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नवाज शरीफ और बेनजीर की तरह इमरान खान भी छोड़ेंगे पाकिस्तान? जेल में समझौते के दबाव का दावा

जेल में कैद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर दावा किया जा रहा है कि उन्हें भी देश छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है. इससे पहले इसी तरह नवाज शरीफ को भी 10 वर्षों के लिए पाकिस्तान से बाहर भेजा गया था.

Written By Tahir Kamran
Published: Oct 17, 2026, 05:01 PM IST | Updated: Oct 17, 2026, 05:27 PM IST
Image Credit: AI की मदद से बनाई गई तस्वीर
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर दावा किया जा रहा है, जेल में रहने के दौरान उनपर एक समझौते का दबाव बनाया जा रहा है. इस समझौते के तहत उन्हें देश से बाहर होना होगा. यह बिल्कुल वही मॉडल है, जो इससे पहले पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्रियों नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो के साथ भी अपनाया गया था. यह दावा 'DAWN' ने देश की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता महमूद खान अचकजई के हवाले से किया है.

महमूद खान ने पेशावर हाई कोर्ट में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान उनके तहरीक-ए-तहफ्फुज-ए-आइन-ए-पाकिस्तान (TTAP) के नेता सरदार अख्तर मेंगल और अल्लामा राजा नासिर अब्बास भी मौजूद थे. इस दौरान अचकजई ने मौजूदा सत्तारूढ़ गठबंधन (जिसमें पीएमएल-एन और पीपीपी शामिल हैं) पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इमरान खान पर उसी तरह के समझौते के लिए दबाव डाला है, जैसा कि नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो को निर्वासन में जाने के लिए मजबूर करने वाली व्यवस्थाओं के बराबर था.

12 अक्टूबर 1999 को उस समय के सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ ने तख्तापलट कर उनकी सरकार को हटा दिया और सत्ता अपने हाथ में ले ली. नवाज शरीफ को मुशर्रफ ने सलाखों के पीछे डाल दिया गया था. इसके बाद दिसंबर 2000 में एक समझौते के तहत उन्हें परिवार के साथ सऊदी अरब भेज दिया गया था. ऐसा करने से उन्हें जेल की सजा से आजादी मिल गई थी और अपनी मर्जी के मुताबिक पाकिस्तान से बाहर जीने का अधिकार मिल गया था. एक जानकारी के मुताबिक समझौते के तहत उन्हें 10 साल तक पाकिस्तान में वापसी नहीं करनी थी.

7 साल वापसी की, तो एयरपोर्ट से ही भेज दिया वापस

तकरीबन 7 वर्षों के बाद नवाज शरीफ ने पाकिस्तान लौटने का फैसला लिया और अगस्त 2007 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उनकी देश वापसी के हक में फैसला भी सुना दिया था. इसी के तहत जब नवाज शरीफ 10 सितंबर 2007 को पाकिस्तान पहुंचे, तो उन्हें इस्लामाबाद एयरपोर्ट से ही वापस सऊदी अरब वापस भेज दिया था. एयरपोर्ट से ही वापस भेजने के बाद मुशर्रफ को राजनीतिक तौर पर विरोध का सामना करना पड़ा था, क्योंकि नवाज शरीफ अदालत से इजाजत मिलने के बाद पाकिस्तान लौट रहे थे.

हालांकि, नवंबर 2007 में नवाज शरीफ फिर से पाकिस्तान आए और इस बार उन्हें देश में एंट्री की इजाजत मिल गई. उनकी वापसी ऐसे समय हुई, जब मुशर्रफ की सत्ता को लेकर विरोध बढ़ रहा था और देश चुनाव की तरफ बढ़ रहा था.

8 साल तक पाकिस्तान से बाहर रहीं बेनजीर भुट्टो

वहीं अगर पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की बात करें, तो उन्हें दो बार प्रधानमंत्री पद मिला और दोनों ही बार उनका कार्यकाल विवादों से घिरा रहा. इसी के चलते नवंबर 1996 में उनकी सरकार को राष्ट्रपति फारूक लेघारी ने बर्खास्त कर दिया था. उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासन में गड़बड़ी के आरोप लगे थे. इसके बाद 1997 में हुए आम चुनाव में उनकी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा. उनके पति आसिफ अली जरदारी जेल में थे और बेनजीर के खिलाफ भी कानूनी मामले चल रहे थे.

यह भी पढ़ें: मोहम्मद आसिम ढेर, अब मसूद का नंबर: पाकिस्तान में आतंकियों के सिर पर मंडरा रही मौत; ISI की उड़ी नींद

इसके बाद बेनजीर भुट्टो 1999 में पाकिस्तान छोड़कर विदेश चली गई थीं. उन्होंने लंदन और दुबई में लगभग 8 साल गुजारे. हालांकि, भुट्टो के मामले में नवाज शरीफ की तरह 10 साल जैसा कोई समझौता नहीं हुआ था. 2007 में बेनजीर भुट्टो और परवेज मुशर्रफ के बीच हुई राजनीतिक बातचीत के बाद वो भी पाकिस्तान वापस आ गईं. 18 अक्टूबर 2007 को बेनजीर पाकिस्तान लौट आईं और इसी साल 27 दिसंबर 2007 को रावलपिंडी में एक चुनावी रैली के बाद उनकी हत्या कर दी गई. जिसका उनकी पार्टी को चुनाव में फायदा भी मिला.

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Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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