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बिहार में फिर 'खेला' हुआ तो फिर क्या होगा: भाई वीरेंद्र के ऑफर के बाद क्या नीतीश कुमार फिर मारेंगे पलटी, किधर जाएंगे ओवैसी?

सबसे पहले 2017, 2022 और 2024 में नीतीश कुमार पाला बदल चुके हैं. 2013 में उन्होंने पहली बार एनडीए से नाता तोड़ा था और 2014 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू अकेले मैदान में थी. 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव से हाथ मिलाकर महागठबंधन की नींव रखी थी.

Written By Sunil Mishra
Published: Sep 17, 2026, 02:16 PM IST | Updated: Sep 17, 2026, 02:28 PM IST
Image Credit: नीतीश कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष (AI Image)
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समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी पर भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के बीच तनातनी के बीच राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने नीतीश कुमार को एक बड़ा ऑफर दिया है. भाई वीरेंद्र ने कहा कि नीतीश कुमार जी! बीजेपी को लात मारिए और हमारे साथ आइए. हमलोग मिलकर सरकार बनाएंगे. हमलोग अमित शाह का एजेंडा बिहार में नहीं चलने देंगे. अब सवाल उठता है कि क्या नीतीश कुमार भाई वीरेंद्र का यह ऑफर स्वीकार करेंगे? हालांकि, बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने भाई वीरेंद्र के बयान पर कहा कि यह उनकी बात है. हमलोगों के यहां ऐसी कोई बात नहीं है. फिर भी अगर नीतीश कुमार ने अगर पलटी मारी तो बिहार के राजनीतिक समीकरण कैसे बदल जाएंगे, उस पर नजर डालते हैं. सबसे पहले जान लेते हैं कि अभी विधानसभा में किस पार्टी के कितने विधायक हैं?

बिहार में सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों का समर्थन होना जरूरी है. अभी एनडीए के पास 203 विधायकों का बंपर बहुमत है. ऐसे में सरकार कोई अभी कोई खतरा नहीं है.

लेकिन अगर नीतीश कुमार ने पलटी मारी और जनता दल यूनाइटेड एक बार फिर महागठबंधन में चला गया तो पूरा समीकरण बदल जाएगा. तब एनडीए विधायकों की संख्या 118 तक सिमटकर रह जाएगी.

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दूसरी ओर, महागठबंधन में जेडीयू के 89 विधायकों के आने के बाद उनकी संख्या 120 तक पहुंच जाएगी, जो एनडीए से 2 विधायक ज्यादा होंगे, लेकिन बहुमत किसी के पास नहीं रहेगा.

ऐसे में, महागठबंधन को सरकार बनाने के लिए एआईएमआईएम के 5 और बसपा के 1 विधायकों की जरूरत होगी. सैद्धांतिक रूप से एआईएमआईएम के लिए एनडीए के बदले महागठबंधन को समर्थन देना ज्यादा मुफीद रहेगा. 

अगर एआईएमआईएम तटस्थ रहा तो फिर उसकी पार्टी टूट भी सकती है. इससे पहले भी उसके 4 विधायकों ने पाला बदलकर राजद की सदस्यता ले ली थी.

इस तरह नीतीश कुमार के पाला बदल की स्थिति में सत्ता की चाभी असदुद्दीन ओवैसी के 5 और बसपा के एकमात्र विधायक के पास रह जाएगी.

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इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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