भागलपुर में गंगा नदी के किनारे भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) का क्रूज शिप एमवी राजेंद्र पिछले 15 दिनों से बालू में फंसा हुआ है. गंगा के जलस्तर में अचानक गिरावट आने के कारण जहाज नदी के कम गहरे हिस्से में फंस गया. इसके बाद से ही इसे बाहर निकालने की लगातार कोशिशें की जा रही हैं. जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग, क्रूज संचालक और IWAI की टीम अब तक ड्रेजिंग के साथ-साथ जेसीबी और क्रेन की मदद से जहाज को निकालने का प्रयास कर चुकी है, लेकिन इन कोशिशों के बावजूद जहाज को कुछ मीटर ही आगे बढ़ाया जा सका है.
जहाज के लंबे समय से फंसे रहने के कारण इसे बाहर निकालना चुनौती बन गया है. इसी वजह से प्राधिकरण को प्रतिदिन लाखों रुपये के नुकसान होने की बात कही जा रही है. जहाज को निकालने के लिए अब तक किए गए प्रयासों से कोई खास सफलता नहीं मिली है. ऐसे में अधिकारियों की ओर से दूसरे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, ताकि क्रूज शिप को जल्द से जल्द बालू से बाहर निकालकर गहरे पानी तक पहुंचाया जा सके.
दरअसल, विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद गंगा नदी के रास्ते आवागमन को सुगम बनाने के लिए जलमार्ग से परिचालन किया जा रहा है. इसी व्यवस्था के तहत क्रूज शिप एमवी राजेंद्र को भी लगाया गया था. हालांकि, गंगा के जलस्तर में गिरावट आने से जहाज बीच रास्ते में ही बालू में फंस गया. इसके बाद से इसे निकालने के लिए प्रशासन की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल पाई है.
अब जहाज को बालू से निकालने के लिए एक नई तकनीक का सहारा लेने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए कोलकाता से विशेष फ्लोटिंग बैलून मंगाए जा रहे हैं. इनकी मदद से जहाज को ऊपर उठाकर गहरे पानी तक पहुंचाने की योजना है. अब सबकी नजरें इस नई तकनीक पर टिकी हैं कि इससे जहाज को बाहर निकालने में कितनी सफलता मिलती है और पिछले 15 दिनों से फंसे क्रूज शिप को आखिर कब तक गंगा के गहरे पानी में पहुंचाया जा सकेगा.
रिपोर्ट: अश्वनी कुमार