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विदेशी अंशदान विनियमन (FCRA) बिल की समीक्षा के लिए संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन हो गया है. 31 सदस्यों वाली इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सांसद शामिल हैं. यह समिति FCRA बिल के अलग-अलग प्रावधानों का अध्ययन करेगी और अपनी रिपोर्ट व सुझाव सरकार को सौंपेगी. इस समिति का अध्यक्ष बिहार से बीजेपी सांसद संजय जायसवाल को बनाया गया है. भारत के इतिहास में पहली बार बिहार के किसी सांसद को किसी JPC का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.
FCRA बिल की JPC में कौन-कौन है?

इस कमेटी का क्या काम होगा?
FCRA संशोधन विधेयक 2026 के लिए बनी JPC का मुख्य काम इस कानून की हर धारा की गहन समीक्षा करना है. इसके अलावा कानून से प्रभावित होने वाले सभी हितधारकों के विचारों को सुनकर, उनकी आपत्तियों के आधार पर कानूनी विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर संसद में एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करना है. इसके अलावा अगर किसी धारा में अस्पष्टता या अत्यधिक कड़ाई पाई जाती है, तो यह कमेटी इसमें सुधार, बदलाव या नई धारा जोड़ने का सुझाव देगी. यह कमेटी विश्लेषणात्मक अध्ययनों के आधार पर अपनी सिफारिशों के साथ एक अंतिम रिपोर्ट सदन में पेश करेगी.
JPC रिपोर्ट के बाद प्रक्रिया क्या होगी?
JPC की रिपोर्ट के बाद संसद के दोनों सदनों में विधेयक पर फिर से चर्चा होती है. बता दें कि JPC की सिफारिशों को स्वीकार करने या न करने के लिए सरकार स्वतंत्र होती है. हालांकि, आमतौर पर इन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया जाता है.
अब तक कितनी JPC का गठन हो चुका है?
