बिहार में एक और पार्टी की तैयारी! अनंत सिंह के ऐलान से बदलेगा सियासी समीकरण?
2010 के बाद से अब तक बिहार में 12 सक्रिय राजनीतिक दल बनाए गए हैं, जो चुनावों में भाग लेते रहे हैं. अब अनंत सिंह अगर नई पार्टी बनाते हैं तो इसका सबसे अधिक नुकसान एनडीए को होने वाला है, क्योंकि अनंत सिंह भूमिहारों के नेता बनकर उभर सकते हैं और यह भाजपा का कोर वोट बैंक है.
बिहार विधान परिषद चुनाव में जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह को समर्थन देने और आलाकमान के खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी को लेकर अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड से निकाल दिया गया है. पार्टी से निकाले जाने के बाद अनंत सिंह ने कहा है कि इससे उनको कोई दिक्कत नहीं है. अनंत सिंह ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार ही पार्टी थे. जब वे ही खत्म हो गए तो पार्टी भी खत्म हो गई है. इसके साथ ही अनंत सिंह ने अपनी पार्टी बनाने का भी ऐलान कर दिया है. अनंत सिंह ने यह भी कहा कि चाहे वे किसी भी पार्टी में रहें, लेकिन नीतीश कुमार की कभी बुराई नहीं करेंगे. अनंत सिंह के बयानों से साफ है कि बिहार की राजनीति में एक और पार्टी का जन्म होने वाला है.
2010 से लेकर अब तक की बात करें तो लगभग 12 नए राजनीतिक दलों का बिहार की राजनीति में उदय हुआ है. कुछ दलों का विलय भी हुआ है. जैसे राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का 2021 में जनता दल यूनाइटेड में विलय हुआ था, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा को जेडीयू लंबे समय तक रास नहीं आई और वे एक बार फिर पार्टी से बाहर जाकर राष्ट्रीय लोक मोर्चा नाम की पार्टी बना बैठे. एक ऐसा केस भी है, जब एक पार्टी दो हिस्सों में बंट गई. यह मामला चिराग पासवान वाले लोक जनशक्ति पार्टी का था. लोक जनशक्ति पार्टी का अस्तित्व खत्म हो गया और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी का जन्म हुआ.
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राष्ट्रीय लोक समता पार्टी
2013 में इस पार्टी का गठन हुआ था. जनता दल यूनाइटेड के नेता उपेंद्र कुशवाहा का तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच मतभेद पैदा होने के बाद वे पार्टी छोड़कर अलग दल बना बैठे थे. 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने एनडीए के बैनर तले चुनाव लड़ा और केंद्र में मंत्री भी रहे थे. 2019 में उन्होंने एनडीए छोड़ दिया था और हार गए थे. बाद में उन्होंने अपनी पार्टी का जनता दल यूनाइटेड में विलय कर लिया था और कुछ समय बाद ही उन्होंने फिर से नाराज होकर राष्ट्रीय लोक मोर्चा नाम से नई पार्टी बना ली थी.
हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर)
2015 में नीतीश कुमार और तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बीच मतभेद पैदा हो गया. जीतन राम मांझी पर आरोप था कि उन्होंने पार्टी आलाकमान की बात नहीं मानी और नीतीश कुमार के फिर से बिहार के मुख्यमंत्री पद पर आसीन होने के लिए अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया था. इसके बाद मांझी को पार्टी से निकाल दिया गया. बाद में, मांझी ने हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) नाम से नई पार्टी बना ली थी.
जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक)
2015 में ही पप्पू यादव ने जन अधिकार पार्टी बनाई थी. बाद में पप्पू यादव ने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने की घोषणा कर दी, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी का सदस्य नहीं बनाया. पप्पू यादव आज भी कांग्रेस के झंडाबरदार हैं, लेकिन पार्टी के सदस्य भर नहीं हैं.
विकासशील इंसान पार्टी
2018 में मुकेश सहनी ने विकासशील इंसान पार्टी बनाई थी. 2020 में एनडीए के बैनर तले चुनाव लड़ने के कारण इस पार्टी के 4 विधायक भी चुनकर आए थे. बाद में भारतीय जनता पार्टी से खटपट होने के बाद मुकेश सहनी ने एनडीए से नाता तोड़ दिया था. एक विधायक की मौत होने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा जीत गई थी. उसके बाद बाकी के तीन विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे.
प्लूरल्स पार्टी
2020 के विधानसभा चुनाव में इस पार्टी की बहुत चर्चा थी. लंदन से पढ़कर आईं पुष्पम प्रिया चौधरी ने इस पार्टी की नींव रखी थी. हालांकि, इस पार्टी ने विधानसभा चुनाव में कोई खास छाप नहीं छोड़ी और 2 सीटों से चुनाव लड़ने के बाद भी पुष्पम प्रिया चौधरी चुनाव हार गई थीं.
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी
रामविलास पासवान के निधन के बाद लोक जनशक्ति पार्टी दो धड़ों में बंट गई थी. पशुपति कुमार पारस ने पार्टी के 5 सांसदों को साथ लेकर चिराग पासवान को अलग-थलग कर दिया था. मामला चुनाव आयोग में गया था. चुनाव आयोग ने बाद में लोक जनशक्ति पार्टी का नाम और निशान फ्रीज करते हुए दोनों धड़ों को अलग अलग नाम और निशान दे दिया था. चिराग पासवान के नेतृत्व वाले धड़े का नाम लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) तो पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व वाले धड़े को राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी कहा गया.
जन सुराज पार्टी
दो साल की लंबी पदयात्रा के बाद राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने 2 अक्टूबर, 2024 को इस दल का गठन किया था. विधानसभा चुनाव, 2025 में इस पार्टी की करारी हार हुई और एक भी सीट न जीत पाई. हालांकि, 2026 में बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने जीत हासिल कर भाजपा की रणनीति की धज्जियां उड़ा दी थी. अब विधान परिषद चुनाव में भी जन सुराज पार्टी सभी 8 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.
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आप सबकी आवाज
2024 में एक और राजनीतिक दल का गठन हुआ था. जनता दल यूनाइटेड से नाराज आरसीपी सिंह ने आप सबकी आवाज नाम से पार्टी बनाई थी, लेकिन वह कोई छाप नहीं छोड़ सकी थी.
इंडियन इन्क्लूसिव पार्टी
इस पार्टी का गठन 2025 में हुआ था और आईपी गुप्ता इसके संस्थापक हैं. विधानसभा चुनाव, 2025 में इस पार्टी ने एक सीट जीती थी.
जनशक्ति जनता दल
2025 में लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने भी अपनी पार्टी बनाई थी. हालांकि विधानसभा चुनाव में तेजप्रताप यादव खुद भी जीतने में असफल रहे थे.