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अक्सर लोगों को लगता है कि अगर कार ओडोमीटर पर 1 लाख किलोमीटर का आंकड़ा पार कर ले, तो उसकी लाइफ कम हो जाती है. ऐसे में लोगों को लगने लगता है कि कार को बदलने का समय आ गया है. लेकिन यह जरूरी नहीं है कि अगर कार 1 लाख किलोमीटर दूरी तय कर ले, तो उसकी लाइफ कम हो जाती है. अगर सही देखभाल और समय पर मेंटेनेंस मिले, तो आज की गाड़ियां 1.5 से 2 लाख किलोमीटर तक बिना किसी बड़ी परेशानी के आराम से चल सकती हैं.
भारत की ड्राइविंग कंडीशंस जैसे भारी ट्रैफिक, गड्ढों भरे रास्ते और भीषण गर्मी में 1 लाख किमी के बाद कार को थोड़ी ज्यादा मेंटेनेंस की जरूरत होती है. इंजन ऑयल बदलने से लेकर सस्पेंशन, ब्रेक और टायरों की सही जांच आपकी पुरानी कार में भी नई जैसी जान फूंक सकती है और आपको किसी बड़े-महंगे नुकसान से बचा सकती है.
इसलिए अगर आपकी भी कार 1 लाख किलोमीटर की दूरी तय कर चुकी है या करने वाली है, तो अपनी कार को दुरुस्त रखने के लिए इन जरूरी बातों का ध्यान रखें-
इंजन की परफॉर्मेंस बनाए रखने के लिए सही और अच्छी क्वालिटी का इंजन ऑयल इस्तेमाल करें. इंजन ऑयल के साथ-साथ ऑयल फिल्टर को भी समय पर चेंज करते रहें. कार को ओवरहीटिंग से बचाने के लिए कूलेंट के लेवल और उसकी क्वालिटी की जांच करते रहें. इसके साथ ही रेडिएटर, पाइप्स और वॉटर पंप को भी समय-समय पर चेक कराएं.
खराब सस्पेंशन कार की राइड क्वालिटी को खराब कर सकता है. शॉक एब्जॉर्बर, बुशिंग और लिंक रोड्स में आने वाली खराबी को कभी भी इग्नोर न करें. मैनुअल कारों में क्लच प्लेट घिसने की जांच कराएं, वहीं ऑटोमैटिक कारों में ट्रांसमिशन फ्लूइड को समय पर बदलें.
ब्रेक पैड, डिस्क और ब्रेक फ्लूइड की सर्विस के दौरान जरूर चेक कराएं. अगर ब्रेक लगाते समय किसी तरह की आवाज या वाइब्रेशन महसूस हो, तो तुरंत मैकेनिक को दिखाएं. कार की बैटरी औसतन 3 से 5 साल चलती है, इसलिए बैटरी और उसकी वायरिंग को भी चेक कराते रहें.
कार के टायर अगर पुराने या घिस गए हैं, तो बिना देरी किए बदलें. इसके साथ ही समय-समय पर एयर प्रेशर भी चेक कराते रहें. सही एयर प्रेशर बनाए रखने से न सिर्फ माइलेज बेहतर होता है, बल्कि कार के बाकी पार्ट्स पर भी प्रेशर कम पड़ता है. समय-समय पर व्हील अलाइनमेंट और बैलेंसिंग जरूर करवाएं.
शहर के ट्रैफिक में चलने वाली कारों के फ्यूल इंजेक्टर में कचरा जमा हो सकता है. कार की माइलेज और पिकअप बनाए रखने के लिए फ्यूल सिस्टम की पीरियोडिक क्लीनिंग करवाएं और हमेशा अच्छी क्वालिटी के ईंधन का इस्तेमाल करें.
कार को धूप से बचाने के लिए सनशेड का इस्तेमाल करें और इंटीरियर की सफाई का ध्यान रखें. बाहरी हिस्से को पेंट से बचाने के लिए कार पॉलिश करा सकते हैं. गाड़ी चलाते समय अचानक एक्सीलेटर दबाने, तेज ब्रेक लगाने या ओवरलोडिंग करने से बचें. कार से आने वाली किसी भी अजीब आवाज या बदलाव पर तुरंत ध्यान दें.