Car Price Hike: अब कार खरीदना पड़ेगा महंगा? नए सेफ्टी नियम बढ़ाएंगे कीमत; जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर?
अप्रैल 2027 से कारों की कीमतें बढ़ सकती हैं क्योंकि भारत में सुरक्षा के कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं. इसके अलावा, 2029 से लागू होने वाले 'रियर-इम्पैक्ट' (पीछे से टक्कर) संबंधी नियमों के कारण एंट्री-लेवल कारों की कीमत में 10,000 रुपये तक का इजाफा हो सकता है.
Car Price Hike : अगर आपको अगले कुछ समय में नई कार खरीदना है तो ये खबर आपके काम की है. अप्रैल 2027 से नई कारों की कीमतें बढ़ने की उम्मीद है. देश भर में 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले कड़े सुरक्षा (Safety Norms) और फ्यूल-इफिशिएंसी (CAFE-III) नियमों के कारण नई कारों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स और कंपनियों का मानना है कि नए सेफ्टी क्रैश टेस्ट मानकों, एडवांस्ड एमिशन कंट्रोल तकनीकों और बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट (लागत) का सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा. इससे न केवल एंट्री-लेवल और हैचबैक सेगमेंट की कारें महंगी होंगी. बल्कि पेट्रोल, डीजल और हाइब्रिड मॉडल की एक्स-शोरूम कीमतों में भी बड़ा इजाफा होने का अनुमान है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने इन बदलावों को लागू करने के लिए अलग-अलग समय-सीमा तय की है, ताकि वाहन निर्माताओं को जरूरी बदलाव करने का समय मिल सके.
10,000 रुपये तक बढ़ सकती है कीमत
वाहन विकास से जुड़े एक इंडस्ट्री एग्जीक्यूटिव ने बताया, 'नए नियमों का पालन करने के लिए वाहन निर्माताओं को गाड़ियों के स्ट्रक्चर और सुरक्षा उपकरणों का फिर से मूल्यांकन करना होगा. इसमें लगने वाले अतिरिक्त मटेरियल, इंजीनियरिंग या टेस्टिंग के खर्च की वजह से एंट्री-लेवल हैचबैक कारों की कीमत कम से कम 10,000 रुपये तक बढ़ सकती है.'
पीछे के हिस्से को और मजबूत बनाने की जरूरत
'रियर-इम्पैक्ट' नियमों के तहत अप्रैल 2029 से भारत में बनने वाली सभी नई कारों को एक क्रैश टेस्ट पास करना होगा. इस टेस्ट में यह साबित करना होगा कि पीछे से टक्कर लगने पर पेट्रोल और डीजल कारों से ईंधन का रिसाव न हो और इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी को कोई नुकसान न पहुंचे. अब तक सामने से टक्कर होने के मामलों को देखते हुए वाहन निर्माता गाड़ियों के अगले हिस्से में 'हाई-स्ट्रेंथ स्टील' (HSS) का इस्तेमाल करने को प्राथमिकता देते रहे हैं. वहीं, कई मॉडलों में गाड़ियों के पिछले हिस्से में इसका इस्तेमाल काफी कम होता था.
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इन नियमों का पालन करने के लिए गाड़ियों के अहम हिस्सों में और ज्यादा HSS का इस्तेमाल करना पड़ सकता है. इसके अलावा, पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों में फ्यूल टैंक के आस-पास और इलेक्ट्रिक कारों में बैटरी पैक के आस-पास अतिरिक्त मजबूती देनी होगी. इन बदलावों से गाड़ी का वजन और प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ सकती है. इससे कारों की एक्स-शोरूम कीमतें भी बढ़ सकती हैं. इसका मुख्य उद्देश्य पीछे से टक्कर लगने की स्थिति में फ्यूल सिस्टम या इलेक्ट्रिक पावरट्रेन को नुकसान से बचाना है, ताकि आग लगने का खतरा कम हो सके.
सुरक्षा नियम कई चरणों में लागू होंगे
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अप्रैल 2027 तक नए सुरक्षा मानकों को लागू करने की समय-सीमा तय की है. इनमें ऑफसेट फ्रंटल और लेटरल क्रैश प्रोटेक्शन, पैदल चलने वालों की सुरक्षा और इमोबिलाइजर (वाहन चोरी रोकने वाली तकनीक) से जुड़े नियम शामिल हैं. पीछे से टक्कर (रियर-इम्पैक्ट) से जुड़ी जरूरतें अप्रैल 2029 से लागू होंगी.
एक अलग नोटिफिकेशन में मंत्रालय ने अक्टूबर 2029 से कारों में लगाए जाने वाले 'इवेंट डेटा रिकॉर्डर' के लिए 'ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड AIS-192' को अनिवार्य कर दिया है. ये डिवाइस दुर्घटना से ठीक पहले और दुर्घटना के दौरान की जानकारी रिकॉर्ड करते हैं. इससे ये समझने में मदद मिलती है कि टक्कर किन परिस्थितियों में हुई.
हालांकि, कीमत पर कितना असर पड़ेगा ये इस बात पर निर्भर करेगा कि हर वाहन में क्या-क्या बदलाव करने पड़ते हैं और निर्माता अतिरिक्त लागत का कितना हिस्सा खुद उठाते हैं.