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जिंदगी का बड़ा हिस्सा जेल में काट लिए: आज गांधी जयंती पर 44 कैदियों को मिलेगी रिहाई, खुली हवा में लेंगे सांसें

बिहार सरकार ने गांधी जयंती के मौके पर जेल से 44 कैदी छोड़े जाने का फैसला किया है. रिहा होने वाले अधिकांश कैदी बुजुर्ग और लंबे समय से सजा काट रहे लोग हैं. इसमें 90 वर्ष से अधिक उम्र के कैदी भी शामिल हैं.

Written By Ranjana Kumari
Published: Oct 02, 2026, 01:14 PM IST | Updated: Oct 14, 2026, 06:51 PM IST
Image Credit: गांधी जयंती पर बिहार के जेलों से 44 कैदियों की रिहाई (AI Generated Image)
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बिहार सरकार ने गांधी जयंती (2 अक्टूबर, 2026) के अवसर पर राज्य की विभिन्न जेलों से 44 बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार कैदियों को रिहा करने का निर्णय लिया है. यह कदम राज्य बंदी परिहार समिति (State Prisoner's Remission Committee) की अनुशंसा और गृह विभाग की आधिकारिक अधिसूचना के बाद उठाया गया है. रिहा होने वाले अधिकांश ऐसे कैदी हैं, जिन्होंने अपनी सजा का एक लंबा हिस्सा सलाखों के पीछे गुजार दिया है और अब वे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं. रिहा होने के बाद ये लोग खुली हवा में सांस ले सकेंगे.

माफी से मिला नया जीवनदान

सम्राट चौधरी सरकार की ओर से रिहा किए जाने वाले कैदियों में 90 वर्ष से अधिक उम्र के 2, 80 से 90 वर्ष की उम्र के 8 और 70 से 80 वर्ष की उम्र के 20 कैदी शामिल हैं. इनमें रोहतास जेल से 93 साल के रामबृक्ष कोइरी, मधेपुरा से योगेश्वर यादव, 84 साल के हरिवंश राम और 82 साल के रामाशीष यादव जैसे बुजुर्ग भी शामिल हैं, जिन पर गांधी जयंती के दिन सरकार की कृपा बरती है और वे सलाखों के पीछे से निकलकर आजाद जिंदगी जी सकेंगे.

2018 में भी 43 कैदियों को छोड़ा गया था

2018 में तत्कालीन नीतीश कुमार की सरकार के दौरान भी महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर 43 कैदियों को छोड़ा गया था. वहीं, अब एक बार फिर करीब 8 साल बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने भी इस पहल को दोहराया है.

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सरकार का सराहनीय कदम

कैदियों की रिहाई के साथ-साथ सम्राट सरकार ने अपराध के पीड़ितों के 1,820 परिवारों को लगभग 3.86 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने का भी प्रावधान किया है. जानकारी के अनुसार, जेल प्रशासन की देखरेख में सभी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. बिहार सरकार के इस सराहनीय पहल से बुजुर्ग और बीमार बंदियों को उनके परिवार के साथ अंतिम समय बिताने का मौका मिल सकेगा. सरकार के इस फैसले से न केवल कैदी बल्कि उनके परिवारवालों को भी सकून मिल सकेगा.

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रंजना कुमारी Zee Bihar Jharkhand की डिजिटल टीम में बतौर Sub-Editor अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. बिहार के सिवान जिले के जीरादेई से ताल्लुक रखने वाली रंजना स्थानीय और जमीनी मुद्दों पर गहरी पकड़ रखती हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वे मुख्य रूप से राजनीति, क्राइम, यूटिलिटी और देश-दुनिया की अहम रूटीन खबरों को प्रमुखता से कवर करती हैं. Zee Media का हिस्सा बनने से पहले रंजना ने न्यूज इंडिया 24x7 में भी डेढ़ साल तक अपनी सेवाएं दी थीं. एकेडमिक की बात करें तो रंजना GJU से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं.
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