दिलशाद अहमद कस्टोडियल डेथ: पुलिस और प्रशासन ने ऐसी कार्रवाई की कि परिजन को आरोप लगाने का मौका ही नहीं लगा
दिलशाद अहमद कस्टोडियल केस में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई आगे-आगे चल रही है. परिजन और विपक्षी दलों को मौका ही नहीं मिल रहा है कि वे कोई ऐसी मांग करें, जो प्रशासन नहीं कर पा रहा है.
बेतिया में दिलशाद अहमद का कस्टोडियल डेथ और उसको लेकर डीआईजी हर किशोर राय, डीएम तरनजोत सिंह और एसएसपी कुमार गौतम की कार्रवाई एक नजीर बन रही है. 13 अक्टूबर को घटी यह घटना पुलिस और सरकार के लिए गले की फांस बन गई थी, लेकिन चंपारण रेंज के डीआईजी, डीएम तरनजोत सिंह और एसएसपी कुमार गौतम ने ऐसी संवेदनशीलता दिखाई, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है.
12 अक्टूबर की रात सहोदरा थाना की पुलिस बानुछापर थाना पुलिस के साथ औरैया गांव में दिलशाद अहमद के गांव पहुंची. दिलशाद अहमद को एनडीपीएस मामले में गिरफ्तार कर सहोदरा पुलिस निकल गई. सुबह में दिलशाद अहमद के परिजनों को फोन आता है कि वह जीएमसीएच में भर्ती है. परिजन पहुंचे तो वहां उसका शव पड़ा हुआ था. दिलशाद अहमद के पिता अकबर मियां और पत्नी नगमा खातून ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाया. बेतिया पुलिस ने बताया था कि आरोपी को सहोदरा थाना पुलिस लेकर जा रही थी कि रास्ते में उसने भागने के लिए गाड़ी से छलांग लगा दी. इससे वह सड़क पर गिर गया था और उसे गंभीर चोट आई. इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया था.
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इस घटना से पुलिस और प्रशासन के हाथ पांव फुल गए थे. पुलिस से लेकर सरकार पर सवाल उठने लगे थे. अल्पसंख्यक समुदाय के युवक की पुलिस कस्टडी में मौत से जुड़ा मामला होने के कारण बेतिया से लेकर पटना तक के अधिकारियों के होश फाख्ता हो गए थे. हालांकि, चंपारण रेंज के डीआईजी हर किशोर राय, एसएसपी कुमार गौतम और डीएम तरनजोत सिंह ने परिजन और विपक्षी दलों के नेताओं से एक कदम आगे जाकर इसे कस्टोडियल डेथ मान लिया और कार्रवाई ऐसी की कि विपक्ष और परिजनों को सवाल उठाने का मौका ही नहीं मिला.
दिलशाद अहमद की मौत के बाद पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल बोर्ड बनाया गया और मजिस्ट्रेट की देखरेख में पोस्टमार्टम कराया गया. पोस्टमार्टम का वीडियोग्राफी भी करवाई गई, ताकि उस पर कोई सवाल न हो. एसएसपी कुमार गौतम ने डीएम तरनजोत सिंह को पत्र लिखकर मामले की न्यायिक जांच कराने का अनुरोध किया. इस पर डीएम तरनजोत सिंह ने बेतिया व्यवहार न्यायालय को पत्र लिखा. कोर्ट ने भी इस पर जल्द इस पर फैसला ले लिया. एसएसपी कुमार गौतम ने फौरी कार्रवाई करते हुए सहोदरा थानाध्यक्ष सहित 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया.
इसके बाद पुलिस यही पर नहीं रुकी. डीआईजी हर किशोर राय के निर्देश पर बेतिया पुलिस ने राष्ट्रीय और राजकीय मानवाधिकार आयोग को दिलशाद अहमद मौत मामले की जांच का आग्रह किया. पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी, डीआईजी और एसएसपी ने सीआईडी जांच के लिए सरकार से आग्रह किया, जिसे मानते हुए CID के एडीजी पारसनाथ के नेतृत्व में जांच टीम गठित कर दी गई.
जांच के इस पूरे प्रकरण के प्रवेक्षी पदाधिकारी डीआईजी हर किशोर राय बनाए गए हैं. डीआईजी ने खुद घटनास्थल का निरीक्षण किया, पुलिसकर्मियों से पूछताछ की और डॉक्टरों से भी बयान लिया. डीआईजी हर किशोर राय के नेतृत्व में FSL की टीम ने दिलशाद मौत मामले का सीन रीक्रिएट किया.
शायद यह पहली बार हो रहा है कि परिजन की मांग से पहले ही एक कदम आगे चलते हुए पुलिस और प्रशासन ने पहले से ही एहतियात के वो सब कदम उठाए, जो विपक्षी दलों की मांग का आधार बन सकते थे.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, दिलशाद अहमद के शरीर पर घसीटे जाने का जख्म मिला है. पुलिस का कहना है कि दिलशाद अहमद ने भागने की कोशिश में चलती गाड़ी से छलांग लगाई थी, जिससे वह सड़क पर गिर गया और काफी दूर तक घिटता चला गया. हालांकि इस मामले में अभी न्यायिक जांच, मानवाधिकार आयोग की जांच और सीआईडी की जांच के प्राथमिक निष्कर्ष आने बाकी हैं.
रिपोर्टर: धनंजय द्विवेदी