बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने दिया इस्तीफा, सियासी हलचल तेज
बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस फैसले के बाद सूबे के सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है.
बिहार की सियासत से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आई है. बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा विधान परिषद के उपसभापति को सौंप दिया है. उनके इस फैसले के बाद सूबे के सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है.
अवधेश नारायण सिंह पद छोड़ने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए वे काफी भावुक नजर आए. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बीजेपी और नीतीश कुमार के साथ अपने रिश्तों को लेकर कई दिल छू लेने वाली बातें कहीं.
अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि चार बार मुझे सभापति बनने का अवसर मिला. पार्टी ने मुझे बहुत बड़ा मौका दिया है और इसके लिए मैं आभारी हूं. मुझे किसी से कोई गिला-शिकवा नहीं है. पार्टी ने मेरे भविष्य की चिंता करते हुए ही यह निर्णय लिया है और संगठन जो भी निर्देश देगा, मैं एक अनुशासित कार्यकर्ता की तरह उसका पालन करूंगा. उन्होंने कहा कि जब वे बीजेपी के कोषाध्यक्ष थे, तब भी उन्होंने पूरी निष्ठा से काम किया था. अपनी जगह नए सभापति के रूप में रामवचन राय के आने की चर्चा पर अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि खुशी जताते हुए कहा कि इस जगह पर रामवचन राय जी आएंगे, इस बात की मुझे बेहद खुशी है.
'कर्मचारी मेरा परिवार रहे, बहाली पूरी पारदर्शिता से हुई'
अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि मैंने कर्मचारियों को हमेशा अपना परिवार माना है. आज जब मैं जा रहा हूं, तो सारे कर्मचारी भावुक हैं. मेरे कार्यकाल में जो भी बहाली हुई, वह पूरी तरह पारदर्शिता के साथ की गई. अगर मुझसे कहीं कोई गलती हुई हो तो मुझे बताएं, मैं उसमें सुधार करूंगा.
'अब गांव में घर बनवाऊंगा'
पूर्व सभापति ने अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि इतने सालों की राजनीति के बाद भी मैंने अभी तक गांव पर अपना घर नहीं बनवाया है. अब पद से मुक्त होकर थोड़ा समय मिलेगा, तो गांव के घर का काम कराऊंगा. मेरी यही कामना है कि मुझे भी जीवन में अच्छे से मोक्ष मिले.
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति व्यक्त किया आभार
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने मुझे जितना प्यार और सम्मान दिया है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता. उनके कारण ही मैंने अपने जीवन में बहुत कुछ हासिल किया है. उनके साथ मेरा संबंध सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि जीवन भर का है.
रामवचन राय की दावेदारी सबसे मजबूत!
बता दें कि अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद अब बिहार विधान परिषद के नए सभापति के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें रामवचन राय की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है.
रिपोर्ट: रुपेंद्र श्रीवास्तव