सोन और फल्गु नदी जोड़ी जाएगी: कब से थी जोड़ने की मांग? क्या होंगे फायदे? यहां जानिए सबकुछ
वर्षों पुरानी मांग को बिहार सरकार ने मंगलवार को पूरा कर दिया. सोन और फल्गु नदी जोड़ो परियोजना को मंजूरी दे दी. इन दोनों नदियों के जुड़ जाने से आप-पास के क्षेत्र के लोगों को काफी फायदा होगा.
मोक्ष की भूमि गयाजी, जहां पिंडदान और तर्पण की धारा युगों-युगों से आत्माओं को मुक्ति का मार्ग दिखाती आ रही है, अब एक भव्य और नव्य स्वरूप की ओर अग्रसर है. फल्गु की धारा और विष्णुपद का पावन आंगन सदियों से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और पितरों की मुक्ति का साक्षी रहा है. वहीं अब यह भव्य परिवर्तन इस पौराणिक तीर्थ को दिव्य स्वरूप देने जा रहा है. जी हां, आप एकदम सही पढ़ रहे है. सोन और फल्गु नदी जोड़ी जाएगी और इसके लिए बिहार सरकार ने 15 सितंबर, 2026 दिन मंगलवार को सोन-फल्गु नदी जोड़ो परियोजना को मंजूरी दे दी है. चलिए इस आर्टिकल में जानते हैं कि सोन और फल्गु नदी के जोड़ने से क्या फायदे होंगे? और क्या है ये परियोजना?
बिहार सरकार ने सोन-फल्गु नदी जोड़ो परियोजना की मंजूरी दे दी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य पर्यटन विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिसके अनुसार, सोन-फल्गु नदी जोड़ो परियोजना पर 996.05 करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है. 996.05 करोड़ के सोन-फल्गु रिवर लिंकिंग प्रोजेक्ट के तहत, इंद्रपुरी बैराज से लगभग 23 किलोमीटर ऊपर एक इंटेक वेल बनाने का प्रपोजल है. इनटेक वेल के जरिए, सोन नदी से जरूरी मात्रा में पानी निकाला जाएगा और लगभग 11 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए उत्तर कोयल मेन कैनाल तक पहुंचाया जाएगा, जो लगभग 32.77 किलोमीटर दूर है.
सम्राट चोधरी कैबिनेट ने बिहार वॉटर सोर्स रेस्टोरेशन एंड सिल्ट मैनेजमेंट पॉलिसी, 2026 को भी मंजूरी दी, ताकि पानी की जगहों से जमा गाद हटाई जा सके, पानी के स्ट्रक्चर की कैपेसिटी को ठीक किया जा सके. प्रोजेक्ट्स में जरूरी मिट्टी भरने और कंस्ट्रक्शन के कामों के लिए नदियों, बैराज, जलाशयों और दूसरी पानी की जगहों से गाद का इस्तेमाल किया जा सके.
क्या है ये नदी जोड़ो परियोजना, जानिए
भारत सरकार की एक योजना है नदी जोड़ो परियोजना, जिसका उद्देश्य देश की अधिक पानी वाली नदियों को कम पानी या सूखे से प्रभावित नदियों से नहरों और जलाशयों के जाल के जरिए से जोड़ना है. इस परियोजना से जिन इलाकों में पानी की भारी कमी होती है, उसे दूर करना है. वहां सिंचाई और पीने का पानी पहुंचाना. इसी योजना के तहता सोन और फल्गु नदी को जोड़ा जा रहा है.
कब से थी सोन और फल्गु नदी को जोड़ने की मांग?
बिहार में सोन और फल्गु नदी को जोड़ने की मांग काफी वर्षों से चली आ रही थी. हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संरक्षक जीतन राम मंझी का ये चुनावी वादा भी था कि वह सोन का जल फल्गु नदी में परियोजना के तहत ले आएंगे. लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान गया संसदीय क्षेत्र की जनता से उन्होंने यह वादा किया था. अब यह वादा पूरा होने जा रहा है. बिहार सरकार ने सोन और फल्गु नदी परियोजना को मंजूरी दे दी है.
सोन और फल्गु नदी के जोड़ने से क्या फायदे होंगे?
बिहार के सूखाग्रस्त इलाकों की तस्वीर बदलने के लिए सोन-फल्गु नदी जोड़ परियोजना एक गेमचेंजर मानी जा रही है. सोन एक बड़ी नदी है, जबकि फल्गु एक मौसमी नदी है, जो साल के अधिकांश समय सुखी रहती है. सोन नदी के पानी को नहरों के जरिए फल्गु नदी में डायवर्ट करने की इस योजना से गया, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल जिलों को मुख्य फायदा मिलेगा.
गया और आसपास जल संकट से मुक्ति
फल्गु नदी में पूरे साल पानी का प्रवाह बना रहेगा, जिससे गया शहर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की समस्या स्थाई रूप से खत्म होगी. औरंगाबाद, गया और जहानाबाद के सूखाग्रस्त इलाकों को नहरों के जरिए पानी मिलेगा, जिससे किसान साल में दो से तीन फसलें आसानी से ले सकेंगे.
धार्मिक और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा
गयाजी में पिंडदान और तर्पण के लिए देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को फल्गु नदी में साफ और बहता जल मिलेगा.