नेपाली महिलाएं, फर्जी आधार और बैंक मैनेजर का खेल: मोतिहारी में भारत-नेपाल बॉर्डर पर बड़े लोन स्कैम का भंडाफोड़
नेपाली महिलाओं के भारतीय दस्तावेज बनाकर फिर समूह बनाकर मोतिहारी में लोन देने के खेल का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. पुलिस ने बताया कि इस स्कैम में बैंक भी शामिल है. इसका नेटवर्क उत्तराखंड से पश्चिम बंगाल तक जुड़ा है.
आप और हम जब लोन लेने बैंक जाते हैं तो हमें कई तरह के कागजातों, जांच और पूछताछ से गुजरना पड़ता है. फिर उसके बाद भी लोन मिल ही जाएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं होती... पर मोतिहारी में एक ऐसा नेटवर्क काम कर रहा था, जो न सिर्फ लोन दिलवाने का काम करता था, बल्कि बैंक के पैसे का गबन करने का काम भी करता था. मोतिहारी में बड़े पैमाने पर बैंक के साथ ही स्कैम करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है. इस स्कैम में एजेंट से लेकर बैंक मैनेजर तक शामिल हैं. स्कैम करने वाले गिरोह का नेटवर्क उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक जुड़ा हुआ है.
कैसे होता था स्कैम?
सरकार ने ग्रामीण महिलाओं के लिए समूह बनाकर लोन देने के लिए कई छोटी-छोटी फाइनेंस बैंकों को अधिकार दिया है. इन छोटी-छोटी फाइनेंस बैंकों में जो नौकरी करते हैं, उन्हें सरकारी बैंक में नौकरी करने की अर्हता या प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता. लिहाजा, सिर्फ जान-पहचान पर नौकरी लग जाती है. ऐसे में कुछ संदिग्ध लोग भी बैंक से जुड़ जाते हैं और फिर शुरू हो जाता है स्कैम.
नेपाल से बंगाल और उत्तराखंड तक फैला हुआ है नेटवर्क
समूह लोन देने के लिए महिलाओं का एक समूह बनाना होता है, फिर उस समूह को एक लाख तक का लोन आसानी से स्मॉल फाइनेंस बैंक दे देती है. अब खेल यहीं पर होता है. आरोप है कि RBL जैसी स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अपने एजेंट और मैनेजर के माध्यम से नेपाल की महिलाओं का समूह बनाकर मोतिहारी में लोन देने का काम किया. अब तक न जाने कितनी महिलाओं को ऐसा लोन दे दिया गया होगा?
कैसे हुआ खुलासा, जानिए
नेपाली महिलाओं के फर्जी भारतीय दस्तावेज बनाकर लोन देने का खेल भारत-नेपाल बॉर्डर पर कुंडवा चैनपुर के एक सीएसपी केंद्र पर चल रहा था, जहां रोज नेपाली महिलाओं का जमावड़ा लगता था. स्थानीय लोग सीएसपी केंद्र पर लगने वाली भीड़ को सामान्य रूप से देखते थे, पर कुंडवा चैनपुर थानाध्यक्ष ने इसे संदिग्ध माना और अपने खबरी को CSP केंद्र के आसपास लगाया. खबरी ने जो सूचना कुंडवा चैनपुर थानाध्यक्ष को दी, उससे पुलिस के पांव तले जमीन खिसक गई... फिर क्या था, थानाध्यक्ष ने इसकी सूचना जिले के एसपी स्वर्ण प्रभात को दी.
आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड भी बरामद हुए
सूचना इतनी गंभीर थी कि एसपी स्वर्ण प्रभात ने बिना कोई देर किए सीएसपी केंद्र पर छापेमारी करने का निर्देश जारी किया. ऐसा इसलिए, क्योंकि इस केंद्र पर न सिर्फ बैंक से लोन दिलवाने का खेल चल रहा था, बल्कि अवैध रूप से विदेशी नागरिकों का आधार कार्ड और वोटर कार्ड भी बनाया जा रहा था. नेपाली महिलाओं के फर्जी भारतीय दस्तावेज बनाने का खेल चल रहा था, ऐसे में विदेशी घुसपैठियों के भी दस्तावेज यहां से बनाए जा सकते थे. इसलिए बॉर्डर पर चल रहे इस खेल को तुरंत खत्म करने का निर्देश मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने CSP केंद्र पर छापेमारी कर दो नेपाली महिलाओं समेत सीएसपी संचालक को गिरफ्तार कर लिया. मौके से कई दस्तावेजों सहित आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड भी बरामद हुए हैं.
कैसे बनता था आधार कार्ड और वोटर कार्ड?
नेपाली महिलाएं कुंडवा चैनपुर के सीएसपी केंद्र पर जाती थीं, जहां से पश्चिम बंगाल के पते पर आवासीय प्रमाण पत्र बनता था. उसके बाद सीएसपी संचालक उत्तराखंड के एक नेटवर्क के पास महिला की डिटेल्स भेजता था, जहां से फर्जी आधार कार्ड और वोटर कार्ड बनकर आता था. उसके बाद एजेंट के माध्यम से बैंक मैनेजर से बात होती थी और एक लाख के लोन में तीस से चालीस हजार रुपये कमीशन तय होता था. फिर उसी आधार कार्ड और वोटर कार्ड के आधार पर महिलाओं को समूह लोन मिल जाता था. यह पैसा कभी भी बैंक को वापस नहीं होना था, क्योंकि लोन लेने वाली महिला उस पते पर कभी मिलती ही नहीं थी.
नेपाल की 'पिंकी' को भारत में बना दिया 'रिंकी'
इसे इस तरह से समझिए, मान लीजिए असली महिला रिंकी है, लेकिन उसके पते पर पिंकी (नेपाली महिला) का आधार कार्ड बन जाता था. अब जब उस पते पर जांच की जाएगी, तो लोन लेने वाली पिंकी कभी वहां मिलेगी ही नहीं.
अब आगे क्या?
अब तक की जांच में फर्जी कागजातों पर लोन देने में RBL बैंक के कर्मियों की भूमिका सामने आई है. सूत्र बताते हैं कि अगर पुलिस मोतिहारी में चल रही दर्जनों स्मॉल फाइनेंस बैंकों के कागजातों को खंगालेगी, तो यह स्कैम करोड़ों में जा सकता है.
रिपोर्ट: पंकज कुमार