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गैंगस्टर वाले संगठित अपराध को खत्म करने के लिए अमेरिका में FBI अभियान चला रही है. वहीं, भारत में गैंग के साथ-साथ भ्रष्टाचार वाले संगठित अपराध के खिलाफ भी अभियान चल रहा है. सरकारी कुर्सी पर बैठकर भ्रष्टाचार करना... यह भी एक संगठित अपराध है, जिसका विश्लेषण अब हम करने वाले हैं. इस क्राइम सिंडिकेट के सरगना सरकारी सिस्टम में घुसकर आर्थिक अपराध का नेटवर्क चला रहे थे. पटना के एडीएम (सप्लाई) रवींद्र कुमार दिवाकर और दानापुर में सब-रजिस्ट्रार के पद पर तैनात उनकी पत्नी कुमारी स्वीटी ऐसे ही अधिकारी हैं. इनके ठिकानों पर छापेमारी हुई.
नोटों की गड्डियां, महंगी घड़ियां, संपत्ति के दस्तावेज
छापेमारी में धन-दौलत-वैभव का जो सामान मिला, उसे देखकर अधिकारी आश्चर्यलोक में पहुंच गए. पति-पत्नी ने ऑर्गेनाइज्ड क्राइम सिंडिकेट की तरह रिश्वत का सिंडिकेट बनाया था. हर काम के लिए रेट लिस्ट फिक्स थी. ये सिर्फ दो अफसर नहीं हैं, सिस्टम को भ्रष्ट करने वाले वायरस हैं. पढ़कर आपको भरोसा नहीं होगा. दरअसल, विजिलेंस विभाग की टीम ने इतना नोट एडीएम रवींद्र कुमार दिवाकर के बिस्तर के नीचे से बरामद किए. जिस बेड पर एडीएम साहब सोते थे, उसके नीचे उन्होंने नोटों की गड्डियां बिछा रखी थी. नोटों की गर्मी उन्हें शायद आरामदायक नींद देती होगी. इस नींद में वे और धनवान बनने का स्वप्न देखते होंगे. सोचिए, यह कितना घृणित शौक और कितनी वीभत्स विलासिता है!
प्रसिद्ध लेखक श्रीलाल शुक्ल ने अपनी कालजयी रचना राग दरबारी में लिखा है कि सरकारी दफ्तरों में कानून वह कागज है जो बिना नोट के वजन के उड़ जाता है. यहां ईमानदारी एक बीमारी है और रिश्वत उसका इलाज. सरकारी नौकरी को धनलोभ की पूर्ति करने वाली कामधेनु समझने वाले करप्ट कपल ने कितने साल में रिश्वतलोक का साम्राज्य बनाया, हम विस्तार से बताएंगे, लेकिन पहले बताते हैं कि बेड में छिपे धन का खुलासा कैसे हुआ.
विजिलेंस विभाग की टीम ने रवींद्र कुमार दिवाकर और कुमारी स्वीटी के चार ठिकानों पर छापेमारी की. रवींद्र कुमार दिवाकर और कुमारी स्वीटी के पटना व बेगूसराय के पैतृक आवास और दफ्तर पर रेड हुई. पटना में फ्लैट से 70 लाख रुपये नकद मिले, इसमें 500 रुपये के नोटों की 100 गड्डियां थीं. बेगूसराय में पैतृक आवास से 9 लाख रुपये कैश मिले. 24 लाख रुपये के गहने पटना से और 21 लाख रुपये के गहने बेगूसराय से जब्त किए गए हैं. करीब 2 करोड़ 93 लाख रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं. कुल मिलाकर करोड़ों की धन-संपदा का सबूत हैं. यह बरामदगी सिर्फ एक ठिकाने से हुई है. दूसरे ठिकाने से नोटों की गड्डियों के साथ ही बेशकीमती घड़ियों का खजाना भी मिला.
बड़े करीने से घड़ियों को बॉक्स में सजाकर रखा गया था. ये आम घड़ियां नहीं हैं- रोलेक्स और राडो जैसे ब्रांड्स की महंगी घड़ियों का कलेक्शन है. इनकी कीमत लाखों-करोड़ों में होती है. धनलोक से एक-दो या 10-20 नहीं, कुल 48 महंगी घड़ियां मिली, सभी महंगी और ब्रांडेड. शुरुआती जांच के मुताबिक इनकी कीमत लाखों में है. कैश, ज्वैलरी और घड़ियों के कलेक्शन के साथ ही संपत्ति के दस्तावेज भी मिले हैं.
दानापुर, पटना, फुलवारीशरीफ से लेकर बेगूसराय के बलिया तक इस 'कपल ऑफ करप्शन' के प्रॉपर्टी साम्राज्य का विस्तार है. विजिलेंस विभाग की जांच के मुताबिक इन संपत्तियों की कुल कीमत करीब 2 करोड़ 93 लाख रुपये है. पटना के जिस फ्लैट में 70 लाख की नकदी मिली, उस फ्लैट की कीमत ही करोड़ों में है.
