दरभंगा में पीएम मोदी की मां को गाली तो पटना में मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी, गरमा गई बिहार की सियासत
हाल के वर्षों में भाषाई मर्यादा की दीवारें दोनों तरफ से टूटी हैं. ऐसा करने से नेताओं के व्यक्तिगत संबंध भी निचले स्तर तक पहुंच जाते हैं और देश के लिए किसी मुद्दे पर आमराय बनाने की कोशिशों को धक्का पहुंचाते हैं.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पटना के बापू सभागार में पीएम मोदी के पिता को लेकर अपशब्द बोले, जिससे बिहार से लेकर दिल्ली तक की सियासत गरमा गई है. खरगे की यह टिप्पणी दरभंगा वाली घटना के ठीक एक साल बाद आई है. करीब एक साल पहले बिहार के दरभंगा में पीएम मोदी की मां को गाली दी गई थी. तब बिहार में विधानसभा चुनाव का माहौल था और राहुल गांधी 'वोटर अधिकार यात्रा' लेकर दरभंगा पहुंचने वाले थे.
पिछले साल अगस्त 2025 में राहुल गांधी की 'वोटर अधिकार यात्रा' दरभंगा जिले के अतरबेल बिठौली चौक पर पहुंचने वाली थी. वहां राहुल गांधी के स्वागत के लिए एक मंच बनाया गया था. उसी मंच से पीएम मोदी और उनकी दिवंगत मां के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था. इसका वीडियो भी वायरल हुआ था. पीएम मोदी ने 2 सितंबर, 2025 को इस पर अपनी पीड़ा भी जाहिर की थी.
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करीब एक साल बाद अब पार्टी के सर्वेसर्वा मल्लिकार्जुन खरगे ने वहीं गलती दोहरा दी है. 25 अक्टूबर को पटना के बापू सभागार में बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में खरगे की टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. दरअसल, दर्शक दीर्घा से एक कांग्रेसी कार्यकर्ता की टिप्पणी पर खरगे ने कहा, मोदी का बाप भी जाएगा. इस दौरान खरगे तिलमिलाए हुए भी लग रहे थे.
पटना और दरभंगा की घटनाओं में अंतर केवल इस बात का है कि दरभंगा में कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी की मां को अपशब्द कहे थे, लेकिन पटना में यह काम खुद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कर दिया. इससे यह सवाल तो बनता है कि देश की सबसे बड़ी पुरानी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह स्तरहीन बयान क्यों दिया.
सरकार से सवाल पूछना, चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना, मतदाता सूची और सरकार की नीतियों पर प्रश्नचिह्न खड़े करना चाहिए, लेकिन उसके लिए मर्यादा की दीवार नहीं लांघनी चाहिए. कांग्रेस नेताओं को सोचना चाहिए कि पीएम मोदी पर व्यक्तिगत हमले से वे आज तक कुछ नहीं हासिल कर पाए हैं. इसमें सोनिया गांधी, मणिशंकर अय्यर, सलमान खुर्शीद आदि की बदजुबानियों को ले लिया जाए तो फेहरिस्त बहुत लंबी हो जाती है. किसी पर भी व्यक्तिगत टिप्पणी करने से समाज के लिए मौजूं सवाल पीछे छूट जाते हैं.