बिहार का एक ऐसा देवी मंदिर, जहां लोग लगाते हैं अपनी फरियाद और मां करती हैं अपने भक्तों पर ऐसा चमत्कार कि खिंचे चले आते हैं श्रद्धालु! जी हां, मोक्ष नगरी गया का सिद्ध मां बगलामुखी दरबार में नवरात्र के पावन दिनों में मां के दर्शन के लिए भक्तों की अपार भीड़ उमड़ रही है. मां पीताम्बरा के इस पावन दरबार की क्या है मान्यता और क्यों यहां हर फरियाद पूरी होती है! चलिए इस खास रिपोर्ट में जानने का प्रयास करते हैं.
मां बगलामुखी मंदिर आध्यात्मिक, धार्मिक और तांत्रिक साधना की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र स्थल है. मां बगलामुखी को सनातन धर्म की दस महाविद्याओं में 8वीं देवी माना गया है. दस महाविद्याओं में अष्टम शक्ति के रूप में पूजी जाने वाली मां बगलामुखी के इस सिद्ध पीठ में नवरात्र के दौरान आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है. इन्हें पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि इन्हें पीला रंग, पीले वस्त्र और पीले फूल अति प्रिय हैं. सुबह की पहली किरण से लेकर देर रात तक मां के दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं.
आंतरिक विकृतियों से भी स्तब्ध कर देने वाली देवी
मान्यता है कि मां बगलामुखी को ब्रह्मास्त्र रूपिणी भी कहा जाता है. इनकी उपासना मुख्य रूप से शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने, मुकदमों (कोर्ट-कचहरी के मामलों) में सफलता पाने, बुरी नजर, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा के निवारण के लिए की जाती है. तांत्रिक मान्यता के अनुसार, यहां शत्रु से तात्पर्य बाहरी दुश्मनों के साथ-साथ हमारे अंदर के काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसी आंतरिक विकृतियों से भी स्तब्ध कर देने वाली देवी हैं. जिन्हें दुनिया में कहीं रास्ता नहीं मिलता, वो मां के इस दरबार में अपनी अर्जी लगाते हैं. नवरात्र में यहां विशेष तौर पर पीताम्बरा पूजन और हल्दी से हवन-अनुष्ठान किया जाता है.
श्रद्धा और अटूट आस्था का केंद्र
गया के इस पावन शक्ति पीठ का इतिहास सनातन परंपरा और गुप्त साधना पद्धतियों से जुड़ा रहा है. प्राचीन काल से ही राजा-महाराज, तपस्वी और साधक अपने संकटों के निवारण, राज्य की रक्षा और विजयश्री प्राप्ति के लिए मां बगलामुखी के दरबार में हाजिरी लगाते रहे हैं. गया का यह मंदिर भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करने वाला सिद्ध पीठ माना जाता है. भक्ति, शक्ति और चमत्कार का यह संगम यह साबित करता है कि जहां अटूट विश्वास हो, वहां मां की कृपा बरसन तय है. नवरात्र के इस पावन अवसर पर गया का यह दरबार श्रद्धालुओं के लिए अपार श्रद्धा और अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है.
नवरात्र में हर दिन मां के दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु
मां बगलामुखी में पूजा करने आए श्रद्धालु राहुल कुमार ने बताया कि वह नवरात्र में हर दिन मां के दर्शन करने आते हैं. यहां पर आपकी सारी मन्नत पूरी हो जाती है. माता भक्तों के सारे दुख दर्द के हर लेते हैं. वहीं, एक श्रद्धालु मधुमिता देवी कहता हैं कि यहां पर मत्था टेकने से सारी मनोकमाना पूरी होता है, शादी-विवाह से लेकर बीमारी तक ठीक हो जाती है. उन्होंने कहा कि मेरा एक बच्चा था, जिसकी जान जाने वाली थी, लेकिन मां की कृपा से वह ठीक हो गया.
अष्टम शक्ति के रूप में मां बगलामुखी की जाती है पूजा
श्रद्धालु गुड्डी गुप्ता ने कहा कि वह नवरात्र में हर दिन मां की पूजा करते आती हैं. इतनी ही नहीं वह हर मंगलवार को मां बगलामुखी में पूजा करने और मां के दर्शन करने आती हैं. यहां आने से भक्तों के दुख दर्द दूर हो जाते हैं. वहीं, मंदिर के पुजारी सौरव मिश्रा ने बताया कि गया क्षेत्र का बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर हैं. मां बगलामुखी को सनातन धर्म की दस महाविद्याओं में 8वीं देवी माना गया है. दस महाविद्याओं में अष्टम शक्ति के रूप में मां बगलामुखी की पूजा की जाती है.
रिपोर्ट: जय प्रकाश कुमार