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पहले अनंत सिंह और अब नीरज कुमार कुछ भी बोलने लगे हैं... जेडीयू में ये क्या चल रहा है? पार्टी के पोस्टर से ललन सिंह भी गायब

अनंत सिंह के निष्कासन के बाद लगा था कि पार्टी ने एकमत से यह फैसला लिया है और इसी के साथ ही विवाद का पटाक्षेप हो जाएगा, लेकिन नीरज कुमार के बयान से पता चल रहा है कि इस विवाद की जड़ें कितनी गहरी हैं.

पहले अनंत सिंह और अब नीरज कुमार कुछ भी बोलने लगे हैं... जेडीयू में ये क्या चल रहा है? पार्टी के पोस्टर से ललन सिंह भी गायब
Image Credit: संजय कुमार झा और ललन सिंह (AI Image)

जनता दल यूनाइटेड में आखिर ये क्या चल रहा है. बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान अनंत सिंह कुछ भी बोलकर पार्टी और नेताओं को निशाने पर लिए रहते थे और अब वही काम नीरज कुमार करने लगे हैं. दरअसल, गुरुवार को जब नीरज कुमार से पूछा गया कि क्या वे चुनाव जीतने के बाद ललन सिंह से आशीर्वाद लेने जाएंगे तो उन्होंने कहा कि सवाल ही पैदा नहीं होता है, क्योंकि मेरे चुनाव के वक्त मेरी क्या गलती थी? हमको चुनावी प्रक्रिया में क्यों इतनी परेशानी झेलनी पड़ी? नीरज कुमार ने यह भी कहा कि मेरे मां-बाप ने ये संस्कार दिया है कि जो कर्ज लोग हमको दिए हैं, उसे हम सूद समेत लौटाएंगे. नीरज कुमार ने हो सकता है आवेश में ये बातें कही हो, लेकिन इसकी जरूरत नहीं थी. खासतौर से जब आप विजयी भव: की मुद्रा में हों तो आपके रुख में नरमी होनी चाहिए. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी नीरज कुमार के रुख पर यही प्रतिक्रिया दी है. अनंत सिंह और नीरज कुमार के विवाद को साइड में रखें तो पार्टी की ओर से नीरज कुमार को जीत की बधाई देने वाला जो पोस्टर जारी किया गया है, उसमें ललन सिंह को दरकिनार किया गया है.

ललन सिंह से आशीर्वाद न लेने के नीरज कुमार के बयान से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने गलत बताया है. सम्राट सरकार में मंत्री और नीतीश कुमार के करीबी भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा है कि ललन सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी को बढ़ाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उनको लेकर ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने भी ऐसा ही बयान दिया है और ललन सिंह के योगदान को याद किया है.

JDU ने सोशल मीडिया पर दो पोस्टर जारी किया है, लेकिन उसमें ललन सिंह को जगह नहीं मिली है. इससे जनता दल यूनाइटेड के भीतर का अंतर्कलह खुलकर सामने आ गया है. वहीं, नीरज कुमार ने खुलकर कह दिया है ललन सिंह से आशीर्वाद लेने का सवाल ही पैदा नहीं होता. इस बाबत संजय कुमार झा ने कहा, ललन सिंह हमारे पार्टी के आदरणीय नेता हैं. वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं. हम लोग उनका सम्मान करते हैं. पार्टी में थोड़ी-बहुत नाराजगी चलती रहती है. पार्टी को बढ़ाने में उनका बड़ा योगदान है.

सवाल यह नहीं है कि नीरज कुमार ने ललन सिंह को लेकर यह बात क्यों कही, बल्कि सवाल इस बात को लेकर है कि जब अनंत सिंह पर बड़बोलेपन, आला नेताओं को लेकर आपत्तिजनक बयानबाजी करने और पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर कार्रवाई हुई है तो क्या नीरज कुमार भी इस दायरे में आएंगे या नहीं? अगर अनंत सिंह को छूट नहीं मिली तो फिर नीरज कुमार को क्यों छूट मिलनी चाहिए? क्या पार्टी की ओर से उन्हें समन किया जाएगा? अगर नहीं किया जाएगा, तो फिर पार्टी में अनुशासन का क्या मतलब रह जाएगा?

कही ऐसा तो नहीं कि पार्टी में संजय कुमार झा बनाम ललन सिंह के बीच अंदरूनी शक्ति संघर्ष के चक्कर में ये सब कवायद हो रही है. यह सब जानते हैं कि अनंत सिंह, ललन सिंह के करीबी हैं और जब नीरज कुमार संजय कुमार झा से आशीर्वाद लेने पहुंचे, तो इन दोनों नेताओं के बीच की गर्मजोशी भी सबके सामने आ गई. तो क्या अनंत सिंह और नीरज कुमार प्यादे की भूमिका में हैं और असली लड़ाई संजय कुमार झा और ललन सिंह के बीच तो नहीं हो रही है? एक विधान पार्षद का यह कहना कि ललन सिंह से आशीर्वाद लेने का सवाल ही पैदा नहीं होता, अनुशासनहीनता की श्रेणी में नहीं आता? सवाल घूम फिरकर वहीं आ जाता है कि क्या अनंत सिंह की तरह नीरज कुमार के खिलाफ कार्रवाई होगी? और अगर नहीं होगी तो फिर क्यों?

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Sunil Mishra

Sunil Mishra

इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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