पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर दावा किया जा रहा है, जेल में रहने के दौरान उनपर एक समझौते का दबाव बनाया जा रहा है. इस समझौते के तहत उन्हें देश से बाहर होना होगा. यह बिल्कुल वही मॉडल है, जो इससे पहले पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्रियों नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो के साथ भी अपनाया गया था. यह दावा 'DAWN' ने देश की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता महमूद खान अचकजई के हवाले से किया है.
महमूद खान ने पेशावर हाई कोर्ट में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान उनके तहरीक-ए-तहफ्फुज-ए-आइन-ए-पाकिस्तान (TTAP) के नेता सरदार अख्तर मेंगल और अल्लामा राजा नासिर अब्बास भी मौजूद थे. इस दौरान अचकजई ने मौजूदा सत्तारूढ़ गठबंधन (जिसमें पीएमएल-एन और पीपीपी शामिल हैं) पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इमरान खान पर उसी तरह के समझौते के लिए दबाव डाला है, जैसा कि नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो को निर्वासन में जाने के लिए मजबूर करने वाली व्यवस्थाओं के बराबर था.

12 अक्टूबर 1999 को उस समय के सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ ने तख्तापलट कर उनकी सरकार को हटा दिया और सत्ता अपने हाथ में ले ली. नवाज शरीफ को मुशर्रफ ने सलाखों के पीछे डाल दिया गया था. इसके बाद दिसंबर 2000 में एक समझौते के तहत उन्हें परिवार के साथ सऊदी अरब भेज दिया गया था. ऐसा करने से उन्हें जेल की सजा से आजादी मिल गई थी और अपनी मर्जी के मुताबिक पाकिस्तान से बाहर जीने का अधिकार मिल गया था. एक जानकारी के मुताबिक समझौते के तहत उन्हें 10 साल तक पाकिस्तान में वापसी नहीं करनी थी.

तकरीबन 7 वर्षों के बाद नवाज शरीफ ने पाकिस्तान लौटने का फैसला लिया और अगस्त 2007 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उनकी देश वापसी के हक में फैसला भी सुना दिया था. इसी के तहत जब नवाज शरीफ 10 सितंबर 2007 को पाकिस्तान पहुंचे, तो उन्हें इस्लामाबाद एयरपोर्ट से ही वापस सऊदी अरब वापस भेज दिया था. एयरपोर्ट से ही वापस भेजने के बाद मुशर्रफ को राजनीतिक तौर पर विरोध का सामना करना पड़ा था, क्योंकि नवाज शरीफ अदालत से इजाजत मिलने के बाद पाकिस्तान लौट रहे थे.
हालांकि, नवंबर 2007 में नवाज शरीफ फिर से पाकिस्तान आए और इस बार उन्हें देश में एंट्री की इजाजत मिल गई. उनकी वापसी ऐसे समय हुई, जब मुशर्रफ की सत्ता को लेकर विरोध बढ़ रहा था और देश चुनाव की तरफ बढ़ रहा था.

वहीं अगर पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की बात करें, तो उन्हें दो बार प्रधानमंत्री पद मिला और दोनों ही बार उनका कार्यकाल विवादों से घिरा रहा. इसी के चलते नवंबर 1996 में उनकी सरकार को राष्ट्रपति फारूक लेघारी ने बर्खास्त कर दिया था. उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासन में गड़बड़ी के आरोप लगे थे. इसके बाद 1997 में हुए आम चुनाव में उनकी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा. उनके पति आसिफ अली जरदारी जेल में थे और बेनजीर के खिलाफ भी कानूनी मामले चल रहे थे.
इसके बाद बेनजीर भुट्टो 1999 में पाकिस्तान छोड़कर विदेश चली गई थीं. उन्होंने लंदन और दुबई में लगभग 8 साल गुजारे. हालांकि, भुट्टो के मामले में नवाज शरीफ की तरह 10 साल जैसा कोई समझौता नहीं हुआ था. 2007 में बेनजीर भुट्टो और परवेज मुशर्रफ के बीच हुई राजनीतिक बातचीत के बाद वो भी पाकिस्तान वापस आ गईं. 18 अक्टूबर 2007 को बेनजीर पाकिस्तान लौट आईं और इसी साल 27 दिसंबर 2007 को रावलपिंडी में एक चुनावी रैली के बाद उनकी हत्या कर दी गई. जिसका उनकी पार्टी को चुनाव में फायदा भी मिला.
