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Indian Airlines : युद्ध के चलते महंगे फ्यूल और कमजोर होते रुपये ने भारतीय विमानन कंपनियों की मुश्किल बढ़ा दी है. एयरलाइंस भारी घाटे में चल रही है. ये घाटा बढ़कर 36000-38000 करोड़ रुपये पर पहुंच सकता है.
भारतीय एविएशन सेक्टर का घाटा बढ़ रहा है. ICTA के डेटा के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में 38000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. बीते साल ये घाटा 28000-30000 करोड़ रुपये पर पहुंचा था. घाटे में ये बढ़ोतरी फ्यूल प्राइस में आई तेजी की वजह से हैं.
फरवरी 2026 से खाड़ी युद्ध जारी है. मिडिल ईस्ट की जंग ने कच्चे तेल की कीमत को 69 डॉलर से सीधे 115 डॉलर पर पहुंच दिया है. एविएशन टर्बाइन फ्यूल में तेजी में एयरलाइंस के लिए ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ा दी है. यूनियन कैबिनेट के मुताबिक ATF की कीमतों में 2.5 गुना की बढ़ोतरी हो चुकी है. मार्च 2026 में ATF की कीमत 60.50 रुपये प्रति लीटर पर था, जो मई 2026 में 142 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया. अक्टूबर 2026 में इसकी कीमत 137 रुपये पर बनी हुई है.
महंगे फ्यूल ने विमान कंपनियों के लिए फ्लाइट ऑपरेशन को महंगा कर दिया है. बता दें कि फ्लाइट ऑपरेशन कॉस्ट में 40% हिस्सेदारी ATF की है. ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से विमान कंपनियों के लिए ऑपरेशन लागत बढ़ रही है. डॉलर के मुकाबले गिरता रुपया खरीदारी को महंगा कर रहा है. जिसके चलते एयरलाइंस कंपनियों की बैलेंस शीट बिगड़ी हुई है .
ऑपरेशन खर्च का दबाव एयरलाइन कंपनियां बहुत लंबे वक्त तक खुद नहीं उठा पाएंगी. ऐसे में आने वाले दिनों में इस खर्च का बोझ यात्रियों पर आ सकता है. विमान कंपनियां फ्लाइट टिकट किराए में बढ़ोतरी कर सकती हैं.