'चौथे से दूसरे स्थान पर पहुंचे, तो क्या यह चक्रव्यूह था?' जदयू प्रत्याशी अभिषेक झा के बयानों पर बीजेपी विधायक सुनील पिंटू का तीखा जवाब
बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजे आ गए और प्रत्याशियों के हार जीत का फैसला हो गया. इस बीच बीजेपी और जदयू नेता आमने-सामने आ गए. अभिषेक झा ने एनडीए में भीतरघात का आरोप लगाया, तो बीजेपी विधायक सुनील कुमार पिंटू ने पलटवार किया.
जदयू से प्रत्याशी अभिषेक झा ने गठबंधन के साथी पर चुनाव में भीतरघात को लेकर सवाल खड़ा किया. इस पर बीजेपी विधायक सुनील पिंटू ने कहा कि यह उनकी अपनी सोच है और पूरा आरोप निराधार है. पूरा एनडीए पूरी ताकत से लगा हुआ था. पिछले चुनाव में, जो दो साल पहले हुआ था, वे चौथे स्थान पर थे और इस बार दूसरे स्थान पर आए हैं.
उन्होंने आगे कहा कि 5,000 वोट उनके गलत वोटिंग होने के कारण खारिज हुए, क्योंकि उन्होंने मतदाताओं के लिए कोई प्रशिक्षण शिविर या प्रशिक्षण वर्ग नहीं लगया था. वोटरों को यह पता नहीं था कि मतदाता सूची में क्रमांक एक के सामने एक लिखना था, जबकि किसी ने टिक लगा दिया और किसी ने कोई और निशान लगा दिया. वोटर ने यह सोचकर वोट दिया कि उसने अपना मत दे दिया है, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि ये सारे मत रिजेक्ट हो गए हैं. अगर वे 5,000 वोट उनके पक्ष में आ जाते, तो परिणाम कुछ और होता. इसलिए यह आरोप पूरी तरह निराधार है.
बीजेपी विधायक सुनील पिंटू तंज कसते हुए कहा कि अब वही बताएंगे कि उनकी महाभारत कहां चल रही थी, वे किस रणभूमि में थे और किस चक्रव्यूह में पड़े हुए थे. अगर चक्रव्यूह में फंसकर अभिमन्यु (अभिषेक झा) चौथे से दूसरे स्थान पर पहुंच गए, तो क्या वे सचमुच चक्रव्यूह में थे? अगर उन्हें ऐसा लगता है कि लोगों ने उन्हें चक्रव्यूह में फंसा दिया था, तो हम तो एनडीए के एक सिपाही हैं. वे अगली बार यह घोषणा करके चुनाव लड़ लें कि उन्हें एनडीए की मदद नहीं चाहिए, फिर वे अपने वोट देख लें! नहीं, वे बिल्कुल गलत आरोप लगा रहे हैं. पूरा एनडीए एक साथ था. हम सबने मिलकर वोट मांगा.
उन्होंने आगे कहा कि हम सभी विधायक जहां-वहां गए, खासकर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में, जहां शिक्षकों के वोटर कम और ग्रेजुएट वोटर ज्यादा थे, लेकिन कई लोग तो वोटर ही नहीं बने थे. वोटर बनने का भी नियम है कि शिक्षक नियुक्ति के तीन साल बाद ही वोटर बन सकते हैं. हम लोग जहां भी गए, वहां हमने ही समझाया कि भाई, एनडीए के दोनों उम्मीदवारों को वोट कीजिए, जिसके कारण सीतामढ़ी में सबसे ज्यादा वोटिंग उन्हें ही हुई है.
वहीं, एमएलसी बंशीधर के बीजेपी में शामिल होने की चर्चा पर उन्होंने कहा कि अब यह तो मामला... उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की है. वे निर्दलीय हैं, शायद वे चाहते होंगे कि अपने क्षेत्र का विकास और अपने कार्यकर्ताओं या मतदाताओं से किए गए वादों को कैसे पूरा किया जाए. हो सकता है इसी सिलसिले में वे मुख्यमंत्री से मिले हों. वैसे, सभी का स्वागत है. सबका स्वागत है.
रिपोर्ट: सन्नी कुमार
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