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मोक्ष भूमि गया पहुंचे विदेशी तीर्थयात्री: रूस, जर्मनी और इटली समेत 8 देशों के श्रद्धालुओं ने गया में अपने पूर्वजों की शांति के लिए किया पिंडदान

गयाजी का पितृ पक्ष मेला अंतरराष्ट्रीय हो गया है. यहां पर रूस, जर्मनी और इटली समेत कई देशों के 48 विदेशी श्रद्धालुओं ने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया. पिंडदान करने बर्लिन से दूसरी बार पहुंची एलेक्जेंड्रा ने कहा कि गया जैसा आध्यात्मिक अनुभव कहीं नहीं है.

Edited By Shailendra
Published: Oct 02, 2026, 05:42 PM IST | Updated: Oct 02, 2026, 05:50 PM IST
Image Credit: गया जी के देवघाट पर विदेशी तीर्थयात्रियों ने किया पिंडदान (Photo-AI)
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मोक्ष की भूमि के रूप में विख्यात गया में चल रहे पितृ पक्ष मेले का आकर्षण अब सात समुंदर पार तक पहुंच गया है. इस वर्ष पितृ पक्ष 2026 के पावन अवसर पर रूस, जर्मनी, इटली, स्पेन, पुर्तगाल नीदरलैंड समेत कई देशों से आए 48 विदेशी तीर्थयात्रियों ने देवघाट पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए पूरे विधि-विधान के साथ पिंडदान किया.

गया की पवित्र धरती पर विदेशी श्रद्धालुओं ने पाई आध्यात्मिक शांति
विदेशी तीर्थयात्रियों के साथ आए पुरोहित ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पावन तिथि पर विदेश से आए श्रद्धालु गया के वातावरण और यहां की व्यवस्थाओं से अत्यंत संतुष्ट हैं. उन्होंने कहा कि इटली, जर्मनी, स्पेन, पुर्तगाल और नीदरलैंड जैसे देशों से आए लोग यहां के पवित्र माहौल में आनंद की अनुभूति कर रहे हैं. सरकार और प्रशासन की ओर से सुरक्षा और सहयोग की जो व्यवस्था की गई है, उससे भी संतुष्ट हैं. पुरोहित ने कहा कि गया की यह धरती ही इतनी पवित्र और शक्तिशाली है कि यहां आकर हर किसी को आध्यात्मिक शांति मिलती है.

48 विदेशी श्रद्धालुओं ने देवघाट पर किया पिंडदान
उन्होंने बताया कि इस बार कुल 48 विदेशी श्रद्धालु पिंडदान के लिए आए हैं. एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पिंडदान कराना संभव नहीं होने के कारण उन्हें तीन समूहों में बांटा गया है. पहले दिन 22 लोगों ने, दूसरे दिन 8 लोगों ने और तीसरे दिन बाकी के लोग पिंडदान करेंगे. ये सभी श्रद्धालु अपने दिवंगत परिजनों - किसी ने अपने पति को खोया है, किसी ने अपने बच्चों को, तो किसी ने अपनी बहन या मां को - उनकी आत्मा की शांति के लिए इस मोक्ष भूमि पर आए हैं. पुरोहित ने बताया कि आने वाले समय में अफ्रीका से भी श्रद्धालुओं के जत्थे के गया आने की उम्मीद है.

'मैं इस विशेष अनुभव के लिए गया आई हूं'
पिंडदान करने आई रूस की एक महिला श्रद्धालु क्सेनिया ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि मैं इस विशेष अनुभव के लिए गया आई हूं. मुझे पूरी उम्मीद है कि यह अनुष्ठान मेरे दिवंगत माता-पिता, दादी और दादाजी की आत्मा के लिए बहुत फलदायी होगा. गया में यह मेरा पहला अनुभव है और मैं पहली बार यहां आई हूं. मुझे विश्वास है कि सब कुछ बहुत अच्छा होगा.

'अलग संस्कृति फिर भी लगा अपनापन'
एक अन्य विदेशी महिला श्रद्धालु एलेक्जेंड्रा, जो जर्मनी के बर्लिन में रहती हैं, ने कहा कि गया एक बेहद पवित्र भूमि है. उन्होंने कहा कि यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है. हम देखते हैं कि यहां लोग अपनी परंपराओं का कितना सम्मान करते हैं. हमें यहां बहुत ही स्वागत और सुरक्षित महसूस हो रहा है. हम यहां आने का अवसर मिलने के लिए बहुत आभारी हैं.

मोक्ष की भूमि गया में सात समुंदर पार से पहुंचे विदेशी
एलेक्जेंड्रा ने बताया कि वह हिंदू परंपराओं के बारे में अध्ययन कर चुकी हैं और यह उनका दूसरी बार गया आना है. तीन साल पहले भी वह पिंडदान के लिए आई थीं. इस बार वह अपने साथ और भी लोगों को लेकर आई हैं, जो हिंदू परंपरा और पूर्वजों को सम्मान देने वाले इस अनुष्ठान में गहरी रुचि रखते हैं.

गया में आतिथ्य और सुरक्षा से खुश हुए विदेशी श्रद्धालु
उन्होंने कहा कि लोग समझते हैं कि पितरों को सम्मान देने से न केवल उनके जीवन में बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन में भी सकारात्मक लाभ होता है, इसलिए वे इसे करना चाहते हैं. दुनिया में बहुत से लोग हर जगह घूमते हैं, लेकिन गया की इस पवित्र भूमि पर आने का सौभाग्य बहुत कम समूहों को ही मिलता है. इसलिए हम सभी यहां आकर खुद को बहुत विशेष और धन्य महसूस कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि भले ही यह उनके लिए एक अलग संस्कृति है और शुरुआत में वे थोड़ा असहज थीं, लेकिन यहां के लोगों का व्यवहार बहुत ही अच्छा रहा. उन्होंने कहा कि यहां के लोग बहुत स्वागत करने वाले हैं, हमें देखकर मुस्कुराते हैं और उत्सुकता से सवाल पूछते हैं, इसलिए अब हम यहां बहुत सहज महसूस कर रहे हैं.

इनपुट: आईएएनएस

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शैलेंद्र जी न्यूज के रीजनल चैनल, जी बिहार झारखंड की डिजिटल टीम में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम करते हैं. वह बिहार और झारखंड की सियासत और क्राइम समेत कई समसामयिक मुद्दों पर न्यूज लिखते हैं. वह कभी-कभी राष्ट्रीय मुद्दों पर भी लिखते हैं. उनको मीडिया के तीनों प्रारूप प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल में काम करने का अनुभव. जनसंदेश टाइम्स, स्वतंत्र चेतना, टीवी 100, साधना न्यूज, एफएम न्यूज आदि न्यूज चैनलों से होते हुए न्यूज नेशन, इंडिया अहेड, ईटीवी भारत और न्यूज स्ट्रीट मीडिया (NYOOOZ) में अहम जिम्मेदारी निभाई. मीडिया जगत में सफर पिछले 12 सालों से बिना रुके जारी है.
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