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रोजाना 10 तो साल में 3624 लोगों की बिहार में डूबने से होती है मौत: एनसीआरबी 2024 की रिपोर्ट

बिहार में नाव हादसे की खबरें आए दिन आती रहती हैं. इन हादसों में रोजाना करीब 10 लोगों अपनी जान गंवाते हैं. कुल मिलाकर देखा जाए तो बिहार में सालभर में 3624 लोगों की डूबने से मौत होती है. इनमें 2829 पुरुष और 795 औरतें शामिल हैं.

Written By Shailendra
Published: Oct 14, 2026, 09:23 PM IST | Updated: Oct 15, 2026, 04:44 PM IST
Image Credit: बिहार में नाव हादसे: कारण, आंकड़े और सुरक्षा उपाय को जानिए (Photo-AI)
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वैशाली के राघोपुर में गंगा नदी में एक नाव पलटने से 13 मासूम बच्चों की डूबकर मौत हो गई. इस हादसे से पूरा बिहार सहम गया. हर किसी की आंखें नम...दिल में गम और चेहर पर प्रशासन की लापरवाही को लेकर आक्रोश नजर आ रहा है. यह नजारा बिहार में हर दिन देखने को मिलता है! क्योंकि राज्य में रोजाना 10 तो साल में 3624 लोगों की डूबने से मौत होती है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं. ये एनसीआरबी 2024 की रिपोर्ट के आंकड़े खुद बयां कर रहे हैं. हालांकि, बिहार नाव हादसों में तीसरे नंबर पर है.

एनसीआरबी 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, नाव हादसों के मामले में बिहार देश में तीसरे नंबर पर है. पहले नंबर पर महाराष्ट्र है, जहां 5,151 लोगों की मौत, तो दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश है, यहां 5,094 और उत्तर प्रदेश 3,195 मौतें के साथ चौथे नंबर पर है. चलिए इस आर्टिकल में जानते हैं कि बिहार के नाव हादसों के कारण, आंकड़े और सुरक्षा उपाय बारे में सबकुछ.

वैशाली जिले के राघोपुर की यह घटना कोई अपवाद नहीं है. इससे पहले भी खगड़िया के दुधैला में क्षमता से अधिक यात्रियों को ले जा रही नाव डूबने से 24 लोगों की जान चली गई थी.

हादसों की मुख्य वजह

दरअसल, कई घाटों पर वर्षों पुरानी, बिना मरम्मत की गई और पेंदे में छेद वाली नावों का खुलेआम संचालन होता है. क्षमता से अधिक सवारी यानी ओवरलोडिंग की जाती है. दरअसल, निर्धारित क्षमता की अनदेखी कर नावों में क्षमता से दोगुने-तिगुने यात्री और सामान लाद दिया जाता है. वहीं, अंधेरा होने के बाद, तेज हवा, बारिश या उफनती नदी के दौरान भी नियमों को ताक पर रखकर नावें चलाई जाती हैं.

सुरक्षा उपकरणों का अभाव

अधिकतर नावों पर लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, रस्से या प्राथमिक उपचार किट जैसी बुनियादी चीजें मौजूद नहीं होतीं. बिना लाइसेंस और अनुभव वाले चालकों, यहाँ तक कि नाबालिगों की ओर से नाव चलाने से आपात स्थिति में नाव का संतुलन बिगड़ जाता है, जो हादसों की वजह बनता है.

प्रशासनिक निर्देश और नियम

बिहार मॉडल फेरी रूल्स-2011 का पालन करना जरुरी है. सभी नावों का एमवीआई (MVI) की ओर से निरीक्षण, क्षमता निर्धारण और पंजीकरण अनिवार्य है. रात में नौका संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध और अवैध घाटों को चिन्हि्त कर सील करना है. प्रमुख घाटों पर मजिस्ट्रेट, पुलिस बल, SDRF/NDRF के गोताखोरों और कंट्रोल रूम की व्यवस्था करना. इतना ही नहीं, बिना पंजीकरण, ओवरलोडेड या नियम तोड़ने वाली नावों को जब्त करना और संचालकों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करना अनिवार्य है.

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यात्रियों के लिए आवश्यक सावधानियां

केवल उसी नाव पर सवार हों जिस पर पंजीकरण संख्या और क्षमता दर्शाने वाली सफेद पट्टी साफ दिख रही हो. अगर नाव की सफेद पट्टी पानी में डूब चुकी हो, नाव जर्जर दिखे या सूरज ढल चुका हो, तो यात्रा तुरंत रद्द कर दें. यात्रा के दौरान हमेशा लाइफ जैकेट पहनें और नाव में शांत बैठकर नाविक के निर्देशों का पालन करें. वहीं, तेज हवा, बारिश या उफनती नदी के समय यात्रा न करें और बच्चों को अकेले नाव से न जाने दें.

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शैलेंद्र जी न्यूज के रीजनल चैनल, जी बिहार झारखंड की डिजिटल टीम में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम करते हैं. वह बिहार और झारखंड की सियासत और क्राइम समेत कई समसामयिक मुद्दों पर न्यूज लिखते हैं. वह कभी-कभी राष्ट्रीय मुद्दों पर भी लिखते हैं. उनको मीडिया के तीनों प्रारूप प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल में काम करने का अनुभव. जनसंदेश टाइम्स, स्वतंत्र चेतना, टीवी 100, साधना न्यूज, एफएम न्यूज आदि न्यूज चैनलों से होते हुए न्यूज नेशन, इंडिया अहेड, ईटीवी भारत और न्यूज स्ट्रीट मीडिया (NYOOOZ) में अहम जिम्मेदारी निभाई. मीडिया जगत में सफर पिछले 12 सालों से बिना रुके जारी है.
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