updated: Oct 25, 2026, 02:36 PM IST
Image Credit: lpg oil price
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Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सिलसिला थमने का नाम नहीं दे रहा है. क्रूड ऑयल की कीमत जो गिरकर 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंची थी, वो फिर से तेजी के साथ 117 डॉलर के पार जा चुकी है. ना तो खाड़ी में तनाव कम हो रहा है और ना ही होर्मुज का रास्ता खुल रहा है.  लाल सागर में अलग से बढ़े तनाव के चलते तेल के दाम बढ़ रहे हैं. 

भारत की बढ़ती टेंशन

भारत की चिंता इसलिए भी बढ़ रही है, क्योंकि वो अपनी ऊर्जा जरूरत का अधिकांश हिस्सा आयात करता है. ग्लोबल मार्केट में तेल  और गैस से दाम बढ़ने से भारत के आयात बिल पर भारी दबाव बढ़ रहा है. तेल कंपनियों की लागत बढ़ रही है. ऐसे में सवाल ये कि इस दबाव को कंपनियां कब तक झेलेंगी? तेल के बढ़ते बिल की भरपाई कौन करेगा? क्या आने वाले दिनों में फिर से पेट्रोल-डीजल और LPG सिलेंडर के दाम बढ़ेंगे?  

पढ़ें- सऊदी अरब में हूतियों का बवाल, कच्चे तेल में 'उबाल', कीमत 117 डॉलर के पार, क्या फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

कच्चे तेल ने बढ़ाया भारत का खर्च

कच्चे तेल की कीमत 117 डॉलर के आसपास पहुंच गई है. एक साल पहले ये कीमत सिर्फ 69 डॉलर प्रति बैरल थी. मतलब ये कि एक साल में क्रूड ऑयल की कीमत में 67 फीसदी से अधिक का उछाल आया है. सिर्फ दाम नहीं बढ़ें है. तेल की कीमत के साथ-साथ शिपिंग कॉस्ट में भी इजाफा हुआ है. कच्चे तेल की ढुलाई में 8 गुना बढ़ोतरी हो गई है. गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक  पहले प्रति बैरल तेल ढुलाई पर 3 डॉलर का मालभाड़ा लगता था, अब वो बढ़कर 20 डॉलर पर पर पहुंच चुका है. सालभर में तेल की शिपिंग में 17 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हो चुकी है.  ये सारा बोझ तेल कंपनियों पर बढ़ रहा है.

तेल कंपनियों पर बढ़ रहा है महंगे कच्चे तेल का दबाव

महंगे कच्चे तेल और शिपिंग के बढ़ते खर्च का बोझ भारत के आयात बिल पर बढ़ता जा रहा है. सितंबर में भारत का कच्चे तेल का आयात बिल 47 फीसदी तक बढ़कर 15.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया. PPAC के डेटा के मुताबिक सितंबर 2026 में भारत ने 2.17 करोड़ टन कच्चे तेल का इम्पोर्ट किया, जबकि सितंबर 2025 में ये करीब 2.03 करोड़ टन था. आयात में मामूली बढ़ोतरी हुई, लेकिन आयात बिल 10.5 अरब डॉलर से बढ़कर 15.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया.  

महंगे तेल आयात बिल का बोझ कौन उठाएगा?  

एक्सिस बैंक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक तेल-गैस की रिटेल कीमतों में कोई बदलाव न हो, तो कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से सरकार पर बढ़ने वाला लोड GDP के 20 बेसिस पॉइंट तक पहुंच सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक सरकार तेल कंपनियों के बढ़ते लागत को कम करने के लिए कुछ मदद करती है. जैसे एक्साइज ड्यूटी घटाकर, सेस घटाकर, सब्सिडी देकर सरकार मदद करती है.

रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारें, सरकारी तेल कंपनियां, भारतीय रिजर्व बैंक मिलकर आयात बिल के बढ़े बोझ को कुछ कम करने की कोशिश कर रही हैं, ताकि महंगे तेल और गैस का बोझ आम लोगों और देश की अर्थव्यवस्था पर कम से कम पड़े.  

हर लीटर पर कितना नुकसान  

ग्लोबल रिसर्च फर्म Jefferies की रिपोर्ट Energy Market Letter: Volume XXII के मुताबिक ऑयल प्राइस और शिपिंग कॉस्ट बढ़ने से तेल कंपनियों को हर लीटर पेट्रोल-डीजल पर भारी नुकसान हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक 25 मई के बाद भारत में पेट्रोल-डीजल के रिटेल प्राइस में कोई बदलाव नहीं किया गया. जिसकी वजह से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है. सितंबर 2026 में जारी जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हर लीटर पेट्रोल पर  26 रुपये और हर लीटर डीजल पर 30 रुपये तक का घाटा हो रहा है.

LPG सिलेंडर पर 245 रुपये का घाटा

हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के मुताबिक उन्हें हर LPG सिलेंडर की बिक्री पर 245 रुपये का नुकसान हो रहा है. HPCL के एमडी विकास कौशल के मुताबिक नवंबर में ये नुकसान बढ़कर 327 रुपये पर पहुंच सकता है. जुलाई से सितंबर के दौरान एचपीसीएल को 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. ऐसे में आशंका बढ़ रही है कि अगर खाड़ी देश में हालात नहीं बदले, तो भारत में एक बार फिर से पेट्रोल-डीजल और एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ सकते हैं. हालांकि सरकार और तेल कंपनियों ने फिलहाल इसे स्थिर बनाए रखा है. ये देखना होगा कि कब तक वो इस वित्तीय बोझ को झेल पाती है. 

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About the Author

बवीता झा बिजनेस पत्रकार हैं, उन्हें डिजिटल और टीवी न्यूज़ मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News Hindi (Digital) में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. व्यापार जगत की जटिलताओं और आर्थिक आंकड़ों को आम पाठकों के लिए सरल भाषा में डिकोड करना उनका मजबूत पक्ष है.  • शेयर बाजार • बिजनेस एक्सप्लेनर • पर्सनल फाइनेंस और टैक्सेशन  • कमोडिटी, गोल्ड-सिल्वर ट्रेड• ग्लोबल ट्रेड • जियो इकोनॉमिकस डेवलपमेंट • कारोबार से जुड़ी सरकारी योजना और पॉलिटी • बिजनेस और मार्केट ट्रेंडZee News से पहले बवीता ने नवभारत टाइम्स (NBT) के बिजनेस सेक्शन और Oneindia जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल संस्थानों में इवनिंग शिफ्ट, होम पेज मैनेजमेंट और ट्रेडिंग न्यूज़ की अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं. इसके अलावा महुआ न्यूज़, जनसंदेश और सहारा जैसे टीवी चैनलों में प्रोग्राम प्रोड्यूसर और रनडाउन मैनेजमेंट का उनके पास 4 वर्षों का ठोस अनुभव है.  दिल्ली से पत्रकारिता में स्नातक और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाली बवीता, खबरों की सत्यता और वित्तीय मामलों की सटीक रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देती हैं.  बवीता झा से आप bavita.jha@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स  पर https://x.com/youthreporter2 के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. सोशल मीडिया पर कनेक्ट होने के लिए फेसबुक पेज https://www.facebook.com/bavita.jha , इंस्टाग्राम instagram.com/bavita.jha पर जुड़ सकते हैं. बवीता झा की खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं.
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