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प्रशांत किशोर से क्यों मिले मुख्य सचिव और DGP? राजद ने उठाए सवाल तो सत्तापक्ष को देना पड़ा जवाब

बिहार में अक्सर विधायक अफसरशाही को लेकर शिकायत करते रहते हैं, यहां तक सदन में भी यह मामला उठा है. सत्ता पक्ष के विधायक कई बार यह कहते रहे हैं कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते. ऐसे में नए-नवेले जन सुराज पार्टी के विधायक प्रशांत किशोर के साथ बड़े-बड़े अधिकारियों की तस्वीर कुछ अलग कहानी कहती नजर आ रही है.

प्रशांत किशोर से क्यों मिले मुख्य सचिव और DGP? राजद ने उठाए सवाल तो सत्तापक्ष को देना पड़ा जवाब
Image Credit: प्रशांत किशोर से क्यों मिले मुख्य सचिव और DGP? (X- @jansuraajonline)

जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर के विधायक प्रशांत किशोर की बिहार के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात को लेकर सियासी घमासान छिड़ा हुआ है. आखिर ऐसा क्या हुआ कि बिहार के मुख्य सचिव और DGP समेत तमाम बड़े अधिकारियों को जन सुराज के इकलौते विधायक से मिलना पड़ा? क्या प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशांत किशोर के बढ़ते कद का एहसास होने लगा है? या फिर यह कोई विशेष बैठक थी? इस बैठक में क्या हुआ? ये तमाम सवाल सियासी गलियारों में उठ रहे हैं. राजद ने तो इसे मर्यादा का उल्लंघन बताया है.

राजद ने मर्यादा का उल्लंघन बताया

राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगली लाल मंडल ने कहा कि हम लोगों ने पहले ही कहा था कि प्रशांत किशोर डमी उम्मीदवार हैं. राजद कहीं सामने नहीं आए, इसलिए प्रशांत किशोर को BJP का समर्थन हासिल है. अब प्रशांत किशोर को मुख्यमंत्री स्वयं अपने यहां बुला कर बात करें या DGP या चीफ सेक्रेटरी को उनके यहां भेजें, यह तो उनका मामला है, लेकिन अगर इस तरह से अफसरों का मनोबल गिराया जाएगा, तो प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह गलत होगा. यह मर्यादा के खिलाफ होगा.

कांग्रेस ने खेल दिया दलित कार्ड

इस मामले पर कांग्रेस की पूर्व विधायक प्रतिमा कुमारी ने कहा कि डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी ने जिस तरीके से नवनिर्वाचित विधायक के साथ समीक्षा बैठक की है, उससे ऐसा लग रहा है कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के विकास की बात नहीं, बल्कि बिहार में सरकार बदलने की मीटिंग चल रही है. कांग्रेस नेत्री ने कहा कि अगर उन्हें बिहार की चिंता होती तो ये वरीय अधिकारी बिहार के सभी 243 विधायकों के साथ बैठक करते. ऐसा लगता है कि इन अफसरों को जिन नेताओं की बिरादरी सूट करेगी, उनके साथ यह समीक्षा बैठक करेंगे. उन्होंने कहा कि ​मैं तो पूरे दावे के साथ कहती हूं कि पक्ष या विपक्ष के दलित नेताओं की बात नहीं सुनी जाती है. उन्होंने कहा कि जब मैं विधायक थी, तब मैंने डीजीपी साहब को कई बार फोन लगाया था, लेकिन आज तक उनके कार्यालय से न कोई जवाब आया, न मेरा फोन उठाया गया.

प्रशांत किशोर को राजद ने बड़ा बनाया- JDU

वहीं, इस पर JDU कोटे से बिहार सरकार में मंत्री मदन सहनी ने कहा कि प्रशांत किशोर जन सुराज के सबसे बड़े नेता हैं, लेकिन एक विधायक के नाते सबका मान-सम्मान और अधिकार बराबर है. अगर उनके साथ मुख्य सचिव, डीजीपी या अन्य अधिकारियों ने समीक्षा बैठक की है, तो विपक्ष को थोड़ा उदार होना पड़ेगा. समीक्षा बैठक करने में कोई हर्ज नहीं है. यह दूसरे के साथ भी हो, तो और अच्छा रहेगा. इस मामले पर बीजेपी के विधायक संजय गुप्ता ने कहा कि प्रशांत किशोर को इतना बड़ा बनाने में सबसे बड़ा रोल राजद का है. बांकीपुर के चुनाव में राजद ने अपना वोट उधर शिफ्ट कराया.

BJP विधायक ने दी अधिकारियों को सलाह

अधिकारियों के साथ पीके की मीटिंग को लेकर बीजेपी विधायक ने कहा कि मुख्य सचिव के कार्यालय से बयान आ गया है कि प्रशांत किशोर जी ने उनसे समय मांगा था और वो मिलने के लिए गए थे. उसी समय अन्य अधिकारियों की टीम वहां मौजूद थी. बीजेपी विधायक ने कहा कि अधिकारियों को फोटो सेशन कराने नहीं कराने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि इतना लंबा फोटो सेशन आज तक हम लोगों ने भी नहीं किया है. उन अधिकारियों को किस परिस्थिति में यह करना पड़ गया, यह उन्हें सोचना चाहिए.

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About the Author

K. Raj Mishra

K. Raj Mishra

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
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