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World Dolphin Day: सुल्तानगंज से कहलगांव तक गंगा में डॉल्फिन की अठखेलियां, बिखरी कुदरत की खूबसूरती

World Dolphin Day: गंगा की गोद में डॉल्फिन की रोमांचक दुनिया, पानी से उछलना, पलक झपकते ही गायब हो जाना और फिर खेलते हुए वापस दिखना. ये खूबसूरत नजारा सुल्तानगंज से कहलगांव तक फैले 71 किलोमीटर लंबे विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य में देखने को मिलती है.

Edited By Ranjana Kumari
Published: Oct 05, 2026, 08:00 AM IST | Updated: Oct 05, 2026, 08:18 AM IST
Image Credit: विश्व डॉल्फिन दिवस (AI Generated Image)
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आज विश्व डॉल्फिन दिवस है. इस खास दिन पर बात भागलपुर की उस पहचान की, जहां गंगा की लहरों के बीच देश की राष्ट्रीय जलीय जीव गंगेटिक डॉल्फिन अठखेलियां करती नजर आती हैं. सुल्तानगंज से कहलगांव तक गंगा के करीब 71 किलोमीटर के हिस्से में फैले विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन अभयारण्य में करीब 207 डॉल्फिन मौजूद हैं. गंगा की धाराओं में छलांग लगाती और पानी में खेलती डॉल्फिन यहां आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं. भागलपुर का ये इलाका डॉल्फिन के संरक्षण और उनके खूबसूरत संसार को करीब से देखने का अनोखा ठिकाना बन चुका है.

डॉल्फिन की छलांग और पलभर में गायब होना
गंगा की लहरों के बीच अचानक पानी से निकलती डॉल्फिन की छलांग और फिर पलभर में पानी के अंदर गायब होती उनकी अठखेलियां, भागलपुर में गंगा का ये नजारा लोगों को अपनी ओर खींचता है. गंगा में डॉल्फिन की मौजूदगी यहां के समृद्ध जलीय पर्यावरण और जैव विविधता का संकेत है. 2018 में भागलपुर में डॉल्फिन की संख्या 188 दर्ज की गई थी, जो 2021 की रिसर्च में बढ़कर 207 पहुंच गई. हालांकि, 2021- 22 के बाद से डॉल्फिन की संख्या में बढ़ोतरी का आंकड़ा सामने नहीं आया है.

हर 2 से 5 मिनट में दिखती है डॉल्फिन
बिहार टूरिज्म डिपार्टमेंट और वन विभाग की टीम डॉल्फिन के संरक्षण को लेकर पहल करते रहती है, लेकिन गंगा में लगातार बढ़े गतिविधियों से भी डॉल्फिन पर असर पड़ा है. बावजूद इसके, डॉल्फिन की उछल कूद नजर आते रहती है. भागलपुर के माणिक सरकार घाट कहलगांव के तीन पहाड़ के समीप और सुल्तानगंज में पर्यावरण प्रेमी डॉल्फिन के उछल कूद और अठखेलियां अपने कैमरे में कैद करते हैं.  

गंगा में डॉल्फिन हर 2 से 5 मिनट में सतह पर आती है, जो एक मनमोहक नजारा होता है. DFO आशुतोष राज ने बताया कि अलग-अलग स्रोतों के अनुसार, अभी डॉल्फिन की संख्या 200 से ज्यादा होने का अनुमान है. हालांकि, फरवरी में वाइल्डलाइफ टीम के सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद ही नए आंकड़े मिल पाएंगे.

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इस अभयारण्य का सबसे खूबसूरत नजारा
डॉल्फिन व्यू-पॉइंट और वॉच-टावर के लिए एक प्रस्ताव दिया गया था और उस पर काम भी चल रहा है, लेकिन अभी यह प्रोजेक्ट रुका हुआ है क्योंकि इसके लिए कोई सही जगह नहीं मिल पाई है. गंगा की लहरों के बीच डॉल्फिन का उछलना और फिर वापस पानी में गायब हो जाना, इस अभयारण्य का सबसे खूबसूरत नजारा है. 

गंगा के भागलपुर वाले हिस्से में डॉल्फिन की ये चंचल हरकतें सिर्फ एक आकर्षण नहीं हैं, वे एक अनमोल विरासत हैं. गंगा के बहाव और डॉल्फिन की इस शानदार दुनिया को बचाए रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी उनके उछलने और चंचल अठखेलियों को देख सकें.

रिपोर्ट: अश्वनी कुमार

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रंजना कुमारी Zee Bihar Jharkhand की डिजिटल टीम में बतौर Sub-Editor अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. बिहार के सिवान जिले के जीरादेई से ताल्लुक रखने वाली रंजना स्थानीय और जमीनी मुद्दों पर गहरी पकड़ रखती हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वे मुख्य रूप से राजनीति, क्राइम, यूटिलिटी और देश-दुनिया की अहम रूटीन खबरों को प्रमुखता से कवर करती हैं. Zee Media का हिस्सा बनने से पहले रंजना ने न्यूज इंडिया 24x7 में भी डेढ़ साल तक अपनी सेवाएं दी थीं. एकेडमिक की बात करें तो रंजना GJU से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं.
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