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बिहार की सियासत में जन सुराज यात्रा के जरिए एक नए विकल्प का दावा करने वाले प्रशांत किशोर अब खुद उसी राजनीतिक चक्रव्यूह में उलझते नजर आ रहे हैं, जिसका पीके खुद मुखर होकर विरोध करते थे. प्रशांत किशोर पर नाम बड़े और दर्शन छोटे वाली कहावत मौजूदा वक्त में सटीक बैठती दिखाई दे रही है. जी हां, एकदम सही पढ़ रहे हैं, क्योंकि प्रशांत किशोर कल तक बिहार के बाहुबलियों और अपराध-राजनीति के गठजोड़ पर तीखे हमले करते थे, आज वही मोकामा के छोटे सरकार यानी अनंत सिंह जैसे बाहुबली के साथ को भी अपनी चुनावी बिसात पर स्वीकार कर रहे हैं.
प्रशांत किशोर का सबसे बड़ा दावा
जन सुराज की नींव रखते समय प्रशांत किशोर का सबसे बड़ा दावा था कि वे आरजेडी, जेडीयू और बीजेपी से अलग हैं. अपनी पदयात्राओं और प्रेस कॉन्फ्रेंसों में वे बार-बार कहते थे कि बिहार के पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण बाहुबल, जातिवाद और भ्रष्टाचार है. जन सुराज किसी भी दागी या बाहुबली चेहरे को तवज्जो नहीं देगा.
छोटे सरकार अनंत सिंह और सियासी मजबूरी!
बिहार विधान परिषद के चुनाव में जब राजनीतिक समीकरण सामने आया, तो प्रशांत किशोर के सुर बदलते दिखाई दे रहे हैं. दरअसल, अनंत सिंह का रसूख और वोट बैंक किसी से छिपा नहीं है. बाहुबलियों को राजनीति से बाहर फेंकने का दम भरने वाले पीके अब स्थानीय प्रभाव को तरजीह देते नजर आ रहे हैं.
पीके के प्रत्याशी के समर्थक दुलारचंद की हत्या का आरोप अनंत सिंह पर है. आपको याद होगा कि मोकामा विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी से प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी थे और इनके समर्थन में दुलारचंद यादव प्रचार कर रहे थे. इसी दौरान अनंत सिंह और पीयूष प्रियदर्शी के काफिले का आमना-सामना हुआ था, जिसके बाद विवाद हो गया था. इसी विवाद में दुलारचंद यादव की हत्या हो गई थी.
जन सुराज के प्रत्याशी के समर्थन में अनंत सिंह
अब वही जदयू विधायक अनंत सिंह बिहार एमएलसी चुनाव में जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं. 1 अक्टूबर 2026, दिन गुरुवार को अनंत सिंह एमएलसी चुनाव के लिए अनुज सिंह के नामांकन में पहुंचे. इस दौरान जदयू विधायक ने अनुज सिंह को माला पहनाई, साथ ही समर्थकों के साथ गमछा लहराते हुए अपना समर्थन जताया.
'अनंत सिंह समर्थन में आ गए तो कोई बड़ी बात नहीं'
वहीं, जब इस पर प्रशांत किशोर से मीडिया ने सवाल किया तो उन्होंने बहुत ही नपा-तुला जवाब दिया. गुरुवार को दरभंगा पहुंचे प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में बदलाव के लिए पूरा बिहार और समाज एकजुट होकर खड़ा है. ऐसे में अगर अनंत सिंह भी जन सुराज के समर्थन में खड़े हैं, तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है.
क्या जन सुराज भी पुरानी पार्टियों की राह पर ही चल पड़ा है?
प्रशांत किशोर की आज की मौजूदा सियासी स्थिति यह दिखाती है कि बिहार की सियासत में बिना बाहुबल और रसूख के रास्ता बनाना कितना मुश्किल है. मगर, सवाल यही है कि अगर वही करना था जो पुरानी पार्टियां करती आई हैं, तो फिर जन सुराज का दावा नया कैसे हुआ?