बता दें कि रवींद्र कुमार 2011 में बिहार प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए थे. पत्नी कुमारी स्वीटी 2013 में सब-रजिस्ट्रार बनी. मतलब करीब 15 साल की नौकरी में दोनों ने मिलकर करोड़ों की प्रॉपर्टी बना ली. यह संपत्ति ईमानदारी की कमाई से नहीं, प्योर रिश्वत से आई. इसीलिए जब जी न्यूज संवाददाता ने रवींद्र कुमार दिवाकर से उनका पक्ष जानने की कोशिश की, तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.
व्यंग्य के शिखर पुरुष शरद जोशी ने लिखा है कि अब भ्रष्टाचार कोई अपराध नहीं, बल्कि एक शिष्टाचार है, जो हर काम की शुरुआत में 'अभिवादन' की तरह अदा किया जाता है. शरद जोशी के लिखे हर शब्द को रवींद्र कुमार दिवाकर और कुमारी स्वीटी ने सच साबित कर दिया. रवींद्र कुमार दिवाकर की पोस्टिंग पटना में ADM सप्लाई के तौर पर है. इस पद पर रहते हुए उन्हें पटना जिले में खाद्य आपूर्ति को सुनिश्चित करना था. राशन कार्ड और PDS सिस्टम की देखरेख करनी थी. गोदाम और डीलर लाइसेंस पर फैसला करना था. LPG गैस सिलेंडर की निर्बाध सप्लाई करनी थी और जिले में पेट्रोल की सप्लाई पर नजर रखनी थी. मतलब कि पटना जिले की करीब 70 लाख आबादी और करीब 14 लाख परिवारों के घर की चीनी, चावल, सिलेंडर और गाड़ी के पेट्रोल का पूरा कंट्रोल रवींद्र कुमार दिवाकर के पास था. इसी कंट्रोल का फायदा इस धनलोभी अधिकारी ने उठाया.
कैसे फायदा उठाया, यह भी जान लीजिए
आपको याद होगा, मार्च के महीने में ईरान युद्ध के बाद होर्मुज संकट शुरू होने पर देशभर में LPG के लिए लाइन लग गई थी. एक LPG सिलेंडर के लिए आम लोग कई दिनों तक लाइन में लग रहे थे. आम उपभोक्ता को सिलेंडर मिले, इसके लिए सरकार ने कमर्शियल सिलेंडर पर कई पाबंदियां लगाई थी. रवींद्र कुमार दिवाकर ने इसे अपने निजी कोष को भरने का रास्ता बना लिया. पटना के होटलों, रेस्तरांओं और बैंक्वेट हॉलों में LPG सिलेंडर की अवैध सप्लाई की.
सोचिए, संकट के समय में आम लोगों के घर में खाना बनाने के लिए जो सिलेंडर सप्लाई होना था, वह होटल में चला गया. आम आदमी का चूल्हा उदास रहा, लेकिन होटल में खाना बन रहा था. रवींद्र कुमार दिवाकर ने करोड़ों की दौलत आम आदमी की इसी बेबसी को बेचकर बनाई है. यह सिर्फ भ्रष्टाचार का केस नहीं है, यह सामान्य कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी है.
समझिए, संकट के समय में ऐसे ही भ्रष्ट लोग माहौल को और खराब करते हैं. होटल और रेस्तरां को सिलेंडर बेचकर ऐसे ही लोगों ने गैस की बनावटी किल्लत खड़ी की. नाराज लोग अगर हंगामा करते, तो कहा जाता कि LPG संकट के कारण हंगामा हो रहा है. इस बनावटी क्राइसिस के पीछे रवींद्र कुमार दिवाकर जैसे जो लालची और धनलोभी थे, उनकी पहचान शायद ही हो पाती.
प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई ने लिखा है कि रिश्वत भारतीय दफ्तरों का वह घी है, जिसके बिना फाइल का पहिया आगे नहीं सरकता. इसे अधिकारी 'सेवा-शुल्क' या 'ऊपरी कमाई' कहकर पवित्र कर लेते हैं.
होर्मुज संकट के समय आम आदमी की परेशानी बढ़ाकर... रिश्वत को सेवा-शुल्क का नाम देकर रवींद्र और स्वीटी, यानी यह 'कपल' अपने निजी कोष में कैश भर रहा था. विजिलेंस विभाग के शुरुआती अनुमान के मुताबिक करप्ट कपल ने अपनी आय से 47 प्रतिशत ज्यादा संपत्ति अर्जित की है. यह सिर्फ शुरुआती आंकड़ा है; जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, रिश्वत की कमाई का आंकड़ा और बढ़ेगा, यह तय है.
