बिहार के स्कूलों में शिक्षकों के लिए जींस-टीशर्ट बैन, फॉर्मल ड्रेस जरूरी, शिक्षा विभाग का बड़ा फरमान
बिहार एजुकेशन डिपार्टमेंट ने सरकारी स्कूलों में टीचरों और नॉन-टीचिंग स्टाफ के लिए फॉर्मल ड्रेस जरूरी कर दी. एडिशनल चीफ सेक्रेटरी सीके अनिल ने राज्य भर के डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर्स (DEOs) को यह निर्देश जारी किया.
बिहार के विद्यालयों में शिक्षकों के लिए औपचारिक ड्रेस अनिवार्य कर दिया गया है. शिक्षकों के जींस-टीशर्ट पहन कर विद्यालय आने पर रोक लगाई गई है. शिक्षा मंत्री की पहल पर अपर मुख्य सचिव ने निर्देश जारी किए हैं. अब बिहार के सभी विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में शालीन व्यवहार और गरिमामयी वातावरण बनाए रखना अनिवार्य होगा. शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों को शिक्षण और कार्यालय अवधि में औपचारिक परिधान पहनकर ही विद्यालय आना होगा.
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की पहल पर अपर मुख्य सचिव सी. के. अनिल ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिया है. साथ ही इसका सख्ती से पालन कराने को कहा है. सभी डीईओ को जारी पत्र में कहा गया है कि पूर्व में भी इस संबंध में निर्देश जारी किए गए थे, इसके बावजूद कई विद्यालयों में इनका पालन नहीं हो रहा है.
निर्देश के उल्लंघन पर अब अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी
उन्होंने कहा कि कुछ शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मी जींस और टी-शर्ट जैसे अनौपचारिक कपड़े पहनकर विद्यालय आ रहे हैं, लेकिन अब यह नहीं चलेगा. निर्देश के उल्लंघन पर अब अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
ड्रेस कोड, स्कूल इवेंट्स और अटेंडेंस
30 अक्टूबर दिन शुक्रवार को बिहार में स्टाफ को स्कूल कैंपस में जींस और टी-शर्ट पहनने की मनाही है. डिपार्टमेंट ने कहा कि ड्रेस कोड का मकसद डिसिप्लिन और स्कूल का अच्छा माहौल बनाए रखना है. डांस और म्यूजजिक प्रोग्राम सिर्फ एजुकेशन कैलेंडर में बताए गए खास मौकों पर ही हो सकते हैं.
डीजे और डिस्को जैसे इवेंट्स के खिलाफ कार्रवाई करने का भी निर्देश
डिपार्टमेंट ने स्कूलों को डीजे और डिस्को जैसे इवेंट्स के खिलाफ कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया. डिसिप्लिन और स्कूल का अच्छा माहौल बनाने की पहल में एजुकेशन मिनिस्टर मिथिलेश तिवारी शामिल थे.
अनियमित अटेंडेंस पर लिया जा सकता है एक्शन
डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर्स और डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर्स (DPOs) को दो दिनों के अंदर शिक्षकों के अटेंडेंस की डिटेल्ड रिपोर्ट देने को कहा गया है. डिपार्टमेंट ने ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज रोजाना की अटेंडेंस का डेटा मांगा, जिसमें मौजूद बताए गए शिक्षकों की संख्या और जिन्होंने अटेंडेंस दर्ज नहीं की थी, उनकी संख्या शामिल थी. इसने मार्क ऑन ड्यूटी ऑप्शन का इस्तेमाल करने वाले शिक्षकों के आंकड़े भी मांगे. डिपार्टमेंट ने कहा कि अनियमित अटेंडेंस पर एक्शन लिया जा सकता है.
रिपोर्ट: रजनीश