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बिहार में इस बार गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के मौके पर सूबे के पुलिस महकमे ने एक खास पहल शुरू की है. सभी 1373 थानों में चाइल्ड हेल्प डेस्क या चाइल्ड कॉर्नर की शुरुआत की गई है. यह खास पहल बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 की धारा 8 (5) एवं राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NPCCR) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जा रही है.
सभी थानों में 'बच्चों की सुरक्षा, हमारी प्राथमिकता' की भावना के साथ इस डेस्क की स्थापित की गई है. इसका मकसद किसी मामले में या किसी मदद के लिए थाना आने वाले बच्चों को एक भयमुक्त, संवेदनशील और मैत्रीपूर्ण स्थान है. यहां बच्चे बिना किसी संकोच के अपनी बात रख सकते हैं. थानों में स्थापित इन डेस्कों पर प्रदर्शित मानक बोर्ड में बच्चों को चार आश्वासन लिखित रूप से दिए गए हैं.
• बात करें- अपनी समस्या बताएं
• सुने जाएंगे- आपकी बात गोपनीय रहेगी
• मदद मिलेगी - सलाह, मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता
• आप सुरक्षित हैं- हम आपके साथ हैं
लॉक अप से अलग बनाए गए हैं ये डेस्क
प्रत्येक थाना परिसर में लॉकअप से अलग दिखने वाले स्थान पर बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (CWOP) के नेतृत्व में इस चाइल्ड डेस्क की स्थापना की गई है.
यहां लगाए गए फ्लेक्स/साइन बोर्ड पर संबंधित अधिकारियों के मोबाइल नंबर प्रदर्शित किए गए हैं. सभी संबंधित पदाधिकारी हर समय सक्रिय एवं क्रियाशील रहेंगे. किसी समस्या में पड़े या मदद के लिए आने वाले बच्चों अथवा उनके अभिभावक/परिजनों का कॉल आने पर उसी समय सहायता के लिए समुचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.
इस डेस्क की यह है खासियत
इस चाइल्ड कॉर्नर में सहायता के लिए आने वाली बालिकाओं से संवाद स्थापित करने और उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए एक योग्य महिलाकर्मी की प्रतिनियुक्ति की जाएगी. यहां प्राप्त होने वाली शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. साथ ही इन पर कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा. पुलिस उपाधीक्षक (DSP), विशेष अपराध-सह-प्रभारी, विशेष किशोर पुलिस इकाई और अन्य वरीय अधिकारियों के स्तर से उक्त पंजी (रजिस्टर) और बाल कल्याण पुलिस अधिकारी के कार्यों का नियमित देखा जाएगा.