Explainer: बिहार को बाढ़ से मुक्ति दिलाने का मास्टर प्लान, गंगा की तलहटी में छिपा है बचाव का राज!
बिहार में हर साल मानसून आते ही उत्तर और मध्य बिहार के दर्जनों जिले बाढ़ की विभीषिका झेलने को मजबूर हो जाते हैं. अरबों रुपये की संपत्ति का नुकसान और लाखों लोगों का विस्थापन राज्य की नियति बन चुका है. हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों और जल संसाधन इंजीनियरों का मानना है कि इस विनाशकारी समस्या का स्थायी समाधान कहीं दूर नहीं, बल्कि गंगा नदी की तलहटी में ही छिपा हुआ है.
बिहार में गंगा, कोसी, गंडक और नारायणी समेत तकरीबन सभी नदियां इस वक्त उफान पर हैं. नदियों के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी से प्रदेश के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं. जानकारी के मुताबिक, गंगा अब तक के सबसे अधिक उफान पर है. सरकार ने राजधानी पटना, भोजपुर, भागलपुर, बक्सर, बेगूसराय, मुंगेर, समस्तीपुर, खगड़िया, सारण, कटिहार और वैशाली समेत 12 जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है. बाढ़ से इन जिलों की करीब 10 लाख की आबादी प्रभावित हुई है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में जिला प्रशासन के साथ-साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार राहत कार्य में जुटी हैं और लोगों तक भोजन, पेयजल, दवा के अलावा अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है.
हर साल हजारों रुपये खर्च करती है सरकार
बिहार में बाढ़ कोई नई मुसीबत नहीं है. हर साल गंगा, कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियां अपना रौद्र रूप दिखाती हैं और बड़ी आबादी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. सवाल यह है कि प्रदेश में हर साल बाढ़ क्यों आती है? सरकारों की ओर से इस पर कोई ठोस काम क्यों नहीं किया जाता? अगर बाढ़ से बचाव का काम होता है तो फिर इस समस्या से निजात क्यों नहीं मिलती है? एक्सपर्ट के मुताबिक, ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार इस विषय पर गंभीर नहीं है. बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई के लिए लगभग ₹11,284 करोड़ का प्रावधान किया था. वर्ष 2024-25 में करीब ₹6,594 करोड़ खर्च हुए थे. इसके अलावा केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय सहायता मिलती है.
आखिर कहां चूक हो रही है?
एक्सपर्ट के मुताबिक, गंगा की तलहटी में बिहार को बाढ़ से मुक्ति दिलाने का राज छिपा है. दरअसल, राज्य की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि करीब 73 फीसदी क्षेत्र बाढ़ के खतरे से जूझता रहता है. CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, हिमालय से निकलने वाली अधिकांश नदियां बिहार के मैदानी इलाके से गुजरती हैं, जिनकी वजह से ही हर साल बाढ़ आती है. बिहार की समस्या यह है कि गंगा, गंडक, कोसी और अन्य नदियां सिर्फ पानी नहीं लाती, अपने साथ मिट्टी और गाद भी लाती हैं. CAG की रिपोर्ट में बिहार के लिए सिर्फ तटबंध जैसे ढांचागत उपाय काफी नहीं है, इसके साथ-साथ बाढ़ मैदान का नियमन, बाढ़ पूर्वानुमान, चेतावनी व्यवस्था, आपदा तैयारी और प्राकृतिक जलधारण क्षेत्रों जैसे उपायों पर भी जरूरी बताया गया है.
नजर अब्बास-वी सुब्रमनियन और आरजे वासन की रिपोर्ट
JNU के पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर वी. सुब्रमण्यम और वैज्ञानिक नजर अब्बास ने साल 1984 में गंगा नदी बेसिन में मिट्टी के कटाव और तलछट परिवहन को लेकर अपनी एक रिपोर्ट पेश की थी. इस रिपोर्ट के अनुसार, गंगा नदी द्वारा कोलकाता के पास सालाना लगभग 411 मिलियन टन गाद लाई जा रही. यह रिपोर्ट बताती है कि इस अत्यधिक कटाव के कारण बेसिन की ऊंचाई में लगातार कमी आ रही है. वहीं, 2003 में आरजे वासन ने इसी पर आधारित एक रिपोर्ट पेश की थी. इसके अनुसार, गंगा नदी अपने साथ हर साल लगभग 73.6 करोड़ से 80 करोड़ मीट्रिक टन गाद लेकर आती है. फरक्का बराज के नदी का बहाव धीमा हो जाता है, जिससे वर्षों से गंगा और उसकी सहायक नदियों की तलहटी में बड़ी मात्रा में गाद (सिल्ट) जमा हो रही है. गाद जमा होने के कारण नदी की गहराई लगातार घटती जा रही है, जिससे नदी की जलधारण क्षमता में भारी गिरावट आई है.
नीतीश कुमार भी चिंता जताते रहे हैं
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी फरक्का बराज के कारण जमा होने वाली गाद पर अपनी चिंता जताते रहे हैं. उन्होंने केंद्र सरकार के हलदिया से इलाहाबाद तक नेशनल वाटरवे विकसित करने के फैसले का भी विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि बिहार पहले से ही फरक्का बराज के कुप्रभाव को झेल रहा है. अब नए बराजों के कारण गंगा में जल का प्रवाह और बाधित होगा. नतीजे में यह पवित्र नदी बड़े-बड़े तालाबों की एक सीरीज में बदल जाएगी. फरक्का बराज की उपयोगिता पर सवाल उठाने वालों में नीतीश कुमार अकेले व्यक्ति नहीं हैं. कुछ विशेषज्ञ इसके निर्माण के समय से ही इसकी मुखालफत करते रहे हैं. पश्चिम बंगाल सरकार में मुख्य अभियंता रहे कपिल भट्टाचार्य ने भी इसका कड़ा विरोध किया था. उन्होंने 1961 में चेतावनी दी थी कि फरक्का बराज कुछ इस ढंग से डिजाइन किया गया है कि बाढ़ के समय यह बहुत कम पानी बाहर निकालेगा. ऐसे में बिहार के कई जिलों में गंगा का पानी भयानक बाढ़ लाएगा. उस वक्त उनका विरोध करते हुए उन्हें पाकिस्तानी जासूस तक कहा गया था, लेकिन आद उनकी सभी भविष्यवाणियां सच साबित हो रही है.
गाद को संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी
बिहार सरकार ने नदी की गाद को संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की बड़ी तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए खान एवं भूतत्व विभाग की ओर से यह पता लगाया जाएगा कि किस नदी के किस हिस्से में कितनी गाद जमा है. इसके साथ ही गाद की मात्रा, उसे निकालने की संभावना और उसके इस्तेमाल का भी आकलन होगा. सरकार की ओर से पहले गाद का विस्तृत सर्वेक्षण कराया जाएगा. इसके आधार पर जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन तैयार होगा और स्वीकृति के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी.