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बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयर में 3% की गिरावट, इस शख्स ने क्यों किया 1.42 लाख करोड़ का मुकदमा?

BR Shetty Lawsuit: एनएमसी हेल्थकेयर के फाउंडर डॉ. बीआर. शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा और 25 अन्य के खिलाफ 15 अरब डॉलर के मुआवजे का मुकदमा किया है. इसके बाद बैंक के शेयर में गिरावट देखी जा रही है. आइए जानते हैं इस विवाद का कारण और बैंक ने इस पर क्या कहा?

Written ByKriyanshu Saraswat
Published: Oct 14, 2026, 11:22 AM IST|Updated: Oct 14, 2026, 12:01 PM IST
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बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयर में 3% की गिरावट, इस शख्स ने क्यों किया 1.42 लाख करोड़ का मुकदमा?

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Kriyanshu Saraswat

Kriyanshu Saraswat

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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Bank of Baroda Share Price: बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) और अन्य 25 पक्षों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में एक मुकदमा दायर किया गया है. यह मुकदमा एनएमसी हेल्थकेयर ग्रुप (NMC Healthcare Group) और यूएई एक्सचेंज के फाउंडर डॉ. बीआर शेट्टी ने किया है. शेट्टी ने कथित फ्रॉड, फर्जी गारंटी और कारोबारी साम्राज्य के पतन से जुड़े नुकसान के लिए 15 अरब डॉलर (1.42 लाख करोड़ रुपये) का मुआवजा मांगा है. अक्टूबर 2026 के मुकदमे के अनुसार शेट्टी ने प्रतिवादियों और परिणामी नुकसान के रूप में 5-5 अरब डॉलर और सालाना 18% की दर से ब्याज मांगा है. उन्होंने अकेले बैंक ऑफ बड़ौदा से साख के नुकसान के लिए अतिरिक्त 5 अरब डॉलर का दावा किया है. इस मुकदमे में बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारियों के साथ-साथ एनएमसी और यूएई एक्सचेंज के पूर्व एग्जीक्यूटिव और कुछ दूसरी भारतीय संस्थाएं भी शामिल हैं.

डॉ. शेट्टी की तरफ से लगाए गए आरोप

  • बैंक ने ऐसे ट्रांजेक्शन को आसान, जिनका यूज ग्रुप की कंपनियों से पैसा डायवर्ट करने के लिए किया गया
  • मनी-लॉन्ड्रिंग की चेतावनियों को नजरअंदाज करके बिना सिक्योरिटी के लोन दिये गए
  • ऑडिटर्स से उधारी के Exposures को छिपाकर रखा गया
  • बैंक पर जाली हस्ताक्षरों (Forged Signatures) वाली गारंटियों पर भरोसा करने का आरोप

मुकदमे में दावा किया गया है कि विवादित क्रेडिट फैसेलिटी दिये जाने से पहले ही शेट्टी ने ग्रुप की कंपनियों का कंट्रोल छोड़ दिया था. यह भी आरोप है कि अनऑथराइज स्टॉफ ने उनके पर्सनल बैंक अकाउंट को ऑपरेट किया और उन्हें ट्रांजेक्शन में फंसाने के लिए फेक डॉक्यूमेंट का इस्तेमाल किया गया. हालांकि, ये सभी आरोप शेट्टी की तरफ से किये गए मुकदमे में लगाए गए हैं. अदालत की तरफ से अभी तक इनमें दोष साबित नहीं हुआ है.

बैंक ऑफ बड़ौदा का पुराना एग्रीमेंट

अदालत में दायर किये गए मुकदमे में जून 2026 में एनएमसी हेल्थकेयर के ज्वाइंट एडमिनिस्ट्रेटर के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा के करीब 600 मिलियन डॉलर (5,700 करोड़ रुपये) के एग्रीमेंट का भी हवाला दिया गया है. आवेदक के अनुसार यह एग्रीमेंट 2 जुलाई 2026 को बिना किसी लायबिलिटी को मंजूर किये बगैर डिक्लेयर किया गया था. शेट्टी की तरफ से तर्क दिया गया कि यह एग्रीमेंट उन्हीं अंतर्निहित ट्रांजेक्शन से संबंधित है और उन्होंने शेट्टी के खिलाफ बैंक के बाद के क्लेम पर सवाल उठाया है.

नुकसान के अलावा शेट्टी ने और क्या मांगा?

  • बैंक रिकॉर्ड का डिस्क्लोजर और उनका प्रोटेक्शन
  • विवादित ट्रांजेक्शन के माध्यम से कथित रूप से ट्रांसफर पैसे की डिटेल
  • कुछ प्रतिवादियों के पास मौजूद संपत्तियों की सुरक्षा के उपाय

बैंक ऑफ बड़ौदा की तरफ से साफ किया गया कि उसे ऐसे किसी मुकदमें की जानकारी नहीं है. बैंक ने 14 अक्टूबर को स्टॉक एक्सचेंज को जारी एक स्पष्टीकरण में बताया कि मीडिया में आई उन रिपोर्ट को देखा जिनमें डॉ. बीआर शेट्टी की तरफ से 13 अक्टूबर, 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में मुकदमा दायर करने की बात कही गई है. बैंक ने बताया कि उसे अभी इस तरह के किसी भी मुकदमे की कोई कॉपी नहीं मिली है.

बैंक की तरफ से यह भी कहा गया कि यदि मुकदमे से जुड़ी पूरी जानकारी मिलने पर बैंक इसका डटकर मुकाबला करेगा और अपने हक में सभी जरूरी कमद उठाएगा. बैंक ऑफ बड़ौदा ने यह भी कहा कि अबू धाबी ग्लोबल मार्केट कोर्ट में भी कार्यवाही चल रही है. वहां पर फ्रॉड और गलत तरीके से कारोबार करने के मामले में डॉ. शेट्टी और प्रशांत मंगहत के खिलाफ फैसला सुरक्षित रखा गया है. बैंक ने यह भी कहा कि डॉ. शेट्टी से करीब 2,800 करोड़ के बकाया को वसूलने के लिए भारत और यूएई में कानूनी कार्यवाही कर रहा है. शेट्टी के खिलाफ डिग्रियां हासिल हो गई हैं. कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी 2021 में डॉ. शेट्टी को अपनी किसी भी संपत्ति की बिक्री से रोक दिया था.

शेयर में भी गिरावट

डॉ. शेट्टी की तरफ से मुकदमा किये जाने की खबर के बाद एनएसई पर बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयर में गिरावट देखी जा रही है. एनएसई पर बैंक ऑफ बड़ौदा का शेयर करीब 3 फीसदी गिरकर कारोबार करता देखा गया. मंगलवार को 238.43 रुपये पर बंद हुआ बैंक का शेयर आज सुबह गिरकर खुला. कारोबारी सत्र की शुरुआत में यह गिरकर 230.40 रुपये तक चला गया. हालांकि, बाद में इसमें तेजी देखी गई. शेयर का 52 हफ्ते का लो लेवल 223.82 रुपये और हाई लेवल 325.50 रुपये है. बैंक का मार्केट कैप 1,19,784 करोड़ रुपये हो गया.

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