)
समस्तीपुर में दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और शहर में सुचारु यातायात व्यवस्था बनाए रखने को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. पूजा के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने और श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. इसी को देखते हुए सदर एसडीएम राकेश कुमार के नेतृत्व में सदर एसडीपीओ और ट्रैफिक डीएसपी ने विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों का निरीक्षण किया. इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के साथ पूजा समितियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए. निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मगरदही घाट स्थित बड़ी दुर्गा मंदिर और बहादुरपुर स्थित पुरानी दुर्गा मंदिर सहित विभिन्न पूजा पंडालों के स्थलों की व्यवस्था देखी.
अधिकारियों ने पूजा समितियों को श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया. वहीं, पूजा के दौरान शहर में जाम की समस्या से निपटने और यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने को लेकर भी आवश्यक निर्देश जारी किए गए, ताकि पूजा के दौरान श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी नहीं हो. पूजा पंडालों के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने समितियों को सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा. दुर्गा पूजा के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से निगरानी भी की जा रही है.
वहीं, दुर्गा पूजा और दशहरा को लेकर समस्तीपुर रेलवे जंक्शन पर यात्रियों की भीड़ बढ़ने लगी है. नशाखुरानी गिरोह, अटैची लिफ्टर और बदमाशों से बचाने के लिए रेलवे पुलिस ने संयुक्त जागरूकता अभियान चलाया. समस्तीपुर रेलवे जंक्शन पर आरपीएफ और जीआरपी की टीम ने संयुक्त जागरूकता अभियान चलाया. आरपीएफ इंस्पेक्टर अविनाश करोशिया के नेतृत्व में यात्रियों को नशाखुरानी से बचाव के तरीके बताए गए. पुलिस ने अपील की कि किसी भी अनजान व्यक्ति से खाने-पीने की चीजें नहीं लें. प्रसाद या अन्य खाद्य सामग्री के नाम पर नशीला पदार्थ देकर यात्रियों को बेहोश किया जा सकता है और फिर उनका सामान लेकर बदमाश फरार हो सकते हैं.
वहीं, नवरात्र के मौके पर नालंदा में भक्ति और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है. शहर से लेकर गांव तक डांडिया की धूम मची हुई है. इसी कड़ी में परवलपुर नगर पंचायत में भारत माता पूजा समिति और बिहारशरीफ के श्रम कल्याण केंद्र के मैदान में डांडिया कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां सैकड़ों श्रद्धालु भक्ति गीतों की धुन पर डांडिया खेलते नजर आए. रंग-बिरंगे परिधानों में सजे श्रद्धालुओं ने डांडिया खेलकर नवरात्र का उत्सव मनाया. इस दौरान पूरा माहौल भक्तिमय और उत्साह से सराबोर रहा.
श्रद्धालुओं का कहना है कि दूसरे की संस्कृति अपनाने से किसी का मान-सम्मान कम नहीं होता, बल्कि इससे सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को बढ़ावा मिलता है. गुजरात का पारंपरिक लोक नृत्य डांडिया अब देश के दूसरे हिस्सों में भी लोकप्रिय हो रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, डांडिया को मां दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक चले युद्ध का प्रतीकात्मक मंचन माना जाता है. वहीं, आयोजकों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से सनातन संस्कृति को बढ़ावा मिलता है और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत को जानने और समझने का अवसर मिलता है.