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हाइवे पर गाड़ी चलाने का अपना अलग ही एक्सपीरियंस होता है. शहर का ट्रैफिक पीछे छोड़ते ही रफ्तार 80 के पार पहुंच जाती है. ऐसे में न सिर्फ सफर कम समय में पूरा होता है, बल्कि ट्रैफिक जाम का भी सामना नहीं करना पड़ता है. लेकिन, यहां आपका सामना लंबी दूरी के ट्रकों, राज्य परिवहन की बसों और कई बार गलत दिशा से आती गाड़ियों से भी होता है. इसी वजह से हाइवे का सफर खतरनाक भी हो सकता है. जरा सी लापरवाही आपके लिए खतरनाक साबितो हो सकती है.
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में होने वाले कुल सड़क हादसों और मौतों में एक बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्गों का होता है. हाइवे पर होने वाले ज्यादातर हादसे मौसम, दृश्यता और तेज रफ्तार को इग्नोर करने की वजह से होते हैं. अगर आप अपने सफर को तनावमुक्त बनाना चाहते हैं, तो इन 8 बातों का खास ख्याल रखें.
किसी भी सफर पर निकलने से पहले गाड़ी की ब्रेक, टायर प्रेशर, स्टेपनी और वाइपर की स्थिति जरूर चेक करना चाहिए. कूलेंट और वाशर फ्लूड को पूरा रखें. गाड़ी के जरूरी कागजात जैसे आरसी, बीमा, लाइसेंस और पीयूसी साथ रखें.
मल्टी-लेन हाइवे पर बाईं लेन नार्मल स्पीड के लिए और दाईं लेन सिर्फ ओवरटेक करने के लिए होती है. हाइवे पर सफर करने के दौरान अचानक लेन बदलने से बचना चाहिए. अगर आगे वाली गाड़ी रास्ता न दे, तो हॉर्न या हेडलाइट डिपर का प्रयोग करें.
हाइवे पर आगे चल रहे वाहन से कम से कम 3 सेकंड की दूरी बनाकर रखें. रात के समय या बारिश के दौरान इस दूरी को बढ़ाकर 4 से 5 सेकंड कर देना चाहिए, जिससे अचानक ब्रेक लगाने पर एक्सीडेंट से बचा जा सके.
साइनबोर्ड पर लिखी स्पीड लिमिट साफ मौसम और सूखे रास्ते के लिए होती है. बारिश या घने कोहरे में गाड़ी की रफ्तार 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा कम कर लें और कोहरे में फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करें, इससे किसी भी अचानक आने वाले वाहन से टकराने से बचा जा सकता है.
ट्रक और बस जैसे भारी वाहनों के ब्लाइंड स्पॉट्स बड़े होते हैं. ओवरटेक करने से पहले हॉर्न या डिपर से ड्राइवर को सूचना दें और सुरक्षित दूरी बनाकर रखें.
अंधेरा होने से पहले ही हेडलाइट्स ऑन कर लें. सामने से गाड़ी आते समय हाई बीम की जगह लो बीम यानी डिपर का प्रयोग करें. सामने से आती तेज रोशनी से बचने के लिए सड़क के बाएं किनारे की ओर देखें.
लंबे सफर पर निकलने से पहले फ्यूल स्टेशन और टोल प्लाजा की जानकारी ऑनलाइन ही निकाल कर रख लें. राज्य राजमार्गों पर देर रात कई पेट्रोल पंप और ढाबे बंद हो जाते हैं, इसलिए सही समय पर फ्यूल और रीफ्रेशमेंट का ध्यान रखें.
भारतीय हाइवे अक्सर गांवों और बस्तियों से होकर गुजरते हैं. ऐसे इलाकों में रफ्तार धीमी रखें और सड़क के किनारों पर नजर बनाए रखें, क्योंकि आवारा पशु अचानक सामने आ सकते हैं.
इसके साथ ही अगर गाड़ी खराब हो जाए, तो उसे पूरी तरह से सड़क के किनारे यानी शोल्डर लेन पर पार्क करें. हैजार्ड लाइट यानी चारों इंडिकेटर को ऑन कर दें और गाड़ी से 50 मीटर पीछे रिफ्लेक्टिव ट्राइंगल रखें. सभी यात्रियों को गाड़ी से बाहर निकालकर सुरक्षित दूरी पर खड़ा करें.