App

कौशिकी डेयरी से कोसी में श्वेत क्रांति: 49 हजार महिलाओं की बदली जिंदगी, कारोबार ₹145 करोड़ के पार

कौशिकी महिला दुग्ध उत्पादन कंपनी से जुड़ने के महिलाओं को दुध बेचने की समस्या खत्म हो गई है. अभी तक लगभग 49 हजार से अधिक महिलाएं इस कंपनी से जुड़ कर अपना रोजगार आगे बढ़ा रही है.

कौशिकी डेयरी से कोसी में श्वेत क्रांति: 49 हजार महिलाओं की बदली जिंदगी, कारोबार ₹145 करोड़ के पार
Image Credit: कौशिकी डेयरी से कोसी में श्वेत क्रांति

सहरसा की रहने वाली सुनीता देवी बताती हैं कि पहले दूध बेचने के लिए घर-घर जाना पड़ता था. इस कौशिकी महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी से जुड़ने के बाद सारी समस्याएं दूर हो गईं. यह कंपनी दूध संग्रह के साथ-साथ कृत्रिम गर्भाधान, संतुलित पशु आहार, मिनरल मिश्रण और हरे चारे जैसी सुविधाएं भी सदस्यों को उपलब्ध करा रही है. वहीं, सुपौल जिले की रहने वाली आशा देवी पहले दो गाय पालती थीं, लेकिन अब उनके पास तीन गाय हैं. आशा देवी बताती हैं कि बस गायों की अच्छी देखभाल करनी है. दूध बेचने की चिंता नहीं रहती. पति बाहर रहते हैं, फिर भी मुझे किसी तरह की चिंता नहीं होती.

कौशिकी दुग्ध उत्पादक कंपनी रोजगार का एक महत्वपूर्ण माध्यम

सुनीता और आशा की कहानी से बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण और सामूहिक उद्यमिता की नई मिसाल देखने को मिल रही है. सहरसा स्थित कौशिकी महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी लिमिटेड कोसी और आसपास के क्षेत्रों की ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आय का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है. बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) द्वारा पोषित इस कंपनी से जुड़कर 49 हजार से अधिक महिलाएं दुग्ध व्यवसाय के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं. इससे महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है. साथ ही, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है.

कौशिकी महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी लिमिटेड की स्थापना 22 सितंबर 2017 को हुई थी. कंपनी ने अक्टूबर 2018 में व्यावसायिक कामकाज शुरू किया. इसके बाद से कंपनी के कारोबार और सदस्य संख्या में लगातार वृद्धि हुई है. आज कंपनी का नेटवर्क सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, खगड़िया और मुंगेर के ग्रामीण क्षेत्रों तक फैल चुका है. इससे जुड़ी महिलाएं संगठित रूप से दूध उत्पादन और आपूर्ति के काम में भागीदारी निभा रही हैं.

सालाना कारोबार ₹145 करोड़ के पार

कौशिकी महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी की वित्तीय प्रगति उसके लगातार बढ़ते कारोबार को दर्शाती है. वित्तीय वर्ष 2019-20 में कंपनी का सालाना कारोबार 16.54 करोड़ रुपये था, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 145.01 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया. इस दौरान कंपनी के कारोबार में लगभग 8.8 गुना वृद्धि दर्ज की गई. वहीं, चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती महीनों में ही कंपनी का कारोबार 74.81 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. कंपनी से जुड़ी दुग्ध उत्पादक महिलाओं को किए जाने वाले सीधे भुगतान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. वित्तीय वर्ष 2019-20 में महिलाओं को 14.38 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था. वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह राशि बढ़कर 113.10 करोड़ रुपये हो गई. इस तरह महिलाओं को किए जाने वाले सीधे भुगतान में लगभग आठ गुना वृद्धि दर्ज की गई है. इससे दुग्ध व्यवसाय से जुड़ी महिलाओं को नियमित आय प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है.

पांच जिलों में फैला संगठित नेटवर्क

बिहार जीविका और एनडीडीबी (NDDB) डेयरी सर्विसेज के तकनीकी सहयोग से संचालित यह कंपनी अब पांच जिलों में काम कर रही है. पहले कंपनी की गतिविधियां सहरसा, सुपौल और मधेपुरा तक सीमित थीं. अब इसका विस्तार खगड़िया और मुंगेर तक हो चुका है. कंपनी से जुड़ी महिलाओं की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है. पहले कंपनी के साथ 16,656 महिलाएं जुड़ी थीं, जबकि वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 49,344 हो गई है. इससे अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाएं संगठित दुग्ध व्यवसाय से जुड़ रही हैं.वर्तमान में कंपनी का नेटवर्क पांच जिलों के 53 प्रखंडों में फैला हुआ है. दूध संग्रह के लिए यहां 1,192 सक्रिय मिल्क प्रोक्योरमेंट पॉइंट्स और 17 बल्क मिल्क कूलर स्थापित किए गए हैं. इस व्यवस्था के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 94 हजार किलोग्राम से अधिक दूध का संग्रह किया जा रहा है.

कौशिकी महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी की सफलता बताती है कि ग्रामीण महिलाओं के छोटे-छोटे प्रयासों को जब संगठित व्यवस्था और बाजार से जोड़ा जाता है, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है. महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, कारोबार में वृद्धि और दूध संग्रह के विस्तृत नेटवर्क से कोसी क्षेत्र में संगठित दुग्ध व्यवसाय के विकास की तस्वीर सामने आती है.

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Rupak Kumar

Rupak Kumar

रुपक कुमार मिश्रा zee bihar Jharkhand की डिजिटल टीम में बतौर Sub-editor के तौर पर कार्यरत है. वे राजनीति, क्राइम, यूटिलिटी और रुटीन खबरों पर काम करते हैं. इसके अलावा, टेक्नोसिस मीडिया में इन्हें एक साल काम करने का अनुभव है. शिक्षा की बात करें तो राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी से इन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है.
Read More