इंग्लैंड में चमकी बिहार की बेटी, मोतिहारी की स्मृति जायसवाल ने ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में दर्ज की जीत
मोतिहारी की स्मृति जायसवाल ने इंग्लैंड की ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव में जीत दर्ज की है. पवन जायसवाल की बेटी स्मृति को 2026-27 सत्र के लिए छात्र प्रतिनिधि और JCR प्रेसिडेंट चुना गया है. उनकी उपलब्धि से बिहार में खुशी का माहौल है.
बिहार के मोतिहारी की माटी का हुनर एक बार फिर सात समंदर पार इंग्लैंड की धरती पर चमका है. बिहार भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और ढाका के पूर्व विधायक पवन जायसवाल तथा पूर्वी चंपारण जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष प्रियंका जायसवाल की सुपुत्री स्मृति जायसवाल ने ब्रिटेन की नामचीन ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी (University of Bristol) के छात्र संघ चुनाव में शानदार जीत दर्ज की है. उनकी इस उपलब्धि से मोतिहारी सहित पूरे बिहार में खुशी का माहौल है.
MSC मैनेजमेंट का छात्र प्रतिनिधि चुना गया
सिकरहना अनुमंडल के ढाका प्रखंड अंतर्गत फुलवरिया गांव की निवासी स्मृति जायसवाल को इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए MSC मैनेजमेंट (इंटरनेशनल बिजनेस) पाठ्यक्रम का छात्र प्रतिनिधि (Student Representative) चुना गया है. इसके साथ ही, लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत उन्हें सेंट थॉमस स्ट्रीट की जेसीआर (Junior Common Room) के प्रेसिडेंट पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी गई है. इस भूमिका के तहत उन्हें छात्र समुदाय से जुड़े विषयों में प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा.
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पूरे इलाके में जश्न का माहौल बना हुआ है.
जैसे ही स्मृति की इस शानदार जीत की खबर उनके गृह क्षेत्र मोतिहारी पहुंची, पूरे इलाके में जश्न का माहौल बन गया. उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां उनके पिता पवन जायसवाल बिहार की राजनीति के अनुभवी खिलाड़ी माने जाते हैं, वहीं उनकी बेटी ने विदेश में अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाकर मोतिहारी ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है. उनकी सफलता को क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है.
बेटियों में काफी उत्साह देखने को मिला
ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी जैसी प्रतिष्ठित संस्था में दुनिया भर से छात्र पढ़ने आते हैं. ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर चुनाव जीतकर नेतृत्व की जिम्मेदारी हासिल करना बिहार की नई पीढ़ी की प्रतिभा और क्षमता को दर्शाता है. स्मृति की इस उपलब्धि से क्षेत्र के युवाओं और खासकर बेटियों में काफी उत्साह है. उनकी सफलता उन छात्राओं के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो शिक्षा और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़कर अपनी पहचान बनाना चाहती हैं. यह उपलब्धि बिहार की प्रतिभाओं की वैश्विक पहचान को भी रेखांकित करती है.
रिपोर्ट: पंकज कुमार