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नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हुई भारी बारिश का असर अब गंडक नदी में दिखने लगा है. वाल्मीकिनगर गंडक बराज से इस मानसून सत्र में सार्वधिक 5.43 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसके बाद गंडक का पानी अब NH-727 बेतिया-गोरखपुर इंटर स्टेट मुख्य मार्ग तक पहुंच गया है. वहीं, नारायणी गंडक नदी का पानी आधा दर्जन गावों के साथ शहर के करीब दस मोहल्लों में घुसकर तबाही मचा रहा है.

शाम तक हालात सामान्य होने की संभावना
आलम यह है कि मंगलपुर और मलकौली से लेकर कैलाशनगर, गोड़ियापट्टी, मिर्जा टोला, पुअर हाउस औऱ चखनी समेत एसपी ऑफिस, पुलिस लाइन, BRC भवन समेत कई सरकारी स्कूलों में सैलाब सितम ढा रहा है. जबकि VTR जंगल में जीव-जंतुओं में बाढ़ के कारण अफरा-तफरी मची है. हालांकि, पश्चिम चम्पारण के डीएम तरनजोत सिंह ने आज शाम तक हालात सामान्य होने के साथ पानी उतरने का दावा किया है .

नेशनल हाई वे तक आया पानी
दरअसल, नेपाल के देवघाट से कल 6.74 लाख क्यूसेक पानी का बहाव किया गया, जिसके बाद नारायणी गंडक नदी खतरे की निशान को पार कर गईं. यहीं वजह है कि अब वाल्मीकिनगर गंडक बराज से छोड़ा गया रिकॉर्ड तोड़ पानी नदी किनारे बसे इलाकों समेत दियारा के निचले हिस्सों के साथ-साथ नेशनल हाई वे की सड़क तक आ गया है.

कभी भी आवाजाही हो सकती है प्रभावित
बताया जा रहा है कि मुख्य सड़क पर पानी पहुंचने के बाद इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों और वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है. वाहनों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है. सड़क पर पानी का बहाव तेज होने से कभी भी आवाजाही प्रभावित हो सकती है. क्योंकि, वाल्मीकिनगर गंडक बराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी के बाद गंडक के जलस्तर ने परेशानी बढ़ा दी है. नदी के आसपास के निचले इलाकों में भी पानी बढ़ने की आशंका से लोग सहमे हुए हैं. लोगों का कहना है कि अपनी उम्र में इतना अधिक पानी का बहाव पहले कभी नहीं देखा है.

राहत-बचाव कार्य की गुहार लगा रहे ग्रामीण
बता दें कि गंडक नदी का जलस्तर अब घट रहा है. पानी का बहाव सुबह के 5.43 लाख क्यूसेक से घटकर 4.28 लाख क्यूसेक हो गया है. हालांकि, पिछले 24 घंटों में ग्रामीण और शहरी इलाकों में फैले पानी ने चिंता बढ़ा दी है और आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोग राहत, बचाव कार्यों और जल निकासी की गुहार लगा रहे हैं.
रिपोर्ट: इमरान अजीज