वहीं, करप्ट कपल की कुमारी स्वीटी 2013 में सरकारी नौकरी में आईं. अब तक वे तेघड़ा, हवेली खड़कपुर, सकरा में तैनात रही हैं. फिलहाल तैनाती पटना जिले के दानापुर में है. बतौर सब-रजिस्ट्रार कुमारी स्वीटी की जिम्मेदारी अपने कार्यक्षेत्र में जमीन और संपत्तियों की रजिस्ट्री की थी. इनके दफ्तर के निर्णयों और नीतियों का सीधा असर दानापुर क्षेत्र में जमीन और घर खरीदने-बेचने वाले लोगों पर पड़ता है. कुमारी स्वीटी ने रिश्वत की स्याही भरकर जो फैसला सरकारी फाइलों में लिखा है, उससे 4 लाख लोग सीधे प्रभावित हुए हैं. इस करप्ट कपल के रिश्वत लेकर किए गए निर्णयों से 74 लाख लोग सीधे प्रभावित हुए हैं.
अब आपको बताते हैं कि रिश्वतखोर दंपति के निजी कोष से जो पैसा बरामद हुआ, उससे बिहार में कितने आम लोगों की परेशानी दूर हो सकती है. हमने इस पर एक रिसर्च किया. बहुत ध्यान से ये आंकड़े देखिए और समझिए. भारत सरकार के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 में बिहार के ग्रामीण इलाके में रहने वाला एक व्यक्ति हर महीने 3 हजार 670 रुपये खर्च करता है. रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी क्षेत्र में हर नागरिक एक महीने में 5 हजार 80 रुपये खर्च करता है.
अब समझिए, अगर किसी परिवार में 4 सदस्य हुए, तो ग्रामीण इलाकों में परिवार का एक साल का औसत खर्च 1 लाख 76 हजार रुपये हुआ. शहरी इलाके में यह खर्च 2 लाख 43 हजार रुपये सालाना होता है. करप्ट कपल के ठिकानों से 79 लाख रुपये कैश मिला है. अगर यह रकम सही तरीके से खर्च की जाए, तो इतने पैसे में गांव के चार सदस्यों वाले 45 परिवार पूरे एक साल अपना खर्च चला सकते हैं. यह रकम शहर में चार सदस्यों वाले 32 परिवारों के पूरे साल के खर्च के बराबर है. इतना ही नहीं, बिहार में प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 76 हजार 490 रुपये है. यानी बिहार का एक नागरिक सालभर में 76 हजार 490 रुपये की संपत्ति बनाता है. 79 लाख रुपये बिहार के 103 आम नागरिकों द्वारा सालभर में अर्जित की गई संपत्ति के बराबर हैं.
सोचिए, सिर्फ दो भ्रष्ट अधिकारियों की काली कमाई से बिहार में सैकड़ों लोगों का कल्याण हो सकता है. यह सिर्फ एक अनुमान है. अगर सिस्टम से भ्रष्टाचार का दीमक खत्म हो जाए, तो आम लोगों की परेशानी और ज्यादा कम होगी. जनकल्याण की योजनाएं आसानी से उन तक पहुंचेंगी. इसीलिए बिहार के मंत्री रामकृपाल यादव कह रहे हैं कि भ्रष्ट अफसरों पर सख्त कार्रवाई होगी.
नोटों की गड्डियां, महंगी घड़ियां, संपत्ति के दस्तावेज
बिहार विजिलेंस विभाग के मुताबिक भ्रष्टाचार के मामले में राज्य का राजस्व विभाग पहले नंबर पर है, दूसरे नंबर पर पुलिस और ग्रामीण विकास विभाग हैं, जबकि शिक्षा विभाग तीसरे नंबर पर है. देश में हर साल करोड़ों रुपये सरकारी खजाने और आम आदमी की जेब से निकलकर रिश्वतखोर अधिकारियों के प्राइवेट कोषागार में चले जाते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश की GDP यानी सालाना कमाई का डेढ़ प्रतिशत हिस्सा रिश्वत में चला जाता है. जानते हैं यह रकम कितनी बड़ी है? यह रकम करीब साढ़े चार लाख करोड़ रुपये होती है! रकम इतनी बड़ी है कि ग्रामीण इलाकों के करीब साढ़े चार करोड़ परिवारों को आवास सहायता दी जा सकती थी, उनके घर बनाए जा सकते थे.
इसलिए जरूरी है कि सरकारी सिस्टम में छेद कर भ्रष्टाचार का संगठित नेटवर्क चलाने वाले अधिकारियों पर सख्ती हो. सिर्फ उन्हें सजा न मिले, उनकी संपत्ति भी जब्त की जाए. रवींद्र कुमार दिवाकर और स्वीटी कुमारी जैसे सरकारी अधिकारी सालों से रिश्वत ले रहे थे, लेकिन आज पकड़े गए. ऐसे न जाने कितने अफसर और बाबू होंगे. जो सरकारी कुर्सी पर बैठकर रवींद्र कुमार और स्वीटी कुमारी की तरह रिश्वत का कैश ले रहे होंगे. ऐसे अधिकारियों को भी सतर्क हो जाना चाहिए और भ्रष्टाचार से दो गज की दूरी बना लेनी चाहिए.