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चीन की इलाके हथियाने की नीति: शी जिनपिंग के विरोध में उमड़े तिब्बती, वाशिंगटन की सड़कों पर नारेबाजी

हर सिक्के के दो पहलू होते हैं. एक ओर शी जिनपिंग की मेहमाननवाजी में वाशिंगटन डीसी के वेन्यू चीनी रंग में रंगे थे, दूसरी ओर उनकी मौजूदगी से आहत लोगों ने मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाकर चीनी राष्ट्रपति के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे.

Written By Shwetank Ratnamber
Published: Sep 25, 2026, 11:48 AM IST | Updated: Sep 25, 2026, 12:58 PM IST
Image Credit: Reuters
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Xi US visit: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के वाशिंगटन डीसी पहुंचने के बाद तिब्बती समुदाय के लोगों ने अमेरिकी राजधानी में प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप प्रशासन से मांग की है कि वो तिब्बत की स्वायत्ता के मुद्दे को चीन की कम्युनिस्ट सरकार के सामने न सिर्फ मजबूती से उठाए, बल्कि विवाद के समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए उसे हिदायत दे. वाशिंगटन में उइगर ह्यूमन राइट्स प्रोजेक्ट (UHRP) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ओमर कनात ने कहा, 'तिब्बतियों और उइगरों की हालत कमोबेश एक जैसी है. जिस तरह चीन के कुछ प्रांतों में उइगरों की हालत खराब है, वैसा बुरा हाल तिब्बत के लोगों का करने की तैयारी है.'

6 देशों पर चीन ने किया कब्जा: रिपोर्ट्स

आपको बताते चलें कि चीन दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जिसकी 22 हजार 117 किमी लंबी सीमा 14 देशों से लगती है. यानी ये दुनिया का पहला ऐसा देश है, जिसकी सीमाएं सबसे ज्यादा देशों से मिलती हैं और इन सभी देशों के साथ चीन का किसी न किसी तरह का सीमा विवाद चल रहा है. जिन इलाकों में चीन का जोर ज्यादा चला वहां के लोगों ने उसके ऊपर दमनकारी चाबुक चलाने का आरोप लगाया.  

इसी परिप्रेक्ष्य में अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कनात ने कहा, 'दुनिया जानती है कि और जैसा कि पहले भी कहा जा चुका है कि तिब्बत कभी भी चीन का हिस्सा नहीं था. इसी तरह पूर्वी तुर्किस्तान भी कभी चीन का हिस्सा नहीं था. दुनिया की तमाम संस्थाओं के रिकॉर्डस में मौजूद जानकारी के मुताबिक 1949 में कम्युनिस्ट शासन आते ही चीन ने तिब्बत, पूर्वी तुर्किस्तान और इनर मंगोलिया पर कब्जा किया था. उन्होंने पूर्वी तुर्किस्तान पर 1949 में और तिब्बत पर 1959 में कब्जा किया.'

तिब्बत के लोगों का वजूद मिटाने की साजिश: UHRP

ओमर ने आगे कहा, 'तिब्बत में चीनी सरकार ने धार्मिक प्रथाओं, तिब्बती भाषा और सांस्कृतिक जीवन पर गंभीर प्रतिबंध लगाए हैं. तिब्बती बच्चों को उनके परिवारों से अलग कर दिया जाता है और उन्हें ऐसे माहौल में पाला जाता है, जहां उनकी भाषा, संस्कृति और आस्था से उनका संपर्क टूट जाता है. वहीं पूर्वी तुर्किस्तान, जिसे चीन शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र बताता आया है. वहां बोर्डिंग स्कूल व्यवस्था के विस्तार के साथ उइगर बच्चे भी तिब्बत के लोगों की तरह दयनीय स्थितियों का सामना कर रहे हैं. उइगरों ने बड़े पैमाने पर मनमानी हिरासत, जबरन मजदूरी, निगरानी, परिवारों के बिछड़ने और धर्म, भाषा तथा संस्कृति पर व्यापक प्रतिबंधों का सामना किया है. इस दमन का निशाना हमारी पहचान को बचाए रखने और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की हमारी क्षमता है. यही वजह है कि तिब्बतियों और उइगरों के बीच एकजुटता महत्वपूर्ण है.'

यानी एक ओर वाशिंगटन डीसी में शी जिनपिंग का भव्य स्वागत सत्कार हुआ. दूसरी ओर तिब्बतियों, उइगरों और चीनी सरकार द्वारा सताए अन्य समुदायों के लोगों ने चीन पर अपने दमन का आरोप लगाकर खुद को चैन से जीने देने की अपील की. शी की यात्रा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा, हमारे सामने एक मुश्किल सवाल मुंह बाए खड़ा है कि क्या हम खुलकर उनका विरोध करें या अपने परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें? क्योंकि चीन का नया जातीय एकता कानून हमारे डर को और बढ़ा देता है.'

ऐसे ही एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'तिब्बती यहां इसलिए आए हैं, क्योंकि ट्रंप, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने तिब्बत का मुद्दा मजबूती से उठाएं. ताकि जिनपिंग भी यह संदेश समझें कि यहां मौजूद तिब्बती और तिब्बती अमेरिकी लोग तिब्बत के मुद्दे को नहीं भूलेंगे. हम इसका समाधान चाहते हैं और इसलिए यहां अपनी आवाज उठा रहे हैं.'

चीन की जमीन हथियाने की नीति

चीन के नक्शे में बहुत घालमेल है. इसमें 6 देश पूर्वी तुर्किस्तान, तिब्बत, इनर मंगोलिया या दक्षिणी मंगोलिया, ताइवान, हॉन्गकॉन्ग और मकाउ देखे जा सकते हैं. ये वो देश हैं, जिन पर चीन ने कब्जा कर रखा है या इन्हें अपना हिस्सा बताता है. इन सभी देशों का कुल एरिया 41 लाख 13 हजार 709 वर्ग किमी से ज्यादा है. यानी चीन के कुल क्षेत्रफल का 43 फीसदी लैंड जमीनों पर कब्जा करके बढ़ाई गई है.

समंदर हड़पने के फिराक में 'ड्रैगन'

जमीन पर चीन की कारस्तानियों को छोड़िए वो पूरा सागर निगलने के फिराक में ये दावा कर चुका है कि दक्षिणी चीन सागर से उसका संबंध 2 हजार साल से भी ज्यादा पुराना है. जबकि इस सागर पर पहले जापान का कब्जा हुआ करता था, लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के तुरंत बाद चीन ने इस पर अपना दावा ठोक दिया. 

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About the Author

श